दिल्ली की सड़कों का होने वाला है डिजिटल इलाज! ट्रैफिक-जलभराव पर एक साथ वार करेगी रेखा सरकार की नई योजना

दिल्ली में ट्रैफिक जाम, टूटी सड़कें, धूल से होने वाला प्रदूषण और बरसात के दौरान जलभराव लंबे समय से लोगों की परेशानी का कारण रहे हैं। अब दिल्ली सरकार इन समस्याओं से निपटने के लिए एक ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है, जो सिर्फ गड्ढे भरने या सड़क मरम्मत तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पूरी सड़क व्यवस्था को डिजिटल और वैज्ञानिक तरीके से मॉनिटर करेगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार (09 जून) को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि राजधानी में पहली बार रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (RAMS) विकसित किया जा रहा है।

Delhi Road Management System Rekha Gupta Plan to control traffic pollution water logging

दिल्ली की सड़कों के लिए नया ब्लूप्रिंट

सरकार ने इस परियोजना के लिए केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) के साथ समझौता किया है। इस साझेदारी का मकसद दिल्ली की सड़कों के रखरखाव को पारंपरिक व्यवस्था से निकालकर डेटा आधारित और वैज्ञानिक मॉडल पर लाना है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या ने सड़क प्रबंधन को पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे में अब सड़कों की स्थिति का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में तैयार किया जाएगा और उसी आधार पर मरम्मत तथा रखरखाव की प्राथमिकताएं तय होंगी।

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कैसे काम करेगा नया सिस्टम?

रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम के तहत राजधानी की सड़कों का विस्तृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इसमें सड़क की स्थिति, उसकी उम्र, क्षतिग्रस्त हिस्सों और मरम्मत की जरूरत से जुड़ी जानकारी दर्ज होगी।

इसके बाद नियमित अंतराल पर सड़कों का मूल्यांकन किया जाएगा। इससे यह तय करना आसान होगा कि किस सड़क को पहले मरम्मत की जरूरत है और कहां संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। सरकार का दावा है कि इससे सड़कों की गुणवत्ता में सुधार होगा और अनावश्यक खर्च भी कम होगा।

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धूल-मुक्त दिल्ली का सपना

इस योजना का एक बड़ा लक्ष्य दिल्ली को धूल प्रदूषण से राहत दिलाना भी है। राजधानी की सड़कों के किनारे वैज्ञानिक तरीके से ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी। स्थानीय जलवायु के अनुकूल पौधों और पेड़ों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहे।

इसके साथ ही टिकाऊ लैंडस्केपिंग, हरित अवसंरचना और पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि सड़कों के किनारे हरियाली बढ़ने से धूल नियंत्रण में मदद मिलेगी और शहर का वातावरण भी बेहतर होगा।

जलभराव से भी मिलेगी राहत?

दिल्ली में हर मानसून के दौरान कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आती है। नई योजना में सड़कों की ढलान और स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम को फिर से डिजाइन करने पर भी जोर दिया गया है।

सरकार का दावा है कि बेहतर जल निकासी व्यवस्था के जरिए बारिश के दौरान सड़कों पर पानी जमा होने की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। इसके अलावा वर्षा जल संचयन को भी इस परियोजना का हिस्सा बनाया गया है।

विशेषज्ञ संस्थानों की क्या होगी भूमिका?

इस समझौते के तहत सीएसआईआर-सीआरआरआई सड़क इंजीनियरिंग, पेवमेंट टेक्नोलॉजी, सड़क सुरक्षा और एसेट मैनेजमेंट से जुड़ी तकनीकी सहायता देगा। वहीं एसपीए शहरी डिजाइन, सड़क सौंदर्यीकरण, सार्वजनिक स्थानों के विकास, हरित अवसंरचना और अर्बन लैंडस्केपिंग पर विशेषज्ञ सलाह प्रदान करेगा।

लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने इसे राजधानी के सड़क ढांचे को आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। वहीं पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि धूल प्रदूषण कम करने के लिए बड़े पैमाने पर स्थानीय और पर्यावरण के अनुकूल पौधों का रोपण किया जाएगा।

क्या बदलेगी दिल्ली की तस्वीर?

यह योजना सिर्फ सड़क मरम्मत कार्यक्रम नहीं है, बल्कि दिल्ली के शहरी प्रबंधन मॉडल को बदलने की कोशिश है। अगर यह परियोजना सफल रहती है तो सड़कों की गुणवत्ता, ट्रैफिक प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और जलभराव जैसी समस्याओं से निपटने में एक साथ मदद मिल सकती है।

राजधानी की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अब सड़क प्रबंधन को डेटा और तकनीक आधारित बनाना समय की जरूरत है। ऐसे में रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम दिल्ली के लिए एक बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकता है।

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