Telangana Elections: तेलंगाना में जोर पकड़ रहा बीजेपी का इलेक्शन कैंपेन, किसका होगा फायदा? जानिए
तेलंगाना में मतदान की तारीख नजदीक आते ही राजनीतिक दलों को अभियान तेज हो चुका है। इस बीच बीआरएस, कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं के बीच आरोप प्रत्यारोपों का भी दौर जारी है। पार्टी की दिग्गज नेता पिछले कुछ दिनों से ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं। इस दौरान मतदाओं को अपने पक्ष में करने के लिए बीजेपी की ओर से कई बड़े वादे भी किए गए हैं। राज्य में बीआरएस के बाद तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी के इलेक्शन कैंपेन तेज हो चुके हैं, जिसके खास मायने निकाले जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई दिग्गजों ने पिछले कुछ दिनों से तेलंगाना में लगातार कई रैलियां की। ऐसे में दावा किया जा रहा है कि इस बार विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी राज्य के राजनीतिक समीकरण में बड़ा बदलाव ला सकती है। दावा किया जा रहा है कि लगातार इलेक्शन कैंपेन के चलते राज्य में कुछ मतदाता वर्ग बीजेपी के समर्थन में आ गए हैं।

इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि बीजेपी ने पिछले 10 दिनों में तेलंगाना में वापसी की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भाजपा के नए उत्साह को बीआरएस से छीने जाने वाले वोटों को विभाजित करके कांग्रेस को बाधित करने के संकल्प के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि हालांकि कांग्रेस और बीआरएस के दिग्गज नेता इस बात को मानने से इनकार कर रहे हैं।
क्या कहते हैं चुनावी आंकड़े
तेलंगाना में लंबे समय से बीजेपी पिछड़ी पार्टियों में शामिल है। पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। पार्टी 114 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। पार्टी को केवल गोशामहल विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल हुई। बाकी की सभी सीटों पर पार्टी हार गई। तेलंगाना की 104 सीटें ऐसी थीं जहां पर बीजेपी की जमानत तक जब्त हो गई। लेकिन बाद 2019 के आम चुनाव में पार्टी ने यहां से चार लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कर ये साबित कर दिया की तेलंगाना में बीजेपी की पकड़ से इनकार नहीं किया जा सकता।
लोकसभा चुनाव 2019 में दिखा सुधार
2018 में महज सात फीसदी वोट हासिल करने वाली पार्टी ने लोकसभा चुनाव में 19.65 फीसदी वोट हासिल कर महत्वपूर्ण सुधार दिखाया। तेलंगान में 2018 के बाद से हुए हुए उपचुनावों में भी बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर रहा। यहां पार्टी ने 2020 में दुब्बाका उपचुनाव और 2021 में हुजूराबाद उपचुनावा में जीत हासिल की। जबकि हुजूरनगर (2019), नागार्जुन सागर (2021), और मुनुगोडे (2022) में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
GHMC में बीजेपी का प्रदर्शन
भारतीय जनता पार्टी ने 2020 में हुए जीएचएमसी (GHMC)चुनाव में भी बेहतर प्रदर्शन किया। 2016 में जहां बीजेपी की सीटें चार थीं वो बढ़कर 48 हो गई।
तेलंगाना में बीजेपी की उम्मीदें
दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों तेलंगाना और कर्नाटक दोनों पर बीजेपी की नजर है। निजाम शासन की आलोचना के साथ बीजेपी को यहां अपनी राजनीतक जमीन मजबूत होने के उम्मीद दिख रही है। बीजेपी तेलंगाना के सत्तारूढ़ दल बीआरएस को जमकर निशाने पर ले रही है। बीआरएस और एआईएमआईएम के बीच गठबंधन को लेकर अक्सर बीजेपी सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाती रहती है। पार्टी ऐसा करके बीआरएस और एआईएमआईएम कथित सांठगांठ को उजागर करने का दावा करती है। भाजपा की ओर से दोनों को दलों को हिंदुत्व के अस्तित्व के खतरा बताया जाती है।
राजनीतिक समीकरण
भाजपा के नए उत्साह को बीआरएस से छीने जाने वाले वोटों को विभाजित करके किसी भी कीमत पर कांग्रेस को खत्म करने के संकल्प के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस के नेताओं ने भी आकलन किया है कि भाजपा के वोट शेयर में किसी भी तरह की बढ़ोतरी से उनकी संभावनाओं पर गंभीर असर पड़ेगा। कांग्रेस ने आकलन किया है कि भाजपा को आठ प्रतिशत से अधिक वोट मिलने से उसकी साधारण बहुमत हासिल करने की संभावनाओं पर खतरा पैदा हो जाएगा। वहीं भाजपा नेताओं ने खुले तौर पर कहा है कि वह बीआरएस और कांग्रेस में से किसी एक को सत्ता में लाना पसंद करेगी।
इन सीटों पर बीजेपी का जीत का दावा
भाजपा आगामी 30 नवंबर के विधानसभा चुनावों में 111 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी दिग्गजों का मानना है कि बीजेपी कम से कम 30 क्षेत्रों में कड़ी टक्कर दे रही है। जिसमें करीमनगर, कोरुटला और हुजूराबाद और एटाला शामिल हैं। इन सीटों पर बंदी संजय, अरविंद धरमपुरी और राजेंदर चुनाव लड़ रहे हैं।












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