मिस्‍टर केजरीवाल, आप सबको भ्रष्‍ट बताकर साबित क्‍या करना चाहते हैं?

Taking names: Okay Mr Arvind Kejriwal, everyone but you is Taking names: Okay Mr Arvind Kejriwal, everyone but you is corrupt
नई दिल्ली। शुक्रवार को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्ट नेताओं की लिस्ट जारी करके एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अरविंद केजरीवाल ने अपनी लिस्ट में जिन लोगों का नाम शामिल किया है

उनके नाम हैं राहुल गांधी, सुशील कुमार शिंदे, प्रफुल्‍ल पटेल, वीरप्‍पा मोइली, सलमान खुर्शीद, मुलायम सिंह यादव, श्री प्रकाश जयसवाल, जगन मोहन रेड्डी, अनुराग ठाकुर, कपिल सिब्‍बल, शरद पवार, पी चिदंबरम, कणिमोड़ी, सुरेश कलमाड़ी, नवीन जिंदल, ए राजा, पवन कुमार बंसल, नितिन गडकरी, बीएस येदियुरप्‍पा, अनंत कुमार, कुमारस्‍वामी, अलागिरी, जीके वासन, मायावती, अनू टंडन, फारुख अब्‍दुल्‍ला।

जिसके बाद राजनैतिक गलियारों में खलबली मच गयी है, लोकसभा चुनाव के ठीक पहले इस तरह से नेताओं के नामों का सामने आना हर किसी को बेचैन कर गया है। फारूख अब्दुल्ला जैसे नेता ने तो सीधे पर कहा है कि अब इस मसले पर वह केजरीवाल को कोर्ट में घसीटेंगे।

लेकिन जहां केजरीवाल के इस बेबाक कदम से लोग हैरान रह गये हैं वहीं दूसरी ओर के़जरीवाल भी जनता से सवालों के घेरे में हैं। लोगो का कहना है कि केजरीवाल ने सत्ता में आने से पहले और राजनीति का जामा पहनने के बाद भी बार-बार कांग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार वाला राग अलापा और बाद में सरकार बनाने के लिए उन्होंने वही भ्रष्ट कांग्रेस का हाथ थाम लिया।

जंतर-मंतर के मंच और अपने चुनावी प्रचार में केजरीवाल ने कहा था कि वह दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित को जेल पहुंचा कर ही दम लेंगे लेकिन सरकार बनने के एक महीने बाद भी केजरीवाल तो क्या उनकी पार्टी के किसी भी विधायक ने शीला दीक्षित के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद नहीं की, क्यों?

यही नहीं अरविंद केजरीवाल ने अपनी लिस्ट में बेईमान मायावती और मुलायम को भी कहा है जिनमें से दोनों ही गण यूपी की सत्ता में रह चुके हैं और अपनी-अपनी जाति क्षेत्र में किसी मसीहा से कम नहीं आंके जाते हैं। मुलायम जहां यदुवंशी लोगों के राजा हैं तो मायावती भी दलित लोगों के लिए महारानी से कम नहीं है।

ऐसे में केजरीवाल की ओर से बार-बार चिल्लाने से ही दोनों लोग भ्रष्टाचारी साबित तो नहीं हो जाते हैं, केजरीवाल ने दावा किया है कि जिन लोगों को उन्होंने भ्रष्ट करार दिया है, उन सभी के खिलाफ उनके पास पर्याप्त सबूत है।

अगर उनके पास वाकई सबूत है तो उन्हें तुरंत पुलिस के पास जाना चाहिए लेकिन वह पुलिस में जाने के बजाय प्रेसवार्ता करके सुर्खियां बटोर रहे है, लोगों का कहना है कि केजरीवाल ज्यादा से ज्यादा अटेंशन पाने के लिए इस तरह की प्रेस वार्ता करते हैं। और दिल्ली के मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका कर अपनी ओर खींचने के लिेए अरविंद ने ऐसा किया है।

फिलहाल अरविंद केजरीवाल का यह कदम अगर नेताओँ के भ्रष्ट रूप को उजागर करता है तो यह अरविंद केजरीवाल को भी कई सवालों के घेरे में खड़ा करता है क्योंकि उनका यह यूनिक कदम लोगों के दिमाग में कई सवालों को जन्म दे रहा है। आपकी क्या राय है?

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