स्वरा भास्कर ने RSS के लोगों के लिए किया आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल, बोलीं- इनका दिल बिल्कुल खाली
नई दिल्ली, 06 जुलाई। फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं। वह अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर अपनी राय लोगों के बीच रखती हैं। इसके साथ ही वह मोदी सरकार और आरएसएस पर भी अक्सर निशाना साधती हैं। एक बार फिर से स्वरा ने आरएसएस पर निशाना साधते हुए संघ के लिए ऐसे शब्द का इस्तेमाल किया है जिसके लिए उनकी काफी आलोचना हो रही है। स्वरा भास्कर ने संघ पर निशाना साधते हुए संघ के लोगों को नीच तक कह दिया है। स्वरा के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर वह चौतरफा घिर गई हैं।

संघ के लोगों को बताया नीच
स्वरा भास्कर ने ट्वीट करके लिखा, मैं अबतक जितने लोगों से मिली हूं उसमे संघ के लोग सबसे नीच हैं। फिर चाहे यह किसी फिल्म स्टार जोड़े की बात हो, उसके जन्म या फिर उसके बच्चे का नाम। एक अस्सी साल के मानवाधिकार कार्यकर्ता की न्यायिक हिरासत में मौत का मामला हो, ये संघी कभी भी यह बताने से नहीं चूकते हैं कि उनका दिल कितना खाली है।

हो रही आलोचना
स्वरा के इस ट्वीट पर एमकेएस नाम के यूजर ने लिखा, अब ये विवाद छोड़ दीजिए ...अब तो सबका " D N A " एक है .... अब कश्मीर ,बांग्लादेश या पाकिस्तान सब पुरानी बातें हो गई.. अब तो जश्न मनाइये कि सबका " D N A " एक है . अब तो मुसलमान, दलित, महिला सब R S S प्रमुख बन सकते हैं क्योंकि....। जबकि एक अन्य यूजर ने लिखा संघी कम से कम सैनिकों की मौत का जश्न नहीं मनाते हैं। एक यूजर ने लिखा कि आपके खून में ऐसी क्या बात है कि जब मुस्लिम या वामपंथी के साथ कुछ होता है तभी आपकी आवाज निकलती है

स्टेन स्वामी का निधन
बता दें कि आदिवासियों के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाल कार्यकर्ता स्टेन स्वामी का सोमवार को न्यायिक हिरासत में निधन हो गया। उन्हें पिछले साल एनआईए ने गिरफ्तार किया था, 8 अक्टूबर को गिरफ्तार किए जाने के बाद उन्हें अगले दिन एनआईए कोर्ट में पेश किया गया जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। 28 मई को उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनका सोमवार को निधन हो गया।

स्टेन स्वामी पर क्या आरोप थे
स्टेन स्वामी को भीमा कोरेगांव विवाद मामले में गिरफ्तार किया गया था। उनपर एनआईए ने आरोप लगाया था कि स्टेन स्वामी का सीपीआई माओवादी के साथ संबंध है। वह माओवादियों के मुखौटे के तौर पर काम करते हैं और इसकी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल भी होते हैं। लेकिन जिस तरह से सोमवार को उनका निधन हुआ उसके बाद हर तरफ इसकी आलोचना हो रही है और न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो रहा है।












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