तेलंगाना: विधानसभा चुनाव के बाद अब स्थानीय निकायों में उथल-पुथल, लाए गए अविश्वास प्रस्ताव
हाल ही में संपन्न हुए तेलंगाना विधानसभा चुनावों के बाद राज्य भर के स्थानीय निकायों में उथल-पुथल सामने आई है। नगरपालिका अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और मंडल प्रजा परिषद (एमपीपी) के अध्यक्षों के खिलाफ कई अविश्वास प्रस्ताव लाए गए हैं।
बताया जा रहा है कि इन अविश्वास प्रस्तावों के पीछे सत्तारूढ़ कांग्रेस का हाथ है। इन स्थानीय निकायों को अपने राजनीतिक नियंत्रण में लाने की दीर्घकालिक रणनीति के तहत सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायक इन अविश्वास प्रस्तावों के पीछे हैं। इस रणनीति में बीआरएस पार्षदों, एमपीटीसी और नगरसेवकों को कांग्रेस खेमे में लाने का ठोस प्रयास किया जा रहा है।

अविश्वास प्रस्ताव से बीआरएस नेताओं में चिंता
वारंगल, महबूबनगर और नलगोंडा जैसे जिलों में स्थानीय निकायों पर नियंत्रण हासिल करने के लिए ये प्रयास किए जा रहे हैं। महबूबनगर जिले में जडचेरला, नगरकुर्नूल, महबूबनगर से कलवाकुर्थी जैसी नगर पालिकाओं में तनाव बढ़ गया है, जहां अविश्वास प्रस्ताव लाए गए हैं।
पार्षदों से पार्टी बदलने पर दे रहे जोर
कांग्रेस विधायक बीआरएस पार्षदों के संपर्क में हैं। इन पार्षदों से उन्होंने पार्टी बदलने पर जोर दे रहे हैं। इस घटनाक्रम ने बीआरएस नेताओं को चिंता में डाल दिया है। भूपालपल्ली, वारंगल पश्चिम, नरसंपेट, जनगांव और महबुबाबाद के कांग्रेस विधायक सक्रिय रूप से बीआरएस स्थानीय निकाय सदस्यों के संपर्क में हैं।
नगरपालिका अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कर रहे प्रेरित
उन्हें नगरपालिका अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इससे बीआरएस के पूर्व मंत्री और विधायक तनाव में हैं क्योंकि उनके पास इन दलबदल को रोकने के साधनों की कमी है।
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