विशेष दर्जे की मांग को लेकर लोकसभा स्पीकर के चैंबर में ही सो गया टीडीपी सांसद
जब लोकसभा स्पीकर के चैंबर में सो गए टीडीपी सांसद
नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर तेलेगुदेशम पार्टी के सांसदों ने शुक्रवार को लोकसभा स्पीकर के चैंबर में धरने पर बैठ गए। टीडीपी के सांसद संसद कार्यवाही स्थगित होने के बाद स्पीकर सुमित्रा महाजन के चैंबर में पहुंचे और वहां धरने पर बैठ गए। दोपहर बाद तक भी सांसद यहीं बैठे हुए हैं। एक सांसद तो धरने के दौरान जूते उतारकर वहीं फर्श पर सोते हुए भी नजर आए, हालांकि स्पीकर सुमित्रा महाजन अपने चैंबर में मौजूद नहीं हैं।

काफी समय से प्रदर्शन कर रही है टीडीपी
टीडीपी पूरे बजट सत्र के दौरान ही आन्ध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग लेकर प्रदर्शन कर रही है। सांसद लगातार संसद में हाथों में तख्तियां लेकर आ रहे हैं। गुरुवार को भी राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद टीडीपी सांसदों ने सदन में धरना दिया था। राज्यसभा के स्टाफ और मार्शलों ने सांसदों से सदन छोड़ने को कहा लेकिन सांसद सदन से बाहर जाने के लिए तैयार नहीं हुए। देर शाम को घंटों की मशक्कत के बाद सदन में बैठे सांसदों को मार्शलों की मदद से बाहर निकलवाया गया।

YSRCP के पांच सांसदों ने सौंपा इस्तीफा
आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर टीडीपी के साथ-साथ वाआईएसआरसीपी भी केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बना रही है। वाईएसआरसीपी के पांच सांसदों ने आज लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला लिया है। वाईएसआरसीपी के सभी पांच सांसद आज लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

संसद से भाग रही है मोदी सरकार: नायडू
आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने को लेकर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह जानबूझकर सदन में भाग रही है। नायडू ने अपनी पार्टी के सांसदों से बातचीत के दौरान कहा कि भाजपा लगातार सदन में भाग रही है और वह बार-बार सदन की कार्यवाही को स्थगित करा रही है। पिछले कई दिनों से भाजपा सदन की कार्रवाई को लगातार स्थगित करा रही है, ऐसे में अगर आज भी सदन की कार्रवाई को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जाता है तो हमारे सांसदों को राष्ट्रपति से जरूर मुलाकात करनी चाहिए।
चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने को लेकर केंद्र सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था और उनके सांसदों ने सरकार में अपने मंत्रीपद से भी इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनकी पार्टी ने एनडीए से भी अलग होने का फैसला लिया था।












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