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तो ममता की ये बात तृणमूल MLA तापस रॉय को चुभ गई, क्या पार्टी छोड़ने का संदेशखाली से है सीधा कनेक्शन?

लोकसभा चुनावों से पहले ममता बनर्जी को बहुत बड़ा झटका लगा है। तीन बार के विधायक और टीएमसी के वरिष्ठ नेता तापस रॉय ने पार्टी भी छोड़ दी है और अपनी विधायकी से भी इस्तीफा दे दिया है।

तापस रॉय टीएमसी के डिप्टी चीफ व्हिप भी थे और पार्टी के दमदम-बैरकपुर संगठनात्मक जिले के पार्टी अध्यक्ष भी थे। वे उत्तर 24 परगना जिले की बारानगर विधानसभा सीट से विधायक थे और पिछले दो चुनावों से लगातार वहां से जीत रहे थे।

tapas roy resigns for tmc

टीएमसी की काफी कोशिशों के बाद भी नहीं माने तापस रॉय!
अभी पश्चिम बंगाल जिस वजह से पूरे देश में चर्चा में रहा है, वह संदेशखाली में हुई घटना है और यह भी उसी जिले का हिस्सा है, जहां की एक विधानसभा सीट का तापस रॉय प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने नहीं दिखाई 'ममता'!
सूत्रों के मुताबिक टीएमसी की ओर से उन्हें आखिरी समय में मनाने की काफी कोशिशें की गईं, लेकिन तापस रॉय अपने फैसले पर अडिग रहे। सामने से तो उन्होंने यही कहा है कि जिस तरह से नगर निकाय में भर्ती घोटाले को लेकर उनके घर पर प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमारी की और पार्टी और सीएम ममता बनर्जी ने उन्हें छोड़ दिया, यह उन्हें नागवार गुजरा है।

ममता बनर्जी ने एक बार भी नहीं पूछा- तापस रॉय
उन्होंने एमएलए पद से इस्तीफा देने के बाद कहा, 'पिछले 23-34 वर्षों से मैं तृणमूल कांग्रस के साथ हूं। 12 जवरी को ईडी ने मेरे घर पर रेड डाला। छापेमारी के 52 दिनों बाद भी, मेरी पार्टी ने एक बार भी मुझे सपोर्ट नहीं किया। ममता बनर्जी ने एक बार भी मुझे कॉल नहीं किया। पार्टी ने मुझे कॉल नहीं किया। मेरे या मेरे परिवार के साथ कोई खड़ा नहीं हुआ।'

संदेशखाली की घटना ने बहुत दुख दिया- पूर्व टीएमसी एमएलए
इसके बाद उन्होंने जो कुछ कहा उससे यह इशारा मिल रहा है कि आखिर उन्हें तृणमूल सुप्रीमो की कौन सी बात चुभ गई। उन्होंने कहा, 'पार्टी में बहुत ज्यादा भ्रष्टाचार है। संदेशखाली (टीएमसी नेताओं पर टीएमसी समर्थक महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोप हैं,साथ ही पार्टी के दबंग नेताओं पर उन गरीबों की जमीनें हड़पने के भी आरोप हैं) एपिसोड ने भी मुझे बहुत दुख दिया है।'

शेख शाहजहां पर ममता के रवैए से हुए मायूस?
सूत्रों का कहना है कि असल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिस तरह से उनके पक्ष में एक शब्द बोलने की जरूरत नहीं समझी, लेकिन विधानसभा में शेख शाहजहां जैसे यौन उत्पीड़न के आरोपी का बचाव किया, उसने उन्हें अंदर तक हिला दिया और उनका पार्टी और उसकी नेता से मोहभंग हो गया।

बीजेपी में शामिल होने की भी लग रही हैं अटकलें
कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उनकी उत्तर कोलकाता लोकसभा सीट से टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय से भी खींचतान चल रही है। तापस के इस्तीफे के बाद उनके भाजपा में भी शामिल होने की अटकलें शुरू हो गई हैं और कहा जा रहा है कि ऐसी स्थिति में वह बंदोपाध्याय की सीट पर ही उन्हें चुनौती देते दिख सकते हैं।

उनके भाजपा में शामिल होने के सवालों पर बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा, 'राजनीति संभावनाओं का खेल है। हालांकि, अभी इसपर मीडिया के साथ साझा करने के लिए कुछ भी नहीं है।'

टीएमसी अब शेख शाहजहां जैसे अपराधियों की पार्टी- सीपीएम
वहीं सीपीएम पोलितब्यूरो सदस्य सुजान चक्रबर्ती का कहना है कि 'उनके जैसे व्यक्ति का पार्टी छोड़ना दिखाता है की टीएमसी अब शेख शाहजहां जैसे बाहुबली और अपराधियों की पार्टी रह गई है, जिसमें अच्छे नेताओं के लिए जगह नहीं है।'

टीएमसी उठा रही है रॉय के इस्तीफे के समय पर सवाल
जबकि, रॉय के फैसले पर टीएमसी नेता और पार्टी के युवा इकाई के महासचिव देबांग्शु भट्टाचार्य ने सवाल किया है कि 'उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला तब क्यों किया है, जब 15 दिनों में लोकसभा चुनावों की घोषणा होनी है?'

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