Tahawwur Rana: आसान नहीं था तहव्वुर का भारत आना? इसके पीछे किसका है दिमाग? ऑपरेशन राणा को किसने दिया अंजाम?
Tahawwur Rana: साल 2008 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया जा रहा है। यह प्रत्यर्पण भारत के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि 26/11 के ये हमले देश के इतिहास के सबसे भयावह आतंकवादी हमलों में से एक थे।
इस रिपोर्ट में आपको पाकिस्तानी-कैनेडियन व्यवसायी और पूर्व सैन्य डॉक्टर तहव्वुर हुसैन राणा को भारत लाने का पूरा सीक्रेट प्लान बताते हैं।

2011 में चार्जशीट दाखिल की
2008 मुंबई आतंकी हमले के बाद NIA ने तहव्वुर राणा, डेविड हेडली समेत 9 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें आतंकवाद, हत्या, देश के खिलाफ साजिश, और विदेशी ताकतों के साथ मिलकर भारत पर हमला करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए।
वहीं मुंबई आतंकी हमले में तहव्वुर राणा की संलिप्तता के आधार पर अमेरिका से उसका प्रत्यर्पण (Extradition) मांगा था। इसमें सबसे अहम भूमिका NIA ने निभाई।
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राणा के प्रत्यर्पण के लिए NIA ने ठोस सबूत पेश किए
- NIA ने राणा और हेडली के बीच की कॉल डिटेल्स, मेल्स, फर्जी दस्तावेज़ों, फेक ऑफिस, और भारत दौरे की जानकारी जुटाकर एक प्रामाणिक केस बनाया।
- भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि (1997) के तहत अमेरिका को विधिवत प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा।
- NIA की स्पेशल कोर्ट ने राणा के खिलाफ ग़ैर-जमानती वारंट जारी किए और पाकिस्तान को कई लेटर्स रोगेटरी (जांच अनुरोध पत्र) भेजे-हालांकि पाकिस्तान से कोई जवाब नहीं आया।
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RAW की वो चाल, जिसने अमेरिका को झुका दिया!
भारत की विदेशी खुफिया एजेंसी RAW (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) ने इस केस में बैकएंड ऑपरेशन में बड़ा रोल निभाया
- हेडली और राणा की गतिविधियों पर लंबे समय तक नजर रखी
- RAW ने अमेरिका और अन्य विदेशी एजेंसियों के साथ मिलकर साइबर ट्रैफिक, कॉल रिकॉर्ड्स और फाइनेंशियल नेटवर्क्स को ट्रेस किया।
- ISI और लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क की गहराई से जांच कर भारत सरकार को रिपोर्ट सौंपी।
- RAW की इनपुट पर ही भारत सरकार ने अमेरिकी प्रशासन से राणा का प्रत्यर्पण मांगने का निर्णय लिया।
FBI से RAW तक: तहव्वुर राणा की गिरफ्तारी का गेम चेंजर ऑपरेशन!
- 2009: तहव्वुर राणा को FBI ने शिकागो से गिरफ्तार किया।
- 2011: अमेरिका की अदालत ने उसे डेनमार्क हमले की साजिश में दोषी पाया, लेकिन 26/11 में बरी कर दिया गया।
- 2020: सजा समय से पहले पूरी होने पर भारत ने फिर प्रत्यर्पण का अनुरोध किया।
- 2023: कैलिफ़ोर्निया की अदालत ने 48 पन्नों के आदेश में प्रत्यर्पण को "वाजिब और न्यायोचित" बताया।
- 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 फरवरी 2025 को पीएम नरेंद्र मोदी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में आधिकारिक रूप से राणा के प्रत्यर्पण की घोषणा की।
PM मोदी की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति का असर
NIA और RAW की राजनीति की बदौलत भारत एक बार फिर 26/11 जैसे घिनौने हमले के मुख्य साजिशकर्ता को कटघरे में लाने में कामयाब हुआ है। यह केवल कानून का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की एक बड़ी जीत है।
दरअसल, पीएम मोदी के सत्ता में आते ही आतंकी हमलों पर 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति शुरू हो गई थी। तभी से सरकार ने 26/11 जैसे मामलों में न सिर्फ कड़े कदम उठाए, बल्कि दोषियों को पकड़ने के लिए इंटरनेशनल स्तर पर मोर्चा खोल दिया।












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