वो मारते हैं....लड़कियों की आंखें निकाल कुत्तों को खिलाता है शव, महिला ने बयां किया तालिबान की क्रूरता का सच
नई दिल्ली। अफगानिस्तान के इतिहास ने एक बार फिर से खुद को दोहराया है। 20 सालों के बाद फिर से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है। तालिबान के लड़कों का आतंक सामने आने लगा है। सड़कों पर खून खराबा, लोगों की हत्या, महिलाओं के साथ दरिंदगी की घटनाएं सामने आने लगी है। तालिबान के अत्याचार की बेइंतहां क्या है इसका खुलासा अफगानिस्तान की उस महिला ने किया, जिसे तालिबान के लड़ाकों ने गोली मार दी थी। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानी महिला ने तालिबान की क्रूरता का चेहरा सामने ला दिया है।

महिलाओं को नहीं समझा जाता इंसान
न्यूज 18 ने अफगानिस्तान की रहने वाली 33 साल की खतेरा के साथ बातचीत की, जो सच खतेरा ने सामने बयां किया वो रोंगटे खड़े कर देने वाला था। तालिबानी किस तरह से क्रूरता की हद को पार कर जाते हैं, महिला ने जब आपबीती सुनाई को लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। खतेरा ने कहा कि तालिबानी महिलाओं को इंसान नहीं समझते, उनके लिए महिलाएं सिर्फ एक मांस का पुतला है। 33 साल की खटेरा ने अपने साथ हुई क्रूरता का दर्द बयां किया, जो पढ़कर आपका दिल दहल जाएगा। खटेरा ने बताया कि उसके पिता तालिबान के पूर्व लड़ाके थे। तालिबानियों ने उनपर हमले की साजिश रची। खटेरा अफगानिस्तान की पुलिस विभाग में तैनात थी।

तालिबान के लड़ाकों ने मारी गोली
खतेरा ने बताया कि अपने शहर गजनी में जब वो घर लौट रही थी तो रास्ते में तालिबानी लड़ाकों ने उन्हें रोका, उनकी आईडी चेक की और फिर उनपर गोलियां चला दी। उस वक्त वो गर्भवती थी। खतेरा ने काफी मिन्नतें की, लेकिन खुद को उन लड़ाकों से बचा नहीं सकीं। तालिबानियों ने उनपर ताबड़तोड़ गोलियां बसरा दी, उनके शरीर के ऊपरी हिस्से में 8 गोलियां लगी थी। तालिबानियों की क्रूरता वहीं नहीं रूकी। उसक शरीर पर चाकू से कई घाव किए गए, इसके बाद भी उन लड़ाकों को दया नहीं आई, लोगों के मन में खौफ पैदा करने के लिए उन्होंने खतेरा की दोनों आंखें निकाल लीं और उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया, लेकिन किस्मत से वो जिंदा बच गईं, जिसके बाद वो अपनी पति और बच्चे के साथ भागकर दिल्ली आ गई, जहां वो अपनी आंखों का इलाज करवा रही है।

कुत्तों को खिलाते हैं महिलाओं का मांस
अपने ऊपर हुए जुल्मों को याद करते हुए खतेरा कहती हैं कि तालिबान की नजर में महिलाएं इंसान नहीं है। वो सिर्फ एक मांस का टुकड़ा है, जिसके साथ वो जो चाहे वो कर सकते हैं। तालिबान महिलाओं को प्रतारित करता है और दूसरों के मन में खौफ भरने के लिए उनके साथ क्रूरता की हद को पार कर जाता है। महिलाओं के साथ दरिंदगी की जाती है और फिर उन्हें चौराहे से लटका दिया जाता है। कभी उनके शवों को कुत्तों को खिला देत हैं।

कल्पना करके भी डर जाती हूं
खतेरा कहती है कि तालिबान के खौफ के बारे में सोचकर मैं डर जाती हूं। उनके अधीन महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों की जिंदगी नरक से भी बदतर है। वहां महिलाओं को पुरुष डॉक्टरों से इलाज की इजाजत नहीं है। न तो उन्हें पढ़ने की आजादी है और न काम करने की इजाजत। वहां महिलाएं मरने को मजबूर हैं। वहां अब महिलाएं अपने पढ़ाई के दस्तावेजों को जला रही हैं, ताकि किसी भी तरह का सबूत तालिबानियों को न मिले।
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