Tamil Nadu Election: टूटे पिछले 2 रिकॉर्ड, 84% से ज्यादा वोटिंग, AIADMK Vs DMK में किसकी बन रही सरकार?
Tamil Nadu Election 2026: तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों पर वोटिंग खत्म होते ही पूरे राज्य में जश्न जैसा माहौल छा गया। भारत निर्वाचन आयोग (EC) के मुताबिक, शाम 6 बजे तक 84.29% से ज्यादा मतदान दर्ज हुआ, जो न सिर्फ 2011 के 78.29% रिकॉर्ड को तोड़ गया, बल्कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में तमिलनाडु का अब तक का सबसे ऊंचा टर्नआउट है। कुल 5.73 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से करीब 4.78 करोड़ ने वोट डाले।
करूर जिले ने 91.86% के साथ टॉप किया, जबकि चेन्नई में 83.09%, मदुरै में 80.15%, कोयंबटूर में 84.40% और तिरुचिरापल्ली में 85.04% मतदान हुआ। CM एमके स्टालिन की कोलाथुर सीट पर 85.63% और उप-CM उदयनिधि स्टालिन की चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी सीट पर 83.58% वोटिंग दर्ज की गई। AIADMK चीफ एडापड्डी के. पलानीस्वामी की एडापड्डी सीट पर तो 91.61% पहुंच गया। अभिनेता विजय (TVK) की तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट पर 81.55% और पेरम्बूर पर 89.20% वोट पड़े।

यह रिकॉर्ड टर्नआउट सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। 2021 में 6.29 करोड़ मतदाता थे और टर्नआउट करीब 73-74% था। इस बार 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के बाद मतदाता सूची घटकर 5.73 करोड़ रह गई, फिर भी 84% से ज्यादा वोटिंग ने साबित कर दिया कि युवा, महिलाएं और पहले बार वोट डालने वाले भारी संख्या में निकले।
2011 Vs 2021 Vs 2026: Turnout की तुलना समझें

- 2011: 78.29% टर्नआउट = AIADMK की भारी जीत (जयललिता युग)।
- 2021: करीब 73.63% = DMK की वापसी, स्टालिन सरकार।
- 2026: 84.29%+ = तीन-तरफा जंग में रिकॉर्ड।
2021 की तुलना में इस बार सिर्फ 9 लाख अतिरिक्त वोट पड़े, लेकिन प्रतिशत में भारी उछाल आया। SIR के बाद सूची साफ होने से टर्नआउट का प्रतिशत ऊंचा दिख रहा है, लेकिन वास्तविक भागीदारी ने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए।
मैदान में कौन-कौन? उम्मीदवारों की संख्या और गठबंधन
2026 का चुनाव तीन-तरफा बन गया है। कुल 4,023 उम्मीदवार मैदान में हैं। पार्टी-वार उम्मीदवारों का बंटवारा इस तरह-
- DMK-नेतृत्व वाला Secular Progressive Alliance (SPA): DMK ने करीब 164-176 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। कांग्रेस, VCK, CPI(M) आदि सहयोगी बाकी सीटों पर। स्टालिन परिवार (स्टालिन, उदयनिधि) समेत 28 मंत्रियों को फिर टिकट मिला। फोकस: 'द्रविड़ मॉडल', कल्याण योजनाएं और 'दिल्ली vs तमिलनाडु' का नारा।
- AIADMK-नेतृत्व वाला NDA: AIADMK ने 169-178 सीटों पर दांव लगाया (सबसे ज्यादा)। सहयोगी: BJP (27 सीटें), PMK (18), AMMK (11) आदि। EPS (पलानीस्वामी) को मुख्य चेहरा बनाया गया। फोकस: भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और DMK की 'असफलताएं'।
- TVK (तमिलगा वेट्री कजगम - विजय की पार्टी): पूरी तरह अकेले। 234 सीटों पर उम्मीदवार। विजय खुद पेरम्बुर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट से लड़ रहे। 24 महिला उम्मीदवार। फोकस: युवा, बदलाव और 'दोनों द्रविड़ पार्टियों से मुक्ति'।
- अन्य: NTK ने भी 234 सीटों पर लड़ा।
BJP का स्टैंड: 27 सीटों पर दांव
BJP ने AIADMK के साथ NDA बनाकर 27 सीटों पर चुनाव लड़ा (माइलापुर, कोयंबटूर नॉर्थ जैसी अहम सीटें शामिल)। अमित शाह और BJP नेताओं ने EPS के साथ गठबंधन को सील किया। BJP का एजेंडा रहा कि हिंदुत्व, राष्ट्रीय एकता और 'द्रविड़ पार्टियों की अलगाववादी सोच' पर हमला। DMK ने BJP को 'राज्य को बांटने वाली ताकत' बताया और चेतावनी दी कि AIADMK-BJP गठबंधन तमिलनाडु को J&K जैसा बना सकता है। BJP के लिए यह चुनाव तमिलनाडु में पैर जमाने का बड़ा मौका है।
चुनावी गणित: कौन बनाएगा सरकार?
- DMK-SPA: सत्ता में है, कल्याण योजनाओं और द्रविड़ पहचान पर भरोसा। हाई टर्नआउट अगर DMK समर्थकों (विशेषकर ग्रामीण-दक्षिण) का हो तो फायदा।
- AIADMK-NDA: 2021 में हार के बाद वापसी की कोशिश। BJP का साथ मिलने से हिंदू वोट और कुछ क्षेत्रों में अतिरिक्त ताकत। लेकिन TVK के आने से वोट बंट सकता है।
- TVK: तीसरा मोर्चा। विजय की स्टार पावर युवाओं को आकर्षित कर रही है। अगर TVK 15-20% वोट काट ले तो दोनों बड़े गठबंधनों को नुकसान। विशेषकर शहरों और युवा बहुल इलाकों में।
हाई टर्नआउट का मतलब: युवा मतदाताओं (14.6 लाख फर्स्ट-टाइम वोटर) का भारी निकलना। 2011 की तरह अगर सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी) चली तो AIADMK-NDA को फायदा, लेकिन TVK ने समीकरण बिगाड़ दिए। नतीजे 4 मई को आएंगे।
क्यों मायने रखता है यह टर्नआउट?
तमिलनाडु में दशकों से DMK बनाम AIADMK का द्वंद्व चला आ रहा था। TVK के आने से पहली बार असली त्रिकोणीय लड़ाई बनी। BJP का NDA में शामिल होना 'द्रविड़ vs हिंदुत्व' का मुकाबला बना रहा। रिकॉर्ड वोटिंग ने साबित किया कि तमिलनाडु की जनता राजनीति में बेहद सक्रिय है कि चाहे वो स्टालिन का 'द्रविड़ मॉडल' हो, EPS-BJP का 'विकास' हो या विजय का 'नया विकल्प'।
अभी नतीजों का इंतजार है, लेकिन एक बात पक्की है कि 84% से ज्यादा टर्नआउट ने लोकतंत्र की जीत दर्ज कराई। अब देखना होगा कि यह ऊंची भागीदारी किसके पक्ष में जाती है। सत्ता बरकरार रखने वाले DMK के, या कमबैक करने वाले AIADMK-NDA के या बाधा डालने वाला TVK के?
तमिलनाडु का यह चुनाव सिर्फ 234 सीटों का नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की राजनीति के भविष्य का भी है। 4 मई को जब नतीजे आएंगे, तो तय होगा कि अगली सरकार किसकी बनेगी और तमिलनाडु की राजनीति कितनी बदल चुकी है।












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