तेलंगाना में मुफ्त बस यात्रा से हैदराबाद मेट्रो को झटका, जानिए कांग्रेस सरकार की योजना पर क्या कह रही है कंपनी
तेलंगाना में कांग्रेस सरकार की ओर से महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा शुरू किए 6 महीने ही हुए हैं, लेकिन इसका एक बहुत ही बड़ा नकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। कांग्रेस सरकार की इस योजना की वजह से हैदराबाद मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में बड़ी गिरावट आ गई है।
हैदराबाद मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में गिरावट को देखते इसकी प्रमोटर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) इस प्रोजेक्ट से बाहर निकलने की भी सोचने लगी है। क्योंकि, मेट्रो यात्रियों की संख्या में का सीधा असर इसकी वित्तीय स्थिति पर पड़ता है, जो इसकी सेहत के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

हैदराबाद मेट्रो में यात्रियों की संख्या में बड़ी गिरावट
तेलंगाना में कांग्रेस की नई सरकार पिछले साल दिसंबर में बनी थी और सत्ता में आने के साथ ही मुख्यमंत्री रेवंती रेड्डी ने 9 दिसंबर, 2023 को महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा योजना लॉन्च कर दी थी। कांग्रेस की सरकार बनने से एक महीने पहले यानी नवंबर, 2023 में हैदराबाद मेट्रो की डेली राइडरशिप 5.5 लाख थी, जो कि घटकर आज सिर्फ 4.6 रह गई है।
हैदराबाद मेट्रो की वित्तीय सेहत के लिए 5 लाख से अधिक की राइडरशिप जरूरी
हैदराबाद मेट्रो की वित्तीय सेहत के लिए यह जरूरी है कि इससे रोजाना कम सम कम 5 लाख से ज्यादा लोग सफर करें और इसका कर्ज 12,000 करोड़ रुपए से कम होकर 8,000 करोड़ रुपए रह जाए। कंपनी को यह प्रोजेक्ट 2010 में मिला थी। लेकिन, इसमें कई वजहों से देरी होती गई, जिसके चलते इसकी अनुमानित लागत 14,000 करोड़ रुपए से बढ़कर 20,000 करोड़ रुपए हो गई और 2020 में आकर 69 किलोमीटर का काम पूरा हो पाया।
मुफ्त बस सेवा के सरकार के फैसले पर क्या कह रही है कंपनी?
एल एंड टी ने वैसे तो कांग्रेस सरकार की महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा वाली पहल की सराहना की है। लेकिन, यह भी कहा है कि इससे मेट्रो यात्रा 'कम रोचक' हो गई है। कंपनी के मुताबिक वह 2026 के बाद इस प्रोजेक्ट से बाहर होने की सोचेगी। हैदराबाद मेट्रो में इस बड़ी इंजीनियरिंग कंपनी की 90% हिस्सेदारी है और बाकी 10% हिस्सेदारी तेलंगाना सरकार की है।
बिजनेस टुडे टीवी से एल एंड टी के सीएफओ शंकर रमन ने कहा, 'परिवहन व्यवस्था में लैंगिक आधार पर बंटवारा हो रहा है। बसों का इस्तेमाल वे महिलाएं कर रही हैं, जो कुछ भी भुगतान नहीं करती हैं और मेट्रो का उपयोग पुरुष करते हैं, जो प्रति टिकट औसतन 35 रुपये खर्च करते हैं।'
उनके मुताबिक सरकार का कदम राज्य की वित्तीय सेहत के लिए सही नहीं है। उनके मुताबिक,'हमारा आकलन है कि जब हम वित्त वर्ष 26 से वित्त वर्ष 31 की योजना के लिए बैठेंगे, तो उस दौरान ये मॉनिटाइज्ड की जाने वाली संपत्ति हो सकती है।'
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