तेलंगाना के सीएम Revanth Reddy सत्ता संभालते ही पहुंचे दिल्ली, BRS को घेरने की तैयारी?
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है और शुक्रवार को दिल्ली पहुंच गए हैं। इससे पहले वह तेलंगाना में पूरी तरह से ऐक्शन मोड में आ चुके हैं।
वैसे माना जा रहा है कि वह लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए दिल्ली आए हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक तेलंगाना के सीएम लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से मुलाकात करके अपनी संसद सदस्यता छोड़ देंगे। 2019 में वे तेलंगाना की मल्काजगिरि लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे।

कांग्रेस के बड़े नेताओं से मुलाकात की संभावना
सूत्रों का यह भी कहना है कि दिल्ली दौरे के समय वह कांग्रेस पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात कर सकते हैं। तेलंगाना की नवनिर्वाचित विधानसभा के पहले सत्र से पूर्व यह मुलाकात खास मायने रख रही है।
दोनों नेताओं के बीच इस दौरान उन 6 चुनावी गारंटियों पर भी चर्चा होने की संभावना है, जिनके दम पर कांग्रेस कर्नाटक की तरह तेलंगाना में भी सत्ता में आई है।
शपथग्रहण समारोह में कांग्रेस के दिग्गज हुए शामिल
रेड्डी ने गुरुवार को ही एक उपमुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। उनके शपथग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा पार्टी नेता सोनिया गांधी, उनके बेटे और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी भी मौजूद थे।
इस कार्यक्रम में कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री कर्नाटक के सिद्दारमैया और हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू भी उपस्थित थे।
बीआरएस सरकार के खर्चों का हिसाब मांगा
इस बीच मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नए मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के दूसरे दिन ही पूर्व की के चंद्रशेखर राव सरकार के खर्चों का हिसाब-किताब जुटाना शुरू कर दिया है। नए मुख्यमंत्री ने बीआरएस सरकार के सारे खर्चों की लिस्ट जुटाने के आदेश दिए हैं।
नई सरकार ने लिस्ट मंगवाने के साथ ही यह छानबीन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है कि इनमें से कितनी तेलंगाना की जनता तक पहुंची है। जानकारी के मुताबिक उन्होंने खर्चे का एक तरह से पूरा ब्रेकअप मंगवा लिया है, जो एक तरह से 'सियासी' ऑडिट की तरह माना जा रहा है।
BRS को घेरने की तैयारी?
जानकारी के मुताबिक तेलंगाना सरकार के खर्चों का यह ब्योरा केसीआर सरकार के पूरे कार्यकाल यानि कि 2014 से लेकर 2023 तक के लिए मंगवाया गया है। बता दें कि तेलंगाना विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने बीआरएस के खिलाफ भ्रष्टाचार को बहुत बड़ा मुद्दा बनाया था और रेवंत रेड्डी सरकार के इस ऐक्शन से लगता है कि सरकार उसी की तहकीकात की ओर कदम बढ़ाना चाहती है।
यही नहीं राज्य के मतदाताओं से कांग्रेस ने जो वादे किए हैं, उसके लिए भी उसे राज्य के बजट को नए सिरे से मैनेज करने की आवश्यकता पड़ेगी और शायद उसी की वजह से सरकार में आते ही, इस तरह के आदेश दिए गए हैं।
रेवंत रेड्डी प्रदेश के एक मंजे हुए राजनेता हैं और 2017 में जबसे टीडीपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं, उन्होंने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने में बड़ी अहम भूमिका निभाई है। (कुछ इनपुट-पीटीआई)












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