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Mumbai Attack: तहव्वुर राणा आया भारत, हेडली अब भी US जेल में क्यों? क्या हुई डील? जानें 'तोते-बिल्ली' की कहानी

Mumbai Attack Update: 17 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत को 26/11 मुंबई हमले और 166 से ज्यादा मौतों का मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन राणा (Tahawwur Rana Extradition) मिल गया। गुरुवार, 10 अप्रैल 2025 शाम 6:15PM राणा को विमान से अमेरिका से भारत लाया गया। दिल्ली के पालम टेक्निकल एयरपोर्ट पर लैंड हुआ। मीडिया में खलबली मची, सुरक्षा एजेंसियों की चौकसी बढ़ी।

लेकिन इसके साथ ही एक और सवाल गूंज उठा - उसका बचपन का दोस्त और मास्टरमाइंड डेविड कोलमैन हेडली उर्फ ​​दाउद गिलानी (David Coleman Headley) कहां है? उसे भारत क्यों नहीं सौंपा गया? क्या अमेरिका ने एक 'डील' के तहत राणा को सौंपा और हेडली को अपने पास रखा? क्या पाकिस्तान के 'तोते' राणा को आगे करके अमेरिका ने तगड़ा गेम खेला? क्या कोई डील हुई है? आइए जानते हैं....

Tahawwur Rana Extradition Update

राणा और हेडली: 'तोते' और 'बिल्ली' की आतंकी जोड़ी

तहव्वुर राणा, एक पूर्व पाकिस्तानी मिलिट्री डॉक्टर, बाद में कनाडा का नागरिक बना, और 2008 मुंबई हमलों की लॉजिस्टिक सपोर्ट टीम का हिस्सा बना। उसका बचपन का दोस्त डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाउद गिलानी, पाकिस्तान और अमेरिका में पला-बढ़ा, जिसने मुंबई में रेकी की और हमलों के टारगेट तय किए। एक ने प्लानिंग में मदद की, दूसरा सीन में जाकर हर चीज की मिनट-टू-मिनट तैयारी करता रहा। राणा ने हेडली को बिज़नेस कवर दिया। इसी आधार पर लश्कर-ए-तैयबा ने हमला प्लान किया।

हेडली की 'डील' ने उसे बना दिया अमेरिका का 'एसेट'!

2009 में शिकागो एयरपोर्ट से गिरफ्तार हुए हेडली ने अमेरिकी जांच एजेंसियों के साथ एक डील की। उसने ISI और लश्कर-ए-तैयबा के राज खोले। शर्त रखी - भारत को नहीं सौंपा जाएगा। अमेरिका ने डील मंजूर की और हेडली को 35 साल की सजा सुनाई गई, लेकिन भारत में ट्रायल नहीं हुआ। यानी अमेरिका ने उसे "स्टेट एसेट" बना दिया - जो राज खोले, लेकिन भारत की अदालत तक न पहुंचे।

राणा को क्यों सौंपा गया? भारत का फोकस क्यों?

तहव्वुर राणा की भूमिका पर अमेरिका को पहले से शक था, लेकिन साक्ष्य उतने भारी नहीं थे। भारत ने कूटनीतिक दबाव डाला। प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया के बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी। भारत को उम्मीद है कि तहव्वुर राणा के जरिए, 26/11 केस में अंतरराष्ट्रीय न्याय का चेहरा मजबूत होगा। पाकिस्तान की भूमिका को लेकर और सबूत जुटाए जा सकेंगे हेडली द्वारा दी गई जानकारी को राणा से क्रॉस वेरिफाई किया जा सकेगा।

अब राणा से क्या हासिल करना चाहता है भारत?

राणा का ट्रायल सिर्फ सजा के लिए नहीं, बल्कि हेडली द्वारा दी गई जानकारियों की पुष्टि करना है। लश्कर और ISI के नए लिंक तलाशना है। पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब करना है।

राणा की जगह कौन-सी जेल?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तहव्वुर राणा को मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा जा सकता है। वहीं, जहां कभी कसाब को 'अंडा सेल' में रखा गया था, लेकिन फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

भारत का मकसद सिर्फ सजा नहीं, इंटरनेशनल मैसेज भी

भारत सिर्फ राणा को सजा दिलवाना नहीं चाहता, बल्कि पाकिस्तान की साजिश की परतें दुनिया के सामने लाना चाहता है। 26/11 जैसे हमलों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना चाहता है। आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की अपनी नीति को साबित करना चाहता है।

डील के पीछे की रणनीति?

राणा को भारत भेजना और हेडली को जेल में रखना - ये अमेरिका की संतुलित चाल हो सकती है। एक ओर वो भारत को न्याय देने की कोशिश करता है, दूसरी ओर अपने 'डील किए हुए एसेट' को सुरक्षित रखता है। अब राणा से पूछताछ, ट्रायल और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर जो खुलासे होंगे, वो इस केस की दिशा तय करेंगे। लेकिन एक बात तय है - पाकिस्तान के तोते को भारत लाना जितना जरूरी था, बिल्ली डेविड को आज़ाद छोड़ना उतना ही खतरनाक है।

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