तमिलनाडु के मंत्री पोनमुडी को हाई कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा, विधायकी भी गई, जानिए किस मामले में हुई कार्रवाई
Tamil Nadu Minister K Ponmudy: मद्रास हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में डीएमके नेता और तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री के पोनमुडी को दोषी ठहराया है। हाई कोर्ट ने के पोनमुडी को तीन साल की कैद और 50 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। पोनमुडी की पत्नी विशालाक्षी को भी दोषी ठहराया गया है।
के पोनमुडी को सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें विधायक और मंत्री के रूप में तत्काल अयोग्य घोषित कर दिया गया है। मंत्री और उनकी पत्नी ने अपना मेडिकल रिकॉर्ड कोर्ट में पेश किया था और कहा कि मामला बहुत पुराना है और अब मंत्री 73 साल के हैं जबकि उनकी पत्नी 60 साल की हैं...इसलिए उन्हें न्यूनतम सजा मिलनी चाहिए।

तमिलनाडु के मंत्री के पोनमुडी को तीन साल की साधारण कारावास की सजा सुनाई गई और अदालत ने उन पर और उनकी पत्नी पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। हालांकि हाई कोर्ट ने सजा को 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है, ताकि दोषियों को उच्च अपील के लिए वक्त मिले। जिसके लिए उन्होंने अनुमति मांगी थी।
क्या है ये आय से अधिक संपत्ति का मामला?
पोनमुडी और उनकी पत्नी के खिलाफ सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) का मामला 2002 में दर्ज किया गया था जब तत्कालीन AIADMK सरकार 1996-2001 तक सत्ता में थी, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि दोनों की आय 1.4 करोड़ रुपये है लेकिन उस समय उनकी आय के स्रोतों का पता नहीं चल पाया था।
डीवीएसी ने दावा किया कि पोनमुडी ने 1996-2001 तक राज्य सरकार में मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अवैध संपत्ति अर्जित की थी। उस वक्त पोनमुडी खान और खनिज मंत्री थे।
28 जून 2023 को वेल्लोर की एक प्रमुख सत्र अदालत ने पोनमुडी और उनकी पत्नी को मामले में यह कहते हुए बरी कर दिया था कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त सबूत पेश करने में विफल रहा है।
वेल्लोर के प्रधान जिला न्यायाधीश एन वसंतलीला ने सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय द्वारा दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले में पोनमुडी और उनकी पत्नी को बरी कर दिया था।
मद्रास हाई कोर्ट ने जून-2023 में वेल्लोर की एक अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद आय से अधिक संपत्ति के मामले में के पोनमुडी और उनकी पत्नी को बरी करने के फैसले पर स्वत संज्ञान लेते हुए अगस्त-2023 में पुनर्विचार करने का फैसला किया। जिसके बाद हाई कोर्ट उन्हें दोषी पाया है और सजा सुनाई है।












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