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हौसले की मिसाल, संकल्प से सिद्धि : डॉक्टर बनने की राह पर 55 वर्षीय किसान, 38 साल पहले छूटी थी मेडिकल की पढ़ाई

32 साल पहले छूटी मेडिकल की पढ़ाई। अब बेटे को बनाया इंस्पीरेशन। 55 साल की उम्र में दी NEET परीक्षा। कहा- फिजिक्स और केमेस्ट्री के सवाल आसान लगे। 460 से अधिक नंबर मिलने का यकीन। क्या पूरा होगा डॉक्टर बनने का सपना ?

चेन्नई, 19 जुलाई : दिवंगत कवि कुंवर बेचैन की कविता का एक अंश है, '...क्यों हथेली की लकीरों से हैं आगे उंगलियां, रब ने भी किस्मत से आगे आपकी मेहनत रखी...' उन्होंने इस काव्यांश में इंसान की मेहनत के महत्व का चित्रण किया है। हिंदी कविता से कोसों दूर दक्षिण भारत में शायद ऐसी ही किसी बात से इंस्पायर होकर एक पिता ने 55 साल की आयु में NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षा (Rajyakkodi of Madurai NEET) में अपीयर होने का फैसला लिया है। पिता का कहना है कि वह अपने बेटे से प्रेरित होकर नीट परीक्षा पास करने का प्रयास कर रहे हैं।

1984 में छूटी पढ़ाई

1984 में छूटी पढ़ाई

तमिलनाडु के मदुरै में रहने वाले 55 वर्षीय किसान राज्याक्कोडी (Rajyakkodi) बेटे से प्रेरित होकर मेडिकल में दाखिले के लिए होने वाली परीक्षा NEET में अपीयर होना चाहते हैं। पैसों की तंगी के कारण 38 साल पहले परीक्षा पास होने के बावजूद राज्याक्कोडी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई नहीं कर सके थे। उन्होंने बताया कि 1984 में दाखिले के बाद फीस जमा नहीं कर सके जिस कारण उन्हें कोर्स ज्वाइन नहीं करने दिया गया।

डॉक्टर बनने का सपना

डॉक्टर बनने का सपना

मदुरै के अंबट्टैयनपट्टी में रहने वाले 55 साल के राज्यक्कोडी जब रविवार को वेलाम्मल विद्यालय सेंटर (Velammal Vidyalaya Centre) पर राष्ट्रीय प्रवेश पात्रता परीक्षा (NEET) देने पहुंचे। डॉक्टर बनने का उनका सपना और इसे हासिल करने का संघर्ष उनकी आंखों के सामने तैर गया।

सपनों के आड़े आई पैसों की कमी

सपनों के आड़े आई पैसों की कमी

NEET परीक्षा देने पहुंचे 55 साल के राज्यक्कोडी को सुरक्षा गार्डों ने अधिक एज होने के कारण एंट्री प्वाइंट पर रोका। जब उन्होंने NEET का हॉल टिकट दिखाया, तो वहां मौजूद युवा उम्मीदवारों और उनके माता-पिता के चेहरों पर अविश्वास और श्रद्धा दिखी। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार परिवार की आर्थिक तंगी के कारण राज्यक्कोडी को आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज में फिजिक्स में बी.एससी की पढ़ाई चुननी पड़ी। वे बताते हैं कि बीएसएसी का कोर्स पूरा करने में भी पैसे आड़े आ गए। उसिलमपट्टी (Usilampatti) के पासुमपोन थेवर आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज (Pasumpon Thevar Arts and Science College) में उन्हें पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ी।

मीलों दूर की Success से मिली प्रेरणा

मीलों दूर की Success से मिली प्रेरणा

वक्त के थपेड़ों और पढ़ाई अधूरी छूटने के बावजूद राज्याक्कोडी ने हौसला नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि उनके अंदर मेडिकल की पढ़ाई का शौक पलता रहा। ये आग दशकों बाद फिर से जल उठी जब उन्होंने सुना कि ओडिशा का 64 वर्षीय व्यक्ति पिछले साल एक मेडिकल कॉलेज में सीट हासिल करने में कामयाब रहा।

बेटे वासुदेवन भी करते हैं प्रेरित

बेटे वासुदेवन भी करते हैं प्रेरित

राज्याक्कोडी ने कहा, ओडिशा के 64 वर्षीय नीट एस्पिरेंट की सफलता से मिली प्रेरणा के बाद उन्हें अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रतिदिन कम से कम तीन घंटे समर्पित करने का साहस मिला। उन्होंने बताया कि छोटे बेटे आर वासुदेवन भी उन्हें इंस्पायर करते हैं। बकौल राज्याक्कोडी वासुदेवन ने NEET के दूसरे ही प्रयास में 521 अंक हासिल किए। उसे कुड्डालोर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में एडमिशन मिला। उन्होंने बेटे के स्टडी मैटेरियल का इस्तेमाल किया और पिछले एक साल में परीक्षा की तैयारी के दौरान कई मॉक टेस्ट भी दिए।

आसान लगे विज्ञान के सवाल

आसान लगे विज्ञान के सवाल

55 वर्षीय राज्याक्कोडी कहते हैं कि रविवार को हुई परीक्षा के दौरान उन्हें भौतिकी और रसायन विज्ञान के प्रश्न आसान लगे। उन्होंने कहा कि वे 460 से अधिक अंक हासिल करने की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में अगर उन्हें किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिलती है तो वह अपने सपने को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

जीतने वाले अलग काम नहीं करते...

जीतने वाले अलग काम नहीं करते...

राज्याक्कोडी की लगन बताती है कि कुछ कर गुजरने का जज्बा और लगन हो तो सफलता पाई जा सकती है। उन्होंने आशंकाओं को धता बताते हुए 38 साल तक खुद के भीतर की चिंगारी जलाए रखी। राज्याक्कोडी ने इस कथन को भी चरितार्थ किया, जिसमें मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा ने कहा है, 'जीतने वाले कोई अलग काम नहीं करते, वे हर काम अलग तरीके से करते हैं। यदि राज्याक्कोडी NEET में सफल होते हैं तो उनकी सफलता युवाओं को भी जरूर इंस्पायर करेगी, इसमें कोई दो राय नहीं।

38 साल बाद फिर शुरु हुआ सफर

38 साल बाद फिर शुरु हुआ सफर

कहना गलत नहीं होगा कि पौराणिक कथाओं के अमर चरित्र भगवान राम ने भी कभी इसी धरती (तमिलनाडु के रामेश्वरम) से राम ने समंदर की लहर पर बांध साधा था। लंका जाने के के लिए 100 योजन की अथाह जलराशि पर पुल बनाने का अभूतपूर्व उपक्रम करने वाले पुरुषोत्तम राम आज भी घर-घर में गाए जाते हैं। ऐसे में अतिश्योक्ति नहीं होगी कि पौराणिक चरित्र राम और आधुनिक युग में मिसाइल मैन डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जैसे व्यक्तित्व की धरती से जुड़े 55 साल के किसान राज्याक्कोडी 38 साल बाद भी डॉक्टर बनने का सपना देख रहे हैं। NEET की परीक्षा देने वाले राज्याक्कोडी पीढ़ियों को प्रेरित करने वाले किरदार हैं। सपने पूरे करने की शुभकामनाएं राज्याक्कोडी...

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