KTR की दो टूक- बीआरएस को कांग्रेस का नेतृत्व स्वीकार नहीं, अब 'विपक्षी एकजुटता' का क्या होगा?

Patna Opposition Meeting के कारण पूरे दिन सुर्खियों में रहा। बिहार की राजधानी में जुटीं सियासी हस्तियों पर भाजपा ने तीखे कटाक्ष किए। कांग्रेस इस बैठक में शामिल रही, लेकिन एक और विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी की टिप्पणी पर खूब चर्चा हुई।

ताजा घटनाक्रम में तेलंगाना सरकार में मंत्री और दक्षिण में क्षेत्रीय स्तर पर प्रमुख विपक्षी पार्टी- भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेता केटी रामाराव ने कांग्रेस का नेतृत्व स्वीकार न होने की बात कही है।

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केटीआर ने कहा है कि उन्हें कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा का नेतृत्व भी स्वीकार नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि देश में वैकल्पिक विचारधारा की जरूरत है। दोनों पार्टियों की लीडरशिप बीआरएस को बिल्कुल स्वीकार नहीं है।

उन्होंने कहा, हम इस बात से सहमत नहीं हैं कि नेशनल पॉलिटिक्स में या तो भाजपा या कांग्रेस को ही नेतृत्व करना चाहिए। इनके बदले वैकल्पिक विचारधारा होनी चाहिए।

विपक्षी दलों की बैठक पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि पटना में विपक्षी दलों का जमावड़ा अवसरवादी और विरोधाभासों से भरा है। उन्होंने कहा, इंदिरा गांधी के कार्यकाल में लालू को जेल भेजा गया था।

तेलंगाना लोक सभा चुनाव 2024 के मद्देनजर अहम राज्य है, क्योंकि इस प्रदेश से दोहरे अंकों में सांसदों का निर्वाचन होता है। ऐसे में बीआरएस के तेवरों को देखते हुए 'विपक्षी एकजुटता' के दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगने लगे हैं।

भले ही कांग्रेस देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी के नाते हर प्रदेश में चुनाव लड़ने के दावे करती है, लेकिन क्षेत्रीय दलों के साथ सामंजस्य और जीतने का माद्दा देखते हुए खुद कांग्रेस को भी सीटें छोड़ने को तैयार होना बेहद जरूरी शर्त लगती है।

गौरतलब है कि विपक्षी एकजुटता की कवायद के शुरुआती दिनों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव की मुलाकात सुर्खियों में रही थी। हालांकि, इसके बाद दोनों एक मंच पर नहीं दिखे हैं।

नीतीश ने केसीआर के अलावा, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री- शरद पवार, उद्धव ठाकरे, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा नेता अखिलेश यादव समेत तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन सरीखे नेताओं के संपर्क में हैं।

पटना में विपक्षी नेताओं की बैठक में इनके अलावा जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला जैसे गैर भाजपाई विपक्षी नेताओं को देखा गया। बैठक के बाद तमाम नेताओं ने भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की बातें कहीं।

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