Rakesh Tikait: MA-LLB के बाद दिल्ली पुलिस की नौकरी, 44 बार जेल जा चुके हैं ये किसान नेता
लखनऊ। केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकाली। इस दौरान कई जगहों पर पुलिस और कुछ किसानों के बीच टकराव हुआ। किसानों ने तय रूट का उल्लंघन करते हुए कई जगहों पर बैरिकेड तोड़े तो पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज करते हुए आंसू गैस के गोले दागे। इस घटनाक्रम के बाद दो किसान नेता आंदोलन से अलग हो गए हैं। भाकियू (भानु गुट) और वीएम सिंह आंदोलन से अलग हो गए हैं। गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान किसानों के उपद्रव के बाद उनकी अगुआई करने वाले किसान नेताओं के सुर भी अब बदले-बदले से हैं। इन सबके बीच किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) एक चर्चा में बने हुए हैं। राकेश टिकैत किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं और ट्रैक्टर मार्च से पहले 'लाठी-डंडे साथ लाओ' वाले बयान के बाद लोगों के निशाने पर हैं।
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MA-LLB के बाद दिल्ली पुलिस में की नौकरी
राकेश टिकैत किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष रहे स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत (Mahendra Singh Tikait) के दूसरे बेटे हैं। राकेश का जन्म मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली गांव में 4 जून 1969 को हुआ था। मेरठ यूनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई के बाद राकेश ने एलएलबी की डिग्री ली। बताते हैं कि वर्ष 1985 में राकेश दिल्ली पुलिस में एसआई यानी कि सब इंस्पेक्टर के तौर पर भर्ती हुए थे। लेकिन किसानों के लिए नौकरी छोड़ दी थी। दरअसल, 1993-1994 में दिल्ली के लाल किले पर किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में किसानों का आंदोलन चल रहा था। राकेश टिकैत इसी परिवार से आते थे, इसलिए सरकार ने आंदोलन खत्म कराने का उन पर दबाव बनाया। सरकार ने कहा कि वह अपने पिता और भाइयों को आंदोलन खत्म करने को कहें, लेकिन राकेश टिकैत ने पुलिस की नौकरी ही छोड़ दी और किसानों के साथ खड़े हो गए थे।

पिता के निधन के बाद संभाली बीकेयू की कमान
दिल्ली पुलिस की नौकरी छोड़ने के बाद राकेश पूरी तरह से किसानों के साथ खड़े हो गए। पिता महेंद्र सिंह टिकैत का15 मई 2011 को कैंसर से निधन के बाद राकेश टिकैत ने पूरी तरह भारतीय किसान यूनियन की कमान संभाल ली। पिता महेंद्र सिंह टिकैत बालियान खाप से आते थे, उनकी मृत्यु हुई के बाद उनके बड़े बेटे नरेश टिकैत को भारतीय किसान यूनियन का अध्यक्ष बनाया गया, क्योंकि खाप के नियमों के मुताबिक बड़ा बेटा ही मुखिया हो सकता है, लेकिन व्यवहारिक तौर पर बीकेयू की कमान राकेश टिकैत के हाथ में है और सभी अहम फैसले राकेश टिकैत ही लेते हैं। राकेश टिकैत की शादी वर्ष 1985 में बागपत जनपद के दादरी गांव की सुनीता देवी से हुई थी। इनके एक पुत्र चरण सिंह दो पुत्री सीमा और ज्योति हैं। राकेश के सभी बच्चों की शादी हो चुकी है। राकेश टिकैत की संगठन क्षमता को देखते हुए उन्हें भारतीय किसान यूनियन का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया गया था, जबकि उनके बड़े भाई नरेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष हैं। यह संगठन उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के साथ-साथ पूरे देश में फैला हुआ है। राकेश टिकैत की शादी वर्ष 1985 में बागपत जनपद के दादरी गांव की सुनीता देवी से हुई थी। इनके एक पुत्र चरण सिंह दो पुत्री सीमा और ज्योति हैं। राकेश के सभी बच्चों की शादी हो चुकी है।

1987 में रखी गई थी भारतीय किसान यूनियन की नींव
भारतीय किसान यूनियन की नींव 1987 में उस समय रखी गई थी, जब बिजली के दाम को लेकर किसानों ने शामली जनपद के करमुखेड़ी में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में एक बड़ा आंदोलन किया था। इसमें दो किसान जयपाल और अकबर की पुलिस की गोली लगने से मौत हो गई थी। इसके बाद भारतीय किसान यूनियन बनाया गया था, जिसके अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत बने थे। राकेश टिकैत से छोटे एवं तीसरे स्थान पर उनके भाई सुरेंद्र टिकैत मेरठ के एक शुगर मिल में मैनेजर के तौर पर कार्यरत हैं। वहीं, सबसे छोटे भाई नरेंद्र खेती का काम करते हैं।

44 बार जेल जा चुके हैं राकेश टिकैत
किसानों की लड़ाई के चलते राकेश टिकैत 44 बार जेल जा चुके हैं। मध्यप्रदेश में एक समय किसान के भूमि अधिकरण कानून के खिलाफ उनको 39 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था। इसके बाद दिल्ली में संसद भवन के बाहर किसानों के गन्ना मूल्य बढ़ाने हेतु सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, गन्ना जला दिया था, जिसकी वजह से उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। राजस्थान में भी किसानों के हित की लड़ाई लड़ते हुए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिसके बाद उन्हें जयपुर जेल में जाना पड़ा था।

दो बार लड़ा चुनाव, मिली हार
राकेश टिकैत ने पहली बार 2007 में मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2014 में अमरोहा जनपद से राष्ट्रीय लोक दल पार्टी से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन दोनों ही चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बता दें , राकेश टिकैत 1997 में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाए गए थे।












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