बिरयानी में लेग पीस की जगह एके-47 परोसने वाला भटकल!
बेंगलुरु। अगर आप नॉनवेज खाने के शौकीन हैं तो फिर आपको बिरयानी की खुशबू दूर से ही ललचा जाती होगी। कर्नाटक का शहर भटकल आपके लिए एक मुफीद जगह साबित हो सकता था। अफसोस की बात है कि आज अगर आप यहां पर आएंगे तो आपको इस बात का अहसास हो जाएगा कि भटकल में मिलने वाली बिरयानी में अब लेग पीस की जगह एके-47 की भरमार हो गई है। यहां पर एके-47 से हमारा मतलब उस आतंकवाद से है जो धीरे-धीरे कर्नाटक के इस तटीय जिले को अपने आगोश में लेता जा रहा है।

बेंगलुरु ब्लास्ट, भटकल और अफगानिस्तान
- गुरुवार को एनआईए ने 29 दिसंबर को कर्नाटक के भटकल जिले से तीन लोगों को गिरफ्तार किया।
- भटकल, कर्नाटक का वह शहर है जो इंडियन मुजाहिद्दीन जैसे आतंकी संगठन अस्तित्व में आने का गवाह रहा है।
- एनआईए और इंटेलीजेंस ब्यूरो की ओर से एक ज्वाइंट ऑपरेशन में एक व्यक्ति को बेंगलुरु और दो लोगों को भटकल से गिरफ्तार किया है।
- 34 वर्षीय सैयद इस्माइल अफाक, 35 वर्षीय सद्दाम हुसैन और 24 वर्ष के एक एमबीए स्टूडेंट अब्दुस सुबार तीनों ही भटकल के रहने वाले हैं।
- पुलिस का दावा है कि इन तीनों के पास से उसे भारी मात्रा में एक्सप्लोसिव डिवाइस मिली हैं।
- बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर की मानें तो ये तीनों ही देश से बाहर एक हैंडलर के संपर्क में थे।
- सूत्रों का दावा है कि यह शख्स कोई और नहीं बल्कि सुल्तान अरमार था।
- खास बात है कि सुल्तान भी भटकल जिले का ही रहने वाला है।
- अरमार आईएसआईएस, इंडियन मुजाहिद्दीन और तहरीक-ए-तालिबान की एक विंग अंसार-उल-तवाहिद के लिए लोगों की भर्ती करता है।
आतंक के लिए बदनाम भटकल
- करीब 20 वर्ष पहले भटकल एकदम अलग ही शहर के तौर पर जाना जाता था।
- अगर किसी को बिरयानी का स्वाद चखना होता या फिर इंपोर्टेड वॉकमैन खरीदना होता तो वह भटकल आता था।
- स्मगलिंग हब भटकल यहां पर मौजूद चरमपंथी ताकतों की वजह से आतंकी अड्डे में तब्दील हो गया।
- यहां के नागरिको की मानें तो ऐसा सिर्फ इसलिए है क्योंकि यहां के चार से पांच लोग आतंकी संगठनों में शामिल हो गए हैं।
- ऐसे में भटकल को एक आतंकी अड्डा बुलाना ठीक नहीं है।
- यहां के एक नागरिकों की मानें तो नाम के साथ जुड़े भटकल सरनेम ने उनका जीना दूभर कर दिया है।
- आईएम के रियाज का सरनेम शाहबंद्री है तो यासिन का सिद्दीबाप्पा।
- इन लोगों ने अपने नाम के साथ भटकल जोड़ा और यहां के लोगों की जिंदगियों पर बुरा असर पड़ना शुरू हो गया।
- यहां पर अब आपको अक्सर ही इंटेलीजेंस ब्यूरो के ऑफिसर्स का जमावड़ा नजर आएगा।
- वह हर पल यहां पर जानकारी जुटाने की कोशिशों में लगे रहते हैं। नागरिकों ने भी इस बात की पुष्टि की है।
- भटकल में केथपायाप्पा नारायण मंदिर, जामा मस्जिद और यहां की बिरयानी सबसे खास है।
- इसके बावजूद लोगों को रियाज और यासीन भटकल के ही नाम याद आते हैं।
- यह बात यहां के लोगों को काफी हैरान करती है।
रियाज भटकल से हुई शुरुआत
- इंडियन मुजाहिद्दीन के रियाज भटकल का नाम सबसे पहले डॉक्टर चितरंजन के मर्डर केस में सामने आया था।
- कहा जाता है कि भटकल में हुए दंगों में यह हत्या हुई थी।
- इन दंगों का फायदा उठाकर पाकिस्तान की इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई के एजेंट्स को यहां पर दाखिल होने का फायदा मिल गया।
- रियाज और उसके भाई ने इसका फायदा उठाकर आतंक की दुनिया में अपने पैर जमाने शुरू कर दिए।
- उनका मकसद पैसा कमाना था और इसके लिए आईएसआई की ओर से उन्हें अच्छी-खासी रकम भी अदा की जाने लगी।
- यहीं से इंडियन मुजाहिद्दीन का नाम देश में आया और इसने अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी।
- रियाज और उसके भाई इकबाल इंडियन मुजाहिद्दीन इस संगठन के अहम सदस्य बन गए।
- इन दोनों ने ही यासिन भटकल को अपने संगठन में शामिल किया।
- आगे चलकर यासिन इंडियन मुजाहिद्दीन का प्रमुख बन गया और देश में कई ब्लास्ट्स को अंजाम दिया।
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