जिनके खिलाफ दर्ज हैं ऐसे मुकदमे, तेलंगाना चुनाव में बीजेपी उन्हें सबसे पहले देगी टिकट

तेलंगाना विधानसभा चुनावों को बीजेपी इसबार काफी गंभीरता से लड़ने की तैयारी में है। पार्टी के पास जो भी लोग टिकट की मांग करते हुए पहुंच रहे हैं, पार्टी पहले उनकी दागी छवि या क्रिमिनल रिकॉर्ड की छानबीन कर रही है। इसके लिए बाकायदा एक प्रोफार्मा तैयार किया है, जिसमें टिकट के दावेदारों को विस्तार से अपनी पूरी जानकारी भरनी है।

सोमवार से टिकट दावेदारों के आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसमें टिकट चाहने वालों को उनकी जेल की सजा और लंबित आपराधिक मामलों से संबंधित खास सवालों के जवाब भर कर देने हैं। पहले दिन ही करीब 180 आवेदन जमा किए गए। माना जा रहा है कि ज्यादातर टिकट दावेदार अभी शुभ मुहूर्त के इंतजार में हैं।

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आपराधिक रिकॉर्ड की देनी होगी पूरी जानकारी
चार भाग में बंटे टिकट आवेदन के प्रोफार्मा का अंतिम हिस्सा पूरी तरह से दावेदारों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और कोर्ट से मिली सजा या दोषसिद्धि की जानकारी भरने के लिए हैं। लंबित आपराधिक मुकदमो को लेकर विस्तृत सवाल पूछे गए हैं। इनमें टिकट चाहने वालों को एफआईआर की पूरी डिटेल देनी है। जैसे कि किस थाने में मामला दर्ज है, केस नंबर क्या, कौन सी अदालत में केस है, आईपीसी या सीआरपीसी की कौन सी धाराएं लगी हुई हैं या फिर क्या आरोप तय हो चुके हैं।

सजा या दोषसिद्धि की भी पूरी डिटेल देनी है
अगर चार्जशीट दर्ज हो चुकी है तो वह किन आरोपों में तय हुई है और क्या कोई अपील या पुनर्विचार याचिका दर्ज की गई। अगर किसी केस में दोषसिद्धि हो चुकी है या सजा मिली है तो उस अपराध और सजा से संबंधित पूरी डिटेल देनी होगी। अगर मामला अपील में है तो उसकी मौजूदा स्थिति क्या है, किस अदालत में यह लंबित है। इस तरह से पार्टी ने दागदार छवि के दावेदारों की पहचान के लिए पूरी तहकीकात की तैयारी की है। इससे पार्टी को साफ-सुथरी छवि वाले उम्मीदवारों को टिकट के लिए चुनने में सहायता मिलेगी।

पार्टी के संघर्ष के दौरान हुए मुकदमे तो मिलेगी प्राथमिकता
लेकिन, ऐसा नहीं है कि आईपीसी-सीआरपीसी के तहत दर्ज मुकदमे बीजेपी का टिकट चाहने वाले हर दावेदार की किस्मत की बत्ती गुल कर सकता है। जिन दावेदारों ने पार्टी के लिए सड़कों पर संघर्ष किया है या लड़ाइयां लड़ी हैं, उन्हें टिकट दिए जाने में प्राथमिकता मिल सकती है।

मतलब, जिन दावेदारों ने बीजेपी के धरना-प्रदर्शनों में भाग लिया और उस दौरान उनपर मुकदमे दर्ज हुए, तो उन्हें पार्टी टिकट देने में प्राथमिकता देगी। यानी क्रिमिनल रिकॉर्ड या दागी छवि जहां टिकट की संभावनाएं खत्म कर देगा, वहीं राजनीतिक संघर्ष के दौरान हुए मुकदमे उन संभावनाओं को बढ़ा देगा।

सोशल मीडिया अकाउंट की भी पूरी डिटेल मांगी
इनके अलावा बीजेपी ने टिकट चाहने वालों से अपनी सोशल मीडिया अकाउंट की पूरी जानकारी देने को भी कहा है। उन्हें यह भी बताना होगा कि वे बीजेपी से कैसे जुड़े और पार्टी में अभी उनका क्या योगदान है। पार्टी ने टिकट अभ्यर्थियों के आवेदन पर विचार करने के लिए तीन सदस्यीय स्क्रीनिंग टीम बनाई है।

आवेदन की डेडलाइन खत्म होने के बाद उनमें से कुछ नाम चुने जाएंगे और उन्हें अंतिम फैसले के लिए राष्ट्रीय समितियों के पास भेज दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री और तेलंगाना बीजेपी के अध्यक्ष जी किशन रेड्डी समेत बड़े नेता बीजेपी के टिकट दावेदारों से बात भी कर रहे हैं। पार्टी को लगता है कि टिकट के आवेदकों की संख्या 1,000 से बढ़ सकती है।

कांग्रेस की तुलना में बीजेपी के प्रोफार्मा में एक बड़ा अंतर है। कांग्रेस पार्टी टिकट चाहने वालों से एक घोषणा पत्र ले रही है कि अगर उन्हें टिकट नहीं मिला तो वे पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ नामांकन नहीं करेंगे। बीजेपी ऐसा कोई घोषणा पत्र नहीं जमा करा रही है।

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