Swaraj Kaushal Caste: किस जाति के थे सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल? परिवार में कौन-कौन? पढ़ें सफरनामा
Swaraj Kaushal Death: भारत के पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पति और नई दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज के पिता स्वराज कौशल का 4 दिसंबर को 73 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनका नाम भले ही सियासी गलियारों में अक्सर सुषमा स्वराज के साथ जुड़कर लिया जाता रहा हो, लेकिन स्वराज कौशल की अपनी पहचान बेहद ऊंची और दमदार रही।
स्वराज कौशल न सिर्फ देश के नामचीन सुप्रीम कोर्ट वकील थे, बल्कि सबसे कम उम्र के राज्यपाल, एडवोकेट जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता बनने का रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज है। ऐसे में आइए नजर डालते हैं उनके सफरनामा और पारिवारिक बैकग्राउंड के बारे में।

🟡 Swaraj Kaushal Caste: किस जाति से आते थे स्वराज कौशल? क्या था पारिवारिक बैकग्राउंड?
स्वराज कौशल जाति से ब्राह्मण थे। उनका जन्म 12 जुलाई 1952 को उस वक्त के पंजाब, वर्तमान हिमाचल प्रदेश के सोलन में हुआ था। उनके पिता का नाम मदन लाल और माता का नाम लाज्यावती था। एक साधारण ब्राह्मण परिवार में जन्मे स्वराज कौशल ने अपनी मेहनत और काबिलियत से देश की राजनीति और न्यायपालिका में खास मुकाम हासिल किया।
🟡 शिक्षा से सुप्रीम कोर्ट तक की उड़ान
स्वराज कौशल की शुरुआती पढ़ाई सोलन में ही हुई। इसके बाद उन्होंने डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ से बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ की लॉ फैकल्टी से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। वकालत में उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि 34 साल की उम्र में ही उन्हें देश का सबसे कम उम्र का एडवोकेट जनरल बनाया गया।

🟡 इमरजेंसी में जॉर्ज फर्नांडिस का केस और मिजोरम शांति समझौता
1975 की इमरजेंसी के दौरान स्वराज कौशल ने चर्चित बड़ौदा डायनामाइट केस में समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस का बचाव किया। यही नहीं, वे भूमिगत मिजो नेता लालडेंगा के कानूनी सलाहकार भी रहे। भारत सरकार और मिजो नेशनल फ्रंट के बीच लंबे समय तक चली बातचीत के बाद 1986 में हुआ मिजोरम शांति समझौता, जिसे लिखने में स्वराज कौशल की बड़ी भूमिका रही। इसी समझौते ने 20 साल के उग्रवाद का अंत किया।
🟡 देश के सबसे युवा राज्यपाल बनने का रिकॉर्ड
1987 में उन्हें मिजोरम का पहला एडवोकेट जनरल नियुक्त किया गया। इसके ठीक तीन साल बाद 1990 में वे 37 साल की उम्र में मिजोरम के राज्यपाल बने और देश के सबसे युवा गवर्नर का रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज हो गया। वे 1993 तक इस पद पर रहे।
🟡 राज्यसभा से संसद तक का सफर
1998 में स्वराज कौशल हरियाणा विकास पार्टी से राज्यसभा सांसद बने। 1998 से 2004 तक उन्होंने संसद में हरियाणा का प्रतिनिधित्व किया। वे कानून, पूर्वोत्तर भारत और उग्रवाद जैसे विषयों के बड़े जानकार माने जाते थे। 1986 में ही उन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता की उपाधि भी दी जा चुकी थी, जो किसी भी वकील के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

🟡 सुषमा स्वराज से प्रेम, विचारधाराएं अलग लेकिन रिश्ता अटूट
स्वराज कौशल और सुषमा स्वराज की प्रेम कहानी कॉलेज के दिनों में शुरू हुई थी, जब दोनों दिल्ली में कानून की पढ़ाई कर रहे थे। सुषमा स्वराज आरएसएस से जुड़ी पृष्ठभूमि से थीं, जबकि स्वराज कौशल समाजवादी विचारधारा के समर्थक थे। विचारधाराएं अलग थीं, लेकिन प्यार ने दोनों को जोड़ दिया।
13 जुलाई 1975 को, ठीक इमरजेंसी के दौर में, दोनों ने शादी कर ली। यह शादी आसान नहीं थी, दोनों परिवारों की तरफ से विरोध हुआ। सुषमा स्वराज हरियाणा के पारंपरिक परिवार से थीं, लेकिन उन्होंने हर बाधा को पार कर अपने फैसले पर कायम रहीं।
🟡 बेटी बांसुरी स्वराज और पारिवारिक जीवन
स्वराज कौशल और सुषमा स्वराज की इकलौती संतान बांसुरी स्वराज हैं, जो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ी हैं और इनर टेम्पल से बैरिस्टर हैं। मौजूदा समय में वे नई दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद हैं। सुषमा स्वराज का 6 अगस्त 2019 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। पत्नी के निधन के बाद स्वराज कौशल काफी समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे। अब स्वराज कौशल के जाने के बाद अब बांसुरी स्वराज अकेली पड़ गई हैं। 41 साल की बांसुरी स्वराज ने अब तक शादी नहीं की है।
🟡 एक युग का अंत
स्वराज कौशल सिर्फ सुषमा स्वराज के पति नहीं थे, बल्कि वे खुद एक मजबूत पहचान थे। सुप्रीम कोर्ट से लेकर राजभवन तक, उग्रवाद से लेकर संसद तक, उन्होंने हर मोर्चे पर देश को दिशा दी। ब्राह्मण परिवार में जन्मा यह वकील, राज्यपाल और सांसद अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गया है, जो लंबे समय तक याद की जाएगी।












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