Surendra Sir: वो टीचर, जो UPSC में बिहार से जुड़ा खास सब्‍जेक्‍ट पढ़ाकर युवाओं को बना रहे IAS-IPS

Teachers Day 2023: शिक्षक ही वो माध्‍यम है जिसके दिए ज्ञान से छात्र बुलंदियों को छूता है। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर हम आपको ऐसे ही एक शिक्षक से मिलवाने जा रहे हैं जिनके पास UPSC के छात्रों के लिए ऐसे खास विषय का ज्ञान का भंडार है जिसे पढ़ाकर वो अब तक कई छात्र-छात्राओं को आईएएस और आईपीएस बना चुके हैं।

Delhi Mukherjee Nagar Surendra Sir

दिल्‍ली के ये टीचर हैं सुरेंद्र राउत, जो 'सुरेंद्र सर' के नाम से मशहूर हैं। सुरेंद्र सर की कोचिंग दिल्‍ली के मुखर्जी नगर में है और वो मैथिली विषय पढ़ाते हैं। दिल्‍ली में यूपीएससी के लिए मैथिली विषय की स‍ीनियर लेवल पर पढ़ाई करवाने वाले सुरेंद्र सर अकेले टीचर हैं।

बिहार नहीं इन राज्‍यों के अधिक छात्र सुरेंद्र सर के है स्‍टूडेन्‍ट

मैथिली भाषा जो बिहार में बोली जाती है लेकिन सुरेंद्र सर से मैथिली विषय पढ़ने वाले अधिकांश स्‍टूडेन्‍ट बिहार के नहीं बल्कि पंजाब, हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश के हैं। ये वो छात्र हैं जिनका मैथिली भाषा से कभी कोई नाता नहीं रहा है, लेकिन सुरेंद्र सर छात्रों को मैथिली विषय में ऐसा परांगत कर देते हैं कि वो यूपीएससी परीक्षा में टॉप कर जाते हैं।

मैथिली विषय से इन छाात्रों को दूर-दूर तक नहीं है नाता

आपके दिमाग में ये जरूर आ रहा होगा कि मैथिली विषय से जिन छात्रों का दूर-दूर तक से कोई नाता नहीं है तो वो ये विषय देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षा में सब्जेक्‍ट के तौर पर क्‍यों चुनते हैं? इस सवाल का जवाब सुरेंद्र सर ने न्‍यूज 18 को दिए एक इंटरव्‍यू में हाल ही में दिया है।

मैथिली विषय चुनकर परीक्षा में टॉप कर रहे

सुरेंद्र सर जो पिछले 15 सालों से यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों को मैथिली विषय पढ़ा रहे हैं। उन्‍होंने बताया यूपीएससी में हर साल 10 लाख में से 1000 ही सलेक्‍ट होते हैं, ऐसी कठिन परीक्षा में स्‍टूडेंट को बहुत विचार करके विषय चुनना होता है। पिछले कई सालों में मुख्‍य ऑप्‍शनल विषय के तौर पर स्‍टूडेंट खास वजह से मैथिली विषय चुनकर परीक्षा में टॉप कर रहे हैं।

मैथिली विषय चुनने की खास वजह

यूपीएससी परीक्षा के लिए यूपीएससी पढ़ाने वाले एकमात्र एक्‍सपर्ट टीचर सुरेंद्र सर ने बताया कि इसकी वजह है कि यूपीएससी परीक्षा में अन्‍य विषयों की अपेक्षा इस विषय में आसानी से अंक लाया जा सकता है इसकी खास वजह है। वो खास वजह इस विषय का पाठ्यक्रम और लिपि है।

बाकी विषयों से क्‍यों आसाान है ये विषय

सुरेंद्र सर ने बताया कि बिहार और आस-पास की जगहों पर प्रमुख रूप से बोली जाने वाली मैथिली भाषा को विषय के तौर बिहार के बाहर के छात्र इसलिए चुन रहे हैं क्‍योंकि इस विषय का पाठ्यक्रम अन्‍य विषयों की अपेक्षा बहुत कम हैं। पाठ्यक्रम होने की वजह से पांच साल के अंदर इस विषय से संबंधित पूछे गए सभी सवाल रिपीट होते हैं।

इस लिपि में लिखी जाती है मैथिली

इसके अलावा मैथिली को हिंदी की तहर देवनागरी लिपि में थोड़े बदलाव के साथ लिखा जाता है। इसलिए इस विषय को लिखने और पढ़ने में बिहार के बाहर के छात्रों को ज्‍यादा मुश्किल नहीं होती है।

दो महीने में पूरा कर सकते हैं पाठ्यक्रम

मैथिली विषय का पाठ्यक्रम छोटा होने की वजह से यूपीएससी परीक्षा के उम्‍मीदवार इसे ले रहे हैं। सुरेंद्र सर ने बताया कि हर दिन चार घंटे की क्‍लास अटेन्‍ड करके छात्र महज दो माह में इस मैथिली विषय का पाठ्यक्रम पूरा करते हैं।

सुरेंद्र सर के पढ़ाए ये स्‍टूडेंट पिछले साल बने हैं आईएएस

सुरेंद्र सर से मैथिली पढ़कर 2022 की यूपीएससी की परीक्षा में प्रिंस कुमार ने 89 वीं रैंक हासिल की थी। मिथिलेश मीना ने 826 रैंक हासिल की थी।

पंजाब के भी स्‍टूडेन्‍ट भी पढ़ रहे ये विषय

बिहार राज्‍य से बाहर के छात्रों को मैथिली जैसी प्‍यारी भाषा का ज्ञान देकर आईएएस की खेप तैयार कर रहे सुरेंद्र सर ने बताया कि पंजाब जैसे राज्‍य जहां के स्‍टूडेंट हिंदी भी ठीक से नहीं बोल पाते वो भी यूपीएससी परीक्षा में मैथिली विषय चुन रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि उनके पंजाब प्रांत के स्‍टूडेन्‍ट आदित्‍य भारद्वाज और परमजीत यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल कर चुके हैं।

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