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मुसलमानों को CAA-NRC पर आतंकी संगठन गुमराह कर रहे हैं, एक मुस्लिम नेता का बड़ा दावा

नई दिल्ली- उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और मुस्लिम नेता मोहसिन रजा ने नागरिकता संशोधन कानून और नेशनल सिटीजन्स रजिस्टर के विरोध के पीछे आतंकी संगठनों की साजिश का दावा किया है। उन्होंने कहा है कि कुछ आतंकी संगठन साजिश के तहत कुछ मुसलमानों को गुमराह करने में लगे हुए हैं। उन्होंने दावा किया है कि सरकार के हाथ कुछ ऐसे सबूत भी लगे हैं जो इसी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। गौरतलब है कि हिंसा से शुरू हुआ ये विरोध अब धरना-प्रदर्शनों में तब्दील हो चुका है। शुरुआती हिंसा में यूपी में कई लोग मारे भी गए थे और वहां इस हिंसा के लिए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे संदिग्ध संगठनों के बड़े नेताओं को हिंसा भड़काने के सिलसिले में गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

'आतंकी संगठन कर रहे मुसलमानों को गुमराह'

'आतंकी संगठन कर रहे मुसलमानों को गुमराह'

नागरिकता संशोधन कानून और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स को लेकर कुछ आतंकी संगठन साजिश के तहत मुसलमानों को गुमराह करने में लगे हुए हैं। ये दावा शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुस्लिम नेता और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री मोहसिन रजा ने किया है। रजा ने कहा है,"जो चीजें हो रही हैं वह सीएए का विरोध करने के लिए नहीं हो रही हैं। इसके पीछे साजिश कुछ और है। सिमी और पीएफआई जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं और इसी साजिश के तहत मुस्लिम महिलाओं को सड़कों पर बैठाया जा रहा है। " उन्होंने दावा किया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के खतों और उसकी ओर से बांटे के विज्ञप्तियों से सबूत जुटाए गए हैं।

सीएए विरोधी हिंसा में पहले ही आ चुका है नाम

सीएए विरोधी हिंसा में पहले ही आ चुका है नाम

बुधवार को रजा ने कहा था कि पीएफआई ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को प्रदेश में अराजक शक्ल देने की कोशिश की है। यही नहीं उन्होंने कहा था कि यह प्रतिबंधित संगठन मुस्लिम युवाओं कट्टरपंथी बनाकर उन्हें आतंकवाद की ओर धकेलना चाहता है। गौरतलब है कि पीएफआई का गठन 22 नवंबर, 2006 को हुआ था। बता दें कि इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि सीएए विरोधी हिंसा में पीएफआई की भूमिका सामने आ रही है और गृहमंत्रालय सबूतों के आधार पर इसके खिलाफ कार्रवाई करने के बारे में फैसला करेगा। उन्होंने कहा था, "हिंसा में पीएफआई की भूमिका सामने रही है। आगे की कार्रवाई के बारे में गृहमंत्रालय सबूतों के आधार पर फैसला करेगा। उनके खिलाफ कई तरह के आरोप हैं, जिसमें स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के साथ संबंध भी है।" गौरतलब है कि सिमी पर काफी पहले ही पाबंदी लगाई जा चुकी है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद समेत तीन सदस्यों को हिंसा के संबंध में गिरफ्तार भी कर रखा है।

सीएए के खिलाफ प्रदर्शन जारी

सीएए के खिलाफ प्रदर्शन जारी

बता दें कि सीएए-एनआरसी को लेकर देश के कई हिस्सों में अभी भी विरोध प्रदर्शन जारी है। सीएए के खिलाफ विरोध की शुरुआत पहले जबर्दस्त हिंसा से हुई थी, जिसकी चपेट में उत्तर प्रदेश भी बहुत ज्यादा आया था। हिंसा में कई लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों जख्मी हो गए थे। उसके बाद से आंदोलन तो शांतिपूर्ण चल रहा है, लेकिन वह खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली के जामियानगर इलाके के शाहीन बाग में तो पिछले करीब डेढ़ महीने से लोग सड़कों पर धरने पर बैठे हैं, जिसमें बाद में अधिकतर महिलाएं शामिल हो गई हैं। लखनऊ में भी यह सिलसिला जारी है। नागरिकता संशोधन कानून पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे तीन पड़ोसी मुस्लिम मुल्कों से धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत आने वाले हिंदू, सिख, क्रिश्चियन, जैन, बौद्ध और पारसी शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए बनाया गया है। खासकर मुसलमान इसका विरोध इसलिए कर रहे हैं कि इसमें मुस्लिमों को क्यों नहीं शामिल किया गया है।

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