तेलंगाना चुनाव से पहले BRS को बड़ा झटका, युग तुलसी पार्टी ने क्यों लिया यू-टर्न?
तेलंगाना विधानसभा चुनाव में इस बार सत्ताधारी बीआरएस को पहले ही कांग्रेस से बहुत कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में युग तुलसी पार्टी (YTP) ने राज्य की सभी 119 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान करके उसकी स्थिति और मुश्किल बना दी है।
दरअसल, चुनाव आयोग ने के शिवकुमार की युग तुलसी पार्टी को रोड रोलर चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। इसके खिलाफ सीएम के चंद्रशेखर राव की पार्टी भारत राष्ट्र समिति ने पहले चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया था। फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई थी। लेकिन, इसका रोड रोलर चुनाव चिन्ह बरकरार रहा।

गौरक्षा के उपाय और गौशाला के लिए जमीन की मांग की थी
इसके बाद पिछले हफ्ते युग तुलसी पार्टी के अध्यक्ष के शिवकुमार अचानक सीएम केसीआर से मिलने पहुंच गए थे। इस मुलाकात में उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य में गौरक्षा के उपाय करने और गौशाला निर्माण के लिए 1,000 एकड़ जमीन आवंटित करने की मांग की थी।
पहले सिर्फ 7 सीटों पर चुनाव लड़ने का दिया था संकेत
इस मुलाकात के बाद उन्होंने संकेत दिया था कि अगर सीएम की ओर से उनकी मांगों पर सकारात्मक जवाब आता है तो उनकी पार्टी सिर्फ सात ही सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जो कि चुनाव आयोग के नियम के मुताबिक कम से कम 5% सीट की अनिवार्यता के बराबर है। तब लगा था कि बीआरएस का टेंशन खत्म होने जा रहा है।
अब वाईटीपी ने सभी 119 सीटों पर चुनाव लड़ने का किया ऐलान
सोमवार को शिवकुमार ने टीओआई से कहा, 'क्योंकि गौशाला के लिए जमीन और गौरक्षा को लेकर सीएम का कोई जवाब नहीं आया है, हमने सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।' दरअसल, चुनाव आयोग ने इनकी पार्टी को रोड रोलर चुनाव निशान आवंटित किया है। लेकिन, बीआरएस का दावा है कि यह ईवीएम पर उसके आधिकारिक चुनाव निशान 'कार' की तरह ही नजर आता है, जिससे उसके वोटर कंफ्यूज हो जाएंगे और उसे बड़ा नुकसान हो सकता है।
बीआरएस पहले कर चुकी है नुकसान होने का दावा
बीआरएस पहले दावा कर चुकी है कि मिलते-जुलते चुनाव निशान की वजह से उसे कम से कम 4 सीटों का नुकसान हो चुका है या उसके उम्मीदवारों की जीत का मार्जिन घटा है। इस बार जिस तरह से तेलंगाना में उसे कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है, वाईटीपी के फैसले से उसकी चिंताएं बढ़नी स्वाभाविक हैं।
मिलते-जुलते चुनाव निशान वाले सीटों का परिणाम क्या रहा?
युग तुलसी पार्टी ने मुनुगोडे विधानसभा उपचुनाव में भी अपने उम्मीदवार उतारे थे। बीआरएस ने तब भी उसे रोड-रोलर दिए जाने का विरोध किया था। इस चुनाव में उसे 1,880 वोट हासिल हुए थे। इसी तरह से दुब्बाका उपचुनाव को लेकर बीआरएस को लगता है कि चुनाव निशान को लेकर कंफ्यूजन ने ही उसकी लुटिया डुबो दी थी। उसमें चकला-बेलन चुनाव निशान वाले निर्दलीय उम्मीदवार को 3,700 मत प्राप्त हुए थे और भाजपा प्रत्याशी सिर्फ 1,400 वोटों से चुनाव जीत गया था।
बहरहाल पहले की घोषणा के मुताबिक वाईटीपी ने आदिलाबाद, हुजूराबाद,दुब्बाक, महेश्वरम, मालकपेट, चंद्रयानगुट्टा और थुंगातुर्ती समेत मुनुगोडे से उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। मुनुगोडे से खुद शिवकुमार चुनाव लड़ेंगे।












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