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'KCR भाजपा नेता को करवाना चाहते थे गिरफ्तार, BJP को करना चाहते थे मजबूर', फोन टैपिंग विवाद में बड़ा खुलासा

Phone Tapping Row: तेलंगाना फोन टैपिंग विवाद की जांच में एक विस्फोटक खुलासा हुआ है। फोन टैपिंग विवाद में ये आरोप सामने आए हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव अपनी बेटी के.कविता के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) मामले से छुटकारा पाने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएल संतोष को गिरफ्तार करवाना चाहते थे।

केसीआर पर ये भी आरोप है कि उन्होंने समझौता करने के लिए भाजपा को मजबूर किया था। केसीआर पर ये आरोप पूर्व पुलिस उपायुक्त पी राधाकृष्ण राव ने छह पन्नों के बयान में लगाए हैं। इसमें कई खतरनाक दावे किए गए हैं। इसमें एक दावा ये भी है कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री /या उनके परिवार के सदस्यों के लिए "परेशानियां पैदा करने वाले कुछ लोगों को परेशान किया था।''

Phone Tapping Row

पूर्व पुलिस उपायुक्त पी राधाकृष्ण राव को मार्च में उनके बंजारा हिल्स हैदराबाद स्थित घर से गिरफ्तार किया गया था। पी राधाकृष्ण हैदराबाद सिटी टास्क फोर्स के सदस्य भी थे।

उन्होंने ये भी दावा किया है कि वह मुख्यमंत्री या उनके अंदरूनी मंडल के आदेश पर, "बीआरएस (तब तेलंगाना राष्ट्र समिति) के खिलाफ असहमति या विरोध या आंदोलन को दबाने की कोशिश की थी।

राधाकृष्ण राव ने फोन टैपिंग में अपनी संलिप्तता की बात कबूली

रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना फोन टैपिंग में विवाद में सामने आया है कि राधाकृष्ण राव ने बीआरएस सरकार के सत्ता में रहने के दौरान एसआईबी के कुछ अधिकारियों द्वारा फोन टैपिंग में अपनी संलिप्तता की बात को मान ली है।

सूत्रों के मुताबिक राधाकृष्ण राव ने तत्कालीन एसआईबी प्रमुख टी प्रभाकर राव के निर्देशों पर राजनेताओं और अन्य लोगों पर निगरानी रखने में अपनी संलिप्तता की बात भी कबूली है। कथित तौर पर ये फोन टैपिंग तेलंगाना राज्य में केसीआर के नेतृत्व वाली बीआरएस सरकार के कार्यकाल के दौरान की गई थी।

जानें इस मामले में अब तक क्या-क्या खुलासे हुए हैं?

  • पी राधाकृष्ण राव ने पुलिस को बताया है कि जो लोग केसीआर के सरकार की आलोचना करते हैं या जिन्हें पार्टी के लिए खतरा समझा जाता था, उनकी गहन इलेक्ट्रॉनिक निगरानी की जाती थी।
  • ये भी दावा किया जा रहा है कि बीआरएस के एक विधायक अपने प्रतिद्वंद्वियों को फंसाने और आरोपों को जबरन हटाने की योजना बना रहे थे।
  • पी राधाकृष्ण राव ने अपने पत्र में लिखा है कि, "...अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में (2023 के विधानसभा चुनाव से पहले), एक दिन प्रभाकर एसआईबी प्रमुख टी प्रभाकर राव ने मुझे बताया कि मुख्यमंत्री को एक विधायक से जानकारी मिली है कि भाजपा में प्रभावशाली होने का दावा करने वाले कुछ लोग उन्हें बीआरएस छोड़ने के लिए कह रहे हैं और (प्रतिद्वंद्वी पार्टी) में शामिल होने को बोल रहे हैं।''
  • टी प्रभाकर राव उस समय विशेष खुफिया शाखा के प्रमुख थे और कथित तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री ने उन्हें कथित तौर पर अवैध फोन टैपिंग ऑपरेशन चलाने का काम सौंपा था। प्रभाकर राव को इस मामले में अभियुक्त नंबर 1' बनाया गया है।
  • रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि "केसीआर ने भाजपा को घेरने के लिए इसका इस्तेमाल करने के बारे में सोचते हुए विशेष खुफिया शाखा से इन निजी व्यक्तियों (कथित तौर पर भाजपा पार्टी से) और विधायक पर निगरानी रखने को कहा था...।''

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