तेजप्रताप के जनता दरबार ने बढ़ाई तेजस्वी की टेंशन, मुख्यालय जाने से बच रहे हैं सीनियर लीडर
पटना। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव पत्नी एश्वर्या से तलाक की अर्जी देने के लगभग दो महीने बाद एक बार फिर बिहार की राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। तेज प्रताप की सक्रियता के चलते नेता प्रतिपक्ष और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खेमें के सीनियर नेताओं में हलचल मच गई है। तेज प्रताप इन दिनों पटना स्थित पार्टी के मुख्यालय में जनता दरबार लगा हैं। जिसमें वे लोगों की समस्याएं भी सुन रहे हैं। मंगलवार को लगातार दूसरे दिन पार्टी मुख्यालय में जनता दरबार लगा। बता दें कि तलाक की अर्जी के बाद से वह मथुरा, वृंदावन और वाराणसी में समय बिताते देखे गए थे।

जनता दरबार में तेजस्वी यादव शामिल नहीं हो रहे हैं
तेज प्रताप की ओर आयोजित किए जा रहे इस जनता दरबार में पार्टी के कई बरिष्ठ नेता और तेजस्वी यादव शामिल नहीं हो रहे हैं। ऐसा देखा जा रहा है जब तेज प्रताप कार्यालय में मौजूद होते हैं तो तेजस्वी और उनके खेमें के नेता वहां आने से बचते हैं। तेजस्वी की गैर मौजूदी पर सवाल पूछे जाने पर तेजप्रताप ने कहा कि, तेजप्रताप यादव ने कहा कि उन्हें छोटे भाई तेजस्वी यादव के जनता दरबार में आने से बेहद खुशी होगी। उन्होंने कहा कि वह पार्टी द्वारा दी जाने वाली कोई भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को तैयार हैं।

जनता दरबार नियमित रूप से लगेगा
यह पूछे जाने पर कि क्या वह ऐसे जनता दरबार का आयोजन करके अपने पिता की राह पर चलने की कोशिश कर रहे हैं। इसके जवाब में तेजप्रताप ने कहा, मुझे लोगों को समझने के लिए उनसे संवाद करना पड़ेगा। जनता दरबार नियमित रूप से लगेगा। वहीं आपने भाई के साथ मतभेदों के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि, वह तेजस्वी यादव को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने के लिए काम करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। मैंने बार-बार कहा भी है कि तेजस्वी अर्जुन हैं और मैं कृष्ण की भूमिका निभाऊंगा। कुछ लोग भाइयों के बीच दीवार खड़ी करना चाहते हैं।

पार्टी में कुछ आरएसएस जैसी सोच वाले लोग हैं
तेजप्रताप ने पार्टी के भीतर कलह मचाने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में कुछ आरएसएस जैसी सोच वाले लोग हैं, लेकिन मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिलने के बाद उनके विचार भी बदलेंगे। मुझे नहीं पता है कि वह क्या कह रहे हैं और क्यों कह रहे हैं। चुनाव आ रहे हैं और कई लोग बेकार में टिकट की चिंता करते हुए बोलने लगते हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, रांची जाकर पिता लालू यादव से मिलकर लौटे तेजप्रताप राजनैतिक रूप से खासे सक्रिय हो गए हैं और पार्टी कार्यालय आने लगे हैं। यहीं नहीं उन्होंने उस कमरे में लोगों की समस्याएं सुनी जहां लालू यादव बैठते थे।












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