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तेलंगाना में मतदान से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, क्यों 'प्रचार' पर घिर गई कर्नाटक सरकार?

तेलंगाना विधानसभा चुनाव कांग्रेस पार्टी एक तरह से उसके कर्नाटक मॉडल का प्रचार करते हुए लड़ रही है। लेकिन, इसी कर्नाटक मॉडल की वजह से उसे बड़ा झटका लगा है और चुनाव आयोग ने उसके खिलाफ काफी कड़ा रुख अपनाया है।

चुनाव आयोग ने पूरे तेलंगाना के अखबारों में कर्नाटक सरकार के विज्ञापनों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। आरोप है कि कर्नाटक सरकार तेलंगाना चुनावों के दौरान तेलंगाना के अखबारों में जनकर अपनी कल्याणकारी योजनाओं और कथित सफलताओं का बखान कर रही है।

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तेलंगाना में कर्नाटक सरकार के विज्ञापनों पर रोक
चुनाव आयोग ने तेलंगाना में कर्नाटक सरकार के इस तरह के विज्ञापनों को तबतक के लिए रोक दिया है, जबतक कि आदर्श आचार संहिता (MCC) के तहत जरूरी मंजूरी नहीं ली जाती है। बता दें कि तेलंगाना में कांग्रेस के प्रचार का आधार ही कर्नाटक में उसकी सरकार की ओर से दी जाने वाली गारंटियां रही हैं।

सिद्दारमैया सरकार से मांगा जवाब
तेलंगाना में जारी चुनाव अभियान के दौरान कर्नाटक सरकार के इस रवैए को चुनाव आयोग ने बहुत ही गंभीरता से लिया है और कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार से मंगलवार शाम 5 बजे तक जवाब देने को कहा है।

किन परिस्थितियों में जारी हुए विज्ञापन- चुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने कर्नाटक के मुख्य सचिव से पूछा है कि 9 अक्टूबर को जारी आदर्श आचार संहिता से जुड़े निर्देशों का उल्लंघन करते हुए हैदराबाद एडिशन वाले विभिन्न अखबारों में किन परिस्थितियों में ऐसे विज्ञापन जारी किए गए।

आयोग की मंजूरी के बिना विज्ञापन पर लगी है रोक
आयोग ने 9 अक्टूबर को पांच राज्यों में विधानसभा चनावों की घोषणा के दौरान कहा था, 'आदर्श आचार संहिता की अवधि के दौरान गैर-चुनावी राज्य सरकारों की ओर से जारी किए गए सभी विज्ञापनों को चुनाव वाले राज्यों के अखबारों में प्रकाशन के लिए भेजने से पहले आयोग की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।'

क्यों नहीं अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए- चुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने कर्नाटक के मुख्य सचिव से यह भी पूछा है कि राज्य के सूचना और जनसंपर्क के प्रभारी सचिव के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के निर्देशों के उल्लंघन के लिए क्यों नहीं अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

कर्नाटक सरकार पर गिर सकती है गाज
चुनाव आयोग ने पहले यह निर्देश दिया था कि संबंधित सरकार के सूचना और जनसंपर्क सचिव या निदेशक को उसके आदर्श आचार संहिता (MCC) के निर्देशों का पालन करने में किसी भी चूक के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसके तहत किसी भी राज्य को चुनाव वाले राज्यों के लिए विज्ञापन जारी करने से पहले चुनाव आयोग से मंजूरी लेना आवश्यक है।

बीजेपी, बीआरएस ने की है चुनाव आयोग से शिकायत
तेलंगाना से प्रकाशित अंग्रेजी और अन्य भाषाई अखबारों में कर्नाटक सरकार के विज्ञापन छापने के खिलाफ बीजेपी और भारत राष्ट्र समिति दोनों ने ही चुनाव आयोग से शिकायत की है। इस मामले में सोमवार को बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला था। इसमें केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री और तेलंगाना में पार्टी के चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर और सुधांशु त्रिवेदी जैसे नेताओं ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस का यह आचरण जनप्रतिनिधित्व कानून और आदर्श आचार संहिता दोनों का ही उल्लंघन है।

सरकारी धन से पार्टी के लिए प्रचार- बीजेपी का आरोप
बीजेपी ने चुनाव आयोग से कहा है कि 'सभी चुनाव कानून और नियम साफ तौर पर पार्टी का प्रचार अभियान चलाने के लिए सरकारी मशीनरी या धन के इस्तेमाल पर रोक लगाते हैं, यहां तक कि पार्टियों और उम्मीदवारों को सरकारी इमरातों में प्रेस को संबोधित करने की भी इजाजत नहीं है। यह पार्टी के हित को बढ़ावा देने और अपने प्रचार के लिए सरकारी संसाधनों और जनता के धन का पूरी तरह से दुरुपयोग का मामला है।'

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'आयोग के निर्देशों का गंभीर उल्लंघन है'
चुनाव आयोग के मुताबिक रिकॉर्ड की छानबीन से पता चला है कि उसकी ओर से इस तरह से तेलंगाना में कर्नाटक सरकार के विज्ञापन के लिए न तो कोई मंजूरी दी गई है और ना ही ऐसा कोई आवेदन उसके पास लंबित ही है। चुनाव आयोग के मुताबिक तेलंगाना के अखबारों में कर्नाटक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और सफलताओं का प्रचार करना, 'आयोग के निर्देशों का गंभीर उल्लंघन है।'

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