Telangana Elections: बीआरएस और कांग्रेस के बीच मुकाबले में इसाई वोट कैसे अहम? जानिए
तेलंगाना में 1.3 प्रतिशत इसाई समुदाय है। लेकिन इस समुदाय का चुनाव में सक्रिय रूप से दखल रहता है। ऐसे राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान इसाई वोटों को लेकर बड़ा दावा किया जा रहा है। क्रिस्चियन समुदाय के वोटों के महत्व को देखते हुए बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने हैदराबाद के प्रसिद्ध कलवारी मंदिर का दौरा किया था।
मतदान में अब एक सप्ताह से भी कम समय बचा है। ऐसे में बीआरएस- कांग्रेस के चुनावी अभियान चरम पर हैं। कई प्रमुख सीटों पर दोनों दलों की सीधी टक्कर होना तय है। ऐसे में दोनों पार्टियां अपने एक- एक वोटों को संभालने में जुटी हैं। ताकि अंतिम समय में किसी भी तरह के अप्रत्याशित परिवर्तन से बचा जा सके।

राज्य में तीसरी बार सरकार बनाने की दावे के साथ चुनावी मैदान में उतरा सत्तारूढ़ दल बीआरएस के नेता अब ईसाई वोटों को साधने में जुटे हैं। पिछले सप्ताह बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने हैदराबाद के प्रसिद्ध कलवारी मंदिर पहुचे थे। ये पहली बार था जब उन्होंने इस मंदिर में प्रार्थना की। केटीआर ने इस मौके पर मंदिर के संस्थापक और पादरी डॉ. पी. सतीश कुमार से भी मुलाकात की।
चुनावी माहौल के बीच बीआरएस दिग्गज नेता के कलवारी मंदिर पहुंचना एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। दरअसल, तेलंगाना में 1.3% इसाई समुदाय छोटा जरूर है लेकिन राजनीति में इस समुदाय की सक्रियता अहम है। दरअसल, हैदराबाद-सिकंदराबाद और रंगा रेड्डी जिलों में कुछ आदिवासी बेल्टों के अलावा मेडक, नलगोंडा और वारंगल में इसाई समुदाय के लोग हैं। जिन्हें बीआरएस साधने की कोशिश में हैं।
वहीं कांग्रेस भी बिशपों, पुजारियों, प्रचारकों, पादरियों, ईसाई विचारकों और सामाजिक नेताओं के साथ कई बैठकें कर रही है। कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज सहित कांग्रेस के नेता समुदाय से अपनी पार्टी के पक्ष में प्रतिज्ञा लेने की दिशा में काम कर रहे हैं।
बीआरएस के एक नेता के मुताबिक इसाई समुदाय मुस्लिम वोटों की तरह एकजुट नहीं है। लेकिन दो जिलों में इस वर्ग के वोटर अधिक संख्या में हैं। करीब 25,000 से 30,000 इसाई मतदाता एक ही सीट पर हैं, जो चुनाव में अहम रोल निभाते हैं।












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