मुस्लिम धर्मगुरुओं को नरेन्द्र मोदी के करीब लायीं तसलीमा नसरीन

सबसे बड़ा इमामों का संघ
उल्लेखनीय है कि उमेर इलियासी देश के सबसे बड़े इमामों के संघ के प्रमुख हैं और मोदी की गोधरा से लेकर तमाम मसलों पर निंदा करते रहे हैं। हालांकि उन्हें उदारवादी मुस्लिम धर्मगुरु माना जाता है।
उधर, राजधानी में अल्लमां रफीक ट्रस्ट के सदर और इस्लामिक विद्वान जनाब मकसूद अहमद ने भी मोदी सरकार की इस बात के लिए प्रशंसा की कि उसने बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन को भारत में लंबे समय तक रहने का वीजा नहीं दिया। हालांकि जब उन्हें बताया गया कि तसलीमा ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की है ताकि उनका वीजा बढ़ जाए तो मकसूद साहब कहने लगे, मुझे पूरा यकीन है कि तसलीमा को देश छोड़ना पड़ेगा। जब उसे उसके अपने मुल्क में रहने की जगह नहीं मिली तो भारत में कैसे मिल सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि तसलीमा के भारत में रहने से देश में दंगे फसाद भड़क सकते हैं। कोलकाता के भी कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने एनडीए सरकार के तसलीमा नसरीन के वीजा की अवधि दो माह ही बढाने के फैसले को वाजिब बताया है।
अंजुमन इस्लाम की अलग राय
उधर, मुंबई में पूर्व आईएएस अफसर और अंजुमन इस्लाम से जुड़े हुए जफर इकबाल का कहना है कि तसलीमा नसरीन को एनडीए सरकार भारत में रहने का वीजा दे या नहीं,इस बात की चिंता सरकार को करनी चाहिए सोच-समझ कर। इस मसले पर मुस्लिम धर्म गुरुओं को अपनी राय रखने से बचना चाहिए।
सनद रहे गृह मंत्री से मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि तसलीमा को भारत छोड़ने के लिए नहीं कहा जाएगा। तसलीमा ने शनिवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिली थीं, जिसके बाद तसलीमा नसरीन ने मीडिया को बताया कि उन्हें रेजिडेंट वीजा दे दिया गया है। उन्होंने राजनाथ सिंह को अपनी कुछ किताबें भी भेंट की।












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