कर्नाटक में हार के बाद भी बीजेपी ने तेलंगाना में क्यों किया मुस्लिम आरक्षण खत्म करने का वादा?
तेलंगाना विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष जी किशन रेड्डी ने ऐलान किया है कि अगर उनकी पार्टी राज्य में चुनाव जीतती है तो मुसलमानों को मिलने वाला आरक्षण खत्म कर दिया जाएगा। तेलंगाना में मुसलमानों के कुछ वर्ग को 4% आरक्षण का कोटा मिलता है।
तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रेड्डी के वादे के मुताबिक पार्टी को जीत मिलने पर मुसलमानों को मिलने वाले आरक्षण (नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए) कोटा से पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के मौजूदा कोटा को बढ़ाया जाएगा।

कर्नाटक में बीजेपी की तत्कालीन सरकार ने लिया था ये फैसला
बीजेपी सरकार ने कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले इसी साल वहां मुसलमानों को मिलने वाले 4% आरक्षण कोटा को खत्म कर दिया था और उसे वहां की दो प्रभावशाली समुदायों लिंगायत और वोक्कालिगा में समान रूप से वितरित कर दिया था।
बीजेपी ने तेलंगाना में किया है मुस्लिम आरक्षण रद्द करने का वादा
इसी साल अप्रैल में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तेलंगाना के चेवेल्ला की एक जनसभा में भी वादा किया था कि उनकी पार्टी अल्पसंख्यकों का आरक्षण कोटा उसी तरह से खत्म करके अन्य कमजोर वर्गों को देगी, जैसा कि कर्नाटक की बसवराज बोम्मई सरकार (तत्कालीन) ने किया था। अब जी किशन रेड्डी ने कहा है, 'बीआरएस 2014 में तेलंगाना के गठन के बाद भी नीति (मुस्लिम आरक्षण) जारी रखे हुए है। लेकिन, एक बार बीजेपी सरकार बनती है, हम इसे पलट देंगे और अन्य कमजोर वर्गों को बेहतर आरक्षण की व्यवस्था करेंगे।'
यूपी वाली बुलडोजर नीति लागू करने का भी वादा
अब सवाल है कि बीजेपी कर्नाटक में हारा हुआ फॉर्मूला तेलंगाना में क्यों अपना रही है? गौरतलब है कि रेड्डी ने राज्य के लोगों से दो और वादे किए हैं। दूसरा वादा ये है कि सत्ता में आने पर वह उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार वाली बुलोडजर नीति अपनाएगी। पार्टी के मुताबिक इस नीति को लागू करके पुराने हैदराबाद वाले इलाके से माफिया, भ्रष्टाारियों और मवालियों का खात्मा करेगी।
एआईएमआईएम के खिलाफ मोर्चा खोलने का संदेश
उन्होंने कहा कि 'पहले कांग्रेस के मंत्री और मौजूदा बीआरएस के मंत्री बिना एमआईएम (AIMIM) की इजाजत के पुराने शहर में जा भी नहीं सकते। ओल्ड सिटी में अराजक माहौल है। वह अधिकारी अपना काम नहीं कर सकते। यह लोगों की समस्या नहीं है, एआईएमआईएम (असुद्दीन ओवैसी की पार्टी)मवालियों को प्रोत्साहित करती है। बीजेपी सरकार इस तरह के माफिया या किसी भी असामाजिक तत्वों को नहीं बख्शेगी। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उत्तर प्रदेश की तरह बुलडोजर उन्हें कुचल देंगे.....'
हैदराबाद की शहरी सीटों पर भाजपा का खास फोकस
दरअसल, ग्रेटर हैदराबाद में विधानसभा की 24 सीटें हैं और 2020 के ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) के चुनाव में भाजपा ने इसमें अप्रत्याशित प्रदर्शन करके दिखाया था। इसे यहां 48 सीटें मिली थीं और एआईएमआईएम को 44 सीटें गई थीं। जबकि, सत्ताधारी बीआरएस ने 55 सीटें जीती थी। इस वजह से भाजपा विधानसभा चुनावों में शहरी सीटों पर पूरा फोकस लगाए है, जहां मुसलमान वोटरों की काफी प्रभावशाली जनसंख्या है।
मुस्लिमों के बहाने पिछड़े वोटों पर भी नजर
पार्टी पिछड़े वर्ग और ओबीसी वोटरों पर भी अपना पूरा जोर लगा रही है। केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री रेड्डी ने रविवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एक तीसरी महत्वपूर्ण बात भी कही है कि, 'कांग्रेस की ओर से पिछड़े वर्ग के साथ अतीत में अन्याय किया गया, क्योंकि उसकी सरकार ने असंवैधानिक रूप से मुस्लिम आरक्षण लागू किया था...।'
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उस वादे को भी दोहराया है कि सरकार बनने पर पार्टी पिछड़े वर्ग के नेता को ही मुख्यमंत्री बनाएगी। उन्होंने कहा, 'बीजेपी वह पार्टी है, जो अपनी बातों को पूरा करती है।'
वे बोले, 'सीएम के चंद्रशेखर राव ने 2014 के चुनावों में दलित सीएम नियुक्त करने का वादा किया था, लेकिन राज्य को सक्षम नेतृत्व की जरूरत बताकर खुद इस पद को ले लिया था। यह दलितों का अपमान है। बीजेपी ने पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को केंद्रीय कैबिनेट में प्रमुख पद दिए हैं और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछड़े समुदाय से हैं।'












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