Telangana: 'कालेश्वरम प्रोजेक्ट को लेकर झूठे आरोप लगा रही कांग्रेस सरकार', बोले बीआरएस नेता कदियम श्रीहरि
तेलंगाना में पूर्व सीएम के काफिले में लक्जरी वाहनों और कालेश्वरम प्रोजेक्ट को लेकर बीआरएस पर कांग्रेस ने बड़े आरोप लगाए हैं। सीएम के वाहनों में लैंड क्रूजर पर बीआरएस नेता के कविता ने कहा कि इस तरह के निर्णय सिर्फ सिक्योहिटी विंग लेती है, सीएम को भी नहीं पता होता कि किस वाहन को कब काफिले में शामिल किया जाएगा। वहीं अब पूर्व मंत्री व बीआरएस नेता कदियम श्रीहरि ने कांग्रेस पर कालेश्वरम प्रोजेक्ट को लेकर झूठे आरोप फैलाने का आरोप लगाया है।
सीएम ए रेवंत रेड्डी की ओर से नए और लक्जरी वाहनों के इस्तेमाल से इनकार को बाद तेलंगाना की पूर्व सरकार सरकारी कामों के लिए फिजूल खर्ची को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच बीआरएस ने कांग्रेस और सीएम ए रेवंत रेड्डी को निशाने पर लिया है। तेलंगाना भवन में पत्रकारों से बात करते हुए कदियम श्रीहरि ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने पहले एक लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नई सरकार बनने के बाद कांग्रेस सरकार राज्य के पुरानी योजनाओं को ठप करने पर तुली हुई है। श्रीहरि ने कहा कि कालेश्वरम परियोजना पर अब तक केवल 93,000 करोड़ रुपये खर्च किये गए हैं।

बीआरएस नेता कदियम श्रीहरि ने दावा किया कि पूर्व की तेलंगाना सराकार के कार्यकाल में 140 टीएमसी फीट क्षमता वाले बड़े जलाशयों के निर्माण के कारण परियोजना पर अधिक धन खर्च हुआ है। बीआरएस नेता ने कांग्रेस के इन आरोपों का भी खंडन किया कि कालेश्वरम परियोजना किसी भी भूमि को सिंचित करने में विफल रही है। कांग्रेस सरकार के मंत्री भी अब स्वीकार करते हैं कि लगभग 90,000 नई एकड़ जमीन सिंचित की गई है। वहीं लैंड क्रूजर पर मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर, बीआरएस नेता ने कहा कि वे वाहन पहले खरीदे गए थे, और विजयवाड़ा में बुलेटप्रूफ होने के लिए भेजे गए थे।
वहीं भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) एमएलसी कल्वकुंतला कविता ने कहा कि मुख्यमंत्री के काफिले का प्रोटोकॉल सुरक्षा, खुफिया और पुलिस विभागों द्वारा तय किया जाता है। के कविता ने कहा, "कोई भी जन प्रतिनिधि विशिष्ट कारों या सुरक्षा कर्मियों की मांग नहीं करता, लेकिन सुरक्षा और खुफिया विभाग के विशेषज्ञों ने अत्याधुनिक सुरक्षा वाले वाहनों के प्रयोग का सुझाव दिया था। सिक्योरिटी विंग ही ये फैसला करती है कि सीएम का काफिला कैसे और कहां बनाना है और इसे गुप्त रखा जाता है। इसलिए, यह स्पष्ट है कि इंटेलिजेंस इन वाहनों को ऐसी जगह पर रखा है, जहां ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ने पर वे कारों का उपयोग करेंगे। वे हमें भी ये बातें नहीं बताते।"












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