देश के मुसलमानों में डर पैदा कर रहा पाक मीडिया

अयोध्या को बताया 'बदनाम तार्थस्थल'
'द डॉन' में 'एनीवन बट मोदी' के टाइटल के साथ एक खबर छपी है। इस खबर में बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को लेकर जो कुछ भी लोगों के हवाले से लिखा गया है, वह एक खास समुदाय के लोगों पर असर डाल सकता है। इस खबर के मुताबिक भारतीय मुसलमान किसी को भी देश का प्रधानमंत्री बनते देख सकते हैं लेकिन अगर नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनते हैं तो फिर उन्हें बहुत कुछ बुरा देखने को मजबूर होना पड़ेगा।
'द डॉन' ने अपनी इस खबर में उत्तर प्रदेश के स्थान अयोध्या को दंगों की वजह से देश का सबसे 'बदनाम तीर्थस्थान' तक करार दिया गया है। खबर में लिखा है कि जिस समय साल 1992 में अयोध्या में दंगे हुए थे यहां पर जो बच्चे छोटे थे, वह अब बड़े हो गए हैं और उन्हें उस समय नहीं मालूम था कि जिस दंगे में 2,000 से भी ज्यादा लोग मारे गए थे उसकी वजह आखिर क्या थी। 'द डॉन' ने अयोध्या के दंगों को स्वतंत्रता के बाद हुए सबसे भयावह घटना के तौर पर बयां किया है। 'द डॉन' के मुताबिक उस घटना को भले ही दो दशक हो गए हो लेकिन आज भी यहां पर मौजूद सुरक्षा इंतजामों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि हालात कितने नाजुक हैं। यहां आने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा के पांच चक्रों से होकर गुजरना पड़ता है।
अयोध्या दंगों के लिए भी मोदी जिम्मेदार
डॉन के मुताबिक बीजेपी के घोषणा पत्र में आज भी मंदिर एजेंडा सबसे ऊपर है और यह मंदिर पुरानी बाबरी मस्जिद वाली जगह पर ही बनाया जाएगा। न्यूजपेपर के मुताबिक भले ही नरेंद्र मोदी को गुजरात में साल 2002 में हुए दंगों के लिए नजरअंदाज कर दिया जाए लेकिन मोदी अयोध्या के दंगों से भी जुड़े हैं। न्यूजपेपर के मुताबिक 63 वर्षीय इस शख्स की वजह से ही वर्ष 1990 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी की मंदिर के लिए शुरू की गई देशव्यापी रथयात्रा का आरंभ हो सका।
खबर में दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर माइनॉरिटी के मुजीबुर रहमान के हवाले से लिखा गया है कि मुसलमान समुदाय मोदी को लेकर काफी चिंतित है। मुसलमान इस बात को लेकर आश्वस्त हो चुके है कि मोदी के मन में उनके लिए कोई सम्मान नहीं है। इसके अलावा मोदी का बैकग्रांउड, अल्पसंख्यकों तक उनकी पहुंच की कमी की वजह से चिंताएं और बढ़ गई हैं।
तो हालात होंगे खराब
द डॉन के मुताबिक कट्टर हिंदुवादी सोच रखने वाले और संपूर्ण शाकाहारी नरेंद्र मोदी को जिस समय बीजेपी में एंट्री मिली उस समय धार्मिक गठजोड़ काफी बुरे दौर में थे और फिर उन पर साल 2002 के दंगों का दाग लग गया। उस समय जो हिंसा हुई उसमें 1,000 से ज्यादा लोग मारे गए और जिसमें से ज्यादातर मुसलमान थे। मोदी उसी वर्ष गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे और उनके खिलाफ लगातार जांच की गईं लेकिन वह कभी भी दोषी नहीं पाए गए। द डॉन के मुताबिक हालांकि मोदी ने खून-खराबे को रोकने के लिए न के बराबर प्रयास किए।
डॉन के मुताबिक मुसलमान ऐसे में नहीं चाहते कि मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। यहां तक कि देश का यह समुदाय उनकी शक्ल तक नहीं देखना चाहता और न ही उनका नाम सुनना चाहता है। द डॉन की मानें तो वाराणसी से उनका चुनाव लड़ना इसी बात को दर्शाता है। वह हमेशा देश की 75 प्रतिशत जनसंख्या यानी हिंदूओं की बात करते हैं लेकिन 13 प्रतिशत लोगों यानी मुसलमान समुदाय को यों ही छोड़ देते हैं।












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