दिल्ली सेवा विधेयक पर और मजबूत हुई मोदी सरकार, चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी का भी मिला साथ
टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू ने अपने रुख से साफ कर दिया कि वो दिल्ली सेवा विधेयक पर मोदी सरकार का समर्थन करेंगे।
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने बुधवार को साफ कर दिया कि वो दिल्ली सेवा विधेयक पर नरेंद्र मोदी सरकार का समर्थन करने जा रही है। 1 अगस्त को केंद्र सरकार ने विपक्षी सांसदों के जोरदार विरोध के बीच लोकसभा में दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक 2023 पेश किया। तेलुगु देशम पार्टी के पास राज्यसभा में 01 सीट है।
दिल्ली सेवा विधेयक को "सबसे अलोकतांत्रिक" कानून बताते हुए आम आदमी पार्टी (आप) ने कहा कि भारतीय पार्टियों का गुट इसका विरोध करेगा और आशा व्यक्त करेगा कि सत्तारूढ़ भाजपा के कई सांसद भी संविधान की रक्षा के लिए इसके खिलाफ मतदान करेंगे।

1 अगस्त को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजू जनता दल (बीजेडी) ने भी राज्यसभा में विधेयक को पारित करने के लिए अपने समर्थन की घोषणा की। इसके अलावा, ओडिशा स्थित पार्टी ने विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का भी विरोध करने का फैसला किया।
वहीं, इस कानून को लेकर आप सांसद राघव चड्ढा ने इसे दिल्ली के लिए काफी खतरनाक बता चुके हैं। मानसून सत्र फिर से शुरू होने से पहले मंगलवार को आप सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि ये विधेयक लोकतंत्र को बाबूशाही में बदल देगा। अगर ये विधेयक कानून बन जाता है तो उपराज्यपाल, कुळ सिविल सेवकों के साथ मिलकर दिल्ली चलाएंगे। सारी शक्तियां खत्म हो जाएंगी।
आप सांसद चड्ढा ने कहा कि ये विधेयक दिल्ली सरकार से छीन लिया गया और एलजी में निहित कर दिया गया, जो कि बीजेपी के ही नियुक्त हैं। ये विधेयक उस अध्यादेश से भी खतरनाक है, जिसे पहले केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया था।
केंद्र ने अपने विधेयक में बताया कि ग्रुप ए अधिकारियों के स्थानांतरण और पोस्टिंग के लिए एक प्राधिकरण बनाने का अध्यादेश, जिसे आप सरकार ने सेवाओं के नियंत्रण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ बताया है। शीर्ष अदालत के 11 मई के फैसले से पहले दिल्ली सरकार के सभी अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग उपराज्यपाल के हाथ में थी।












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