मौत से पहले इरफान खान पूरे कर गए अपनी जिंदगी के दो सुनहरे सपने
मुंबई। बॉलीवुड के उम्दा कलाकारों में से एक इरफान खान के असमय निधन ने उनके फैंस को तो दुखी किया ही साथ ही साथ हर उस इंसान को चोट पहुंचाई है, जो खूबसूरत सिनेमा में यकीन रखता है। 54 साल के इरफान उन एक्टर्स में से एक हैं जिनकी कोई भी फिल्म, और कोई भी टीवी सीरियल यहां तक कि अगर कोई एड भी आ रहा हो तो उसे भी देखे बिना नहीं रहा जा सकता है। इरफान उन खुशकिस्मत लोगों में याद किए जाएंगे जिन्होंने अपनी जिंदगी में जो सपना देखा, उसे पूरा किया। उनकी जिंदगी में दो ऐसे सपने थे जिसके बारे में वह अक्सर बात किया करते थे। आइए आपको बताते हैं कि कौन से थे इरफान के वो दो सपने।

2015 में बने 'जुरासिक वर्ल्ड' का हिस्सा
सात जनवरी 1967 को राजस्थान में जन्में इरफान खान यूं तो बचपन में काफी अच्छे क्रिकेटर थे मगर एक्टिंग के आगे क्रिकेट का जुनून फींका पड़ता जा रहा था। 23 साल की उम्र में उनका सेलेक्शन सीके नायडू टूर्नामेंट के लिए भी हुआ लेकिन फिर भी क्रिकेट दिल को जीत नहीं सका और बस एक्टिंग दिमाग में हावी होती गई। सन् 1993 में रिलीज हुई फिल्म 'जुरासिक पार्क' और यहां से एक्टिंग के लिए ख्याल और भी मजबूत हो गए। इरफान खान ने एक बार ब्रिटिश मीडिया को इंटरव्यू दिया और बताया कि उनके पास इस फिल्म का टिकट खरीदने के पैसे तक नहीं थे और इस वजह से वह फिल्म देखने से चूक गए। साल 2015 में रिलीज हुई जुरासिक पार्क सीरीज की फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड' और इरफान ने इसमें एक अहम भूमिका अदा की। इरफान ने उस साल एक इंटरव्यू में कहा था, 'मेरा एक सपना है जो आज पूरा हुआ है। कभी जिस फिल्म को देखने के लिए मेरे पास टिकट के पैसे नहीं थे आज मैं उसमें एक बड़े रोल में हूं।

साल 2013 में पूरा हुआ दूसरा सपना
साल 2013 में इरफान खान को उनकी फिल्म 'पान सिंह तोमर' के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला था। इरफान खान को इस बात का मलाल था कि उनकी फिल्मे जैसे 'हासिल' और 'नेमसेक' इस उपलब्धि से चूक गईं। जब अवॉर्ड जीतने के बाद इरफान का रिएक्शन लिया गया तो उनका कहना था, 'मैं आज भी मानता हूं कि मुझे हासिल के लिए यह पुरस्कार मिलना चाहिए, मगर नहीं मिल सका। यह एक सपना था जो आज पूरा हुआ है। नेशनल अवॉर्ड आज भी विश्वसनीय हैं और लोगों के बीच उनकी प्रतिष्ठा है। इसे पाना अपने आप में एक गौरवशाली पल है।' इरफान के जाने से जो जगह खाली हुई है उसका मलाल सिर्फ बॉलीवुड को ही नहीं बल्कि हॉलीवुड को भी है।

इलाज के लिए लंदन तक गए इरफान
इरफान खान को उन्हें न्यूरो-एंडोक्राइम ट्यूमर था और इस ट्यूमर के इलाज के लिए वह लंदन भी गए थे। क्या है एंडो-क्राइन सिस्टम शरीर का एंडो-क्राइन सिस्टम कई तरह की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है जो कई तरह के हार्मोंस को प्रोड्यूस करती हैं। हार्मोन केमिकल पदार्थ होता है जो रक्त कोशिकाओं के जरिए शरीर में बहता है और कई अंगों की कोशिकाओं पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालता है।ट्यूमर उस समय शरीर में बनता है जब स्वस्थ्य कोशिकाओं में किसी तरह का परिवर्तन होता है और वह अनियंत्रित होकर एक गुच्छे में बदल जाती है। किसी भी ट्यूमर या तो इलाज संभव है या फिर वह जानलेवा साबित हो सकता है।

लाइलाज थी इरफान की बीमारी!
लाइलाज ट्यूमर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल सकता है अगर शुरुआत में ही इसका पता न चले और इसका इलाज न हो। दूसरे प्रकार का ट्यूमर ऐसा ट्यूमर है जो बढ़ता है लेकिन वह शरीर के दूसरे हिस्सों को प्रभावित नहीं करता है। इस तरह के ट्यूमर को आसानी से निकाला जा सकता है। न्यूरो-एंडोक्राइन ट्यूमर वह ट्यूमर है जो शरीर के न्यूरो-एंडोक्राइन सिस्टम के लिए हार्मोन प्रोड्यूस करने वाली कोशिकाओं पर होता है यानी ऐसी कोशिकाएं जहां से एंडोक्राइन और नर्व कोशिकाओं के लिए हार्मोन का उत्पादन होता है। न्यूरो-एंडोक्राइन कोशिकाएं पूरे शरीर जैसे फेफड़ों, पेट और आंतों जैसे हिस्सों में होती हैं।












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