थाईलैंड : नौ दिन बाद ज़िंदा मिले बच्चे, अब बाहर निकालने की चुनौती

थाईलैंड की एक गुफ़ा में नौ दिन लापता रहे 12 लड़के और उनके फ़ुटबॉल कोच को तलाश लिया गया है.

चियंग राय स्थित टैम लूंग गुफ़ा में चलाए गए तलाश अभियान की जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि सभी लोग सुरक्षित हैं.

अब चुनौती इन सभी को सुरक्षित बाहर निकालने की है. गुफ़ा में पानी का स्तर बढ़ रहा है और कीचड़ की वजह से उन तक पहुंच मुश्किल बनी हुई है.

गुफ़ा में फंसे बच्चों के पास जब ब्रितानी गोताखोर पहुंचे तो उन्होंने शुक्रिया अदा करने के बाद सबसे पहले यही पूछा कि हम बाहर कब निकलेंगे.

गोताखोरों ने उन्हें बताया कि आज नहीं. फिर उन्होंने पूछा कि आज दिन क्या है इस पर गोताखोरों ने कहा सोमवार, आप यहां दस दिनों से हो, आप बहुत मज़बूत हो, बहुत मज़बूत.

गोताखोरों के बच्चों के पास पहुंचने का वीडियो थाईलैंड नेवी सील ने जारी किया है.

https://www.facebook.com/ThaiSEAL/videos/1631228493667210/

गुफ़ा में लापता हुए 12 लड़कों और उनके कोच को लेकर पूरे देश में चिंता का माहौल था. इन सभी के सुरक्षित होने की ख़बर उनके परिजन के लिए खुश होने वजह लेकर आई है.

चियंग राय के गवर्नर नारोंग्सक ओसोटानकोर्न ने बताया कि खोजी अभियान में शामिल नौसेना के विशेष दल ने इन्हें तलाश किया.

जब उनके ज़िंदा होने की ख़बर बाहर आई तो गुफ़ा के बाहर मौजूद एक बच्चे की मां ने कहा, "आज का दिन सबसे अच्छा दिन है. मैं कबसे अपने बेटे का इंतेज़ार कर रही हूं. मुझे लग रहा था कि उसके जिंदा होने की संभावना पचास फ़ीसदी ही है. अब मैं बहुत उत्साहित हूं. जब वो बाहर आएगा तो सबसे पहले मैं उसे गले लगाउंगी. मैं सबका शुक्रिया अदा करना चाहती हूं."

बचावकर्मियों के अनुसार गुफ़ा में फंसे बच्चों और उनके कोच ने ज़मीन के भीतर कोई ऐसी जगह तलाश ली थी जिससे वे बाढ़ के पानी की चपेट में आने से बच गए.

बीबीसी के बैंकॉक में मौजूद संवाददाता जोनाथन हेड ने इस संबंध में ट्वीट कर जानकारी दी है.

https://twitter.com/pakhead/status/1013809383937957888

इस घटना की चर्चा पूरे थाईलैंड में हो रही थी और पूरे देश में इन बच्चों और उनके कोच को बचाने के लिए दुआएं की जा रहीं थीं.

लगातार बढ़ते पानी और कीचड़ के चलते इस खोजी अभियान में बहुत सी मुश्किले आ रही थीं.

वहां हालात कितने मुश्किल है ये बताया बचाव टीम में शामिल बेल्जियम के गोताखोर बेन रेमेनेंट्स ने. बच्चों के मिलने से पहले उन्होंने बीबीसी से कहा, "वो बहुत भीतर हैं और वहां सिर्फ़ तैरकर ही जाया जा सकता है. ये गुफ़ाएं भूलभुलैया जैसी हैं, तापमान 21 डिग्री है और बहुत चिपचिपाहट है. ये छोटी छोटी सुरंगों की भूलभुलैया है जो कई किलोमीटर तक है. पहले दिन मुझे बहुत निराशा हुई क्योंकि अंधेरे की वजह से हम कुछ देख ही नहीं पा रहे थे."

बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना बनाई जा रही है. पत्रकारों से बात करते हुए चियांग राय के गवर्नर ने बचाव अभियान के अगले चरण के बारे में बताते हुए कहा, "अब हम उनके पास खाना भेजेंगे. लेकिन अभी हम नहीं जानते कि वो खा पाएंगे या नहीं क्योंकि उन्होंने दस दिनों से कुछ नहीं खाया है. हम देखेंगे कि वो खाने को पचा पाएंगे या नहीं. अभी हमें बहुत कुछ करना है. उन्हें बाहर सुरक्षित निकालना है और सामान्य करना है ताकि वो स्कूल जा सकें."

गुफ़ा
EPA
गुफ़ा

कौन थे ये बच्चे?

  • सभी 12 बच्चे मू पा, जिसे वाइल्ड बोर भी कहते हैं, फुटबॉल टीम के सदस्य हैं.
  • 25 साल के उनके सहायक कोच इक्कापोल जनथावोंग कभी-कभी इन बच्चों को घुमाने ले जाते थे. दो साल पहले भी इसी गुफा में वो बच्चों को घुमाने लाए थे.
  • टीम में सबसे छोटा खिलाड़ी 11 साल का चैन 'टाइटन' है, उन्होंने सात साल की उम्र से फ़ुटबॉल खेलना शुरू कर दिया था.
  • टीम के कप्तान 13 साल के डुआंगपेट 'डोम' हैं, वे अपनी टीम के मोटिवेटर यानी उत्साह बढ़ाने वाले सदस्य भी हैं.
  • क्लब के मुख्य कोच नोप्पारात कंतावोंग टीम के साथ घूमने नहीं गए थे. उन्होंने कहा है कि ये सभी बच्चे एक दिन प्रोफ़ेशनल फ़ुटबॉलर बनने का ख्वाब रखते हैं, उन्हें विश्वास है कि सभी लड़के एक-दूसरे के साथ रहेंगे और एक-दूसरे को कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे.
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