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Clean India : लद्दाख का यह सुदूर गांव चमचमाता उदाहरण, स्थानीय लोगों ने खड़ा किया आंदोलन

पाकिस्तान की सीमा से लगे लद्दाख का सुदूर गांव स्वच्छ भारत अभियान का चमचमाता उदाहरण बनकर उभरा है। Swachh Bharat Abhiyan Ladakh remote village Turtuk shining example
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टर्तुक (लद्दाख), 03 अक्टूबर : स्वच्छ भारत अभियान पूरे देश में चल रहा है। राज्यों की रैंकिंग के बीच सुदूर गांव का प्रदर्शन उत्साह बढ़ाने वाला है। काराकोरम और हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं के बीच पाकिस्तान सीमा से सटा एक गांव चमचमाता उदाहरण बनकर सामने आया है। नियंत्रण रेखा के करीब बेहद कम आबादी वाला गांव है। इस गांव से पाकिस्तानी चौकियां साफ नजर आती हैं। भारत की यह सुदूर चौकी अब स्वच्छ भारत अभियान की एक ज्वलंत मिसाल बन गई है। जानिए इस गांव की पूरी कहानी--

टर्तुक में क्लीन इंडिया मुहिम

टर्तुक में क्लीन इंडिया मुहिम

भारत की सुदूर चौकी टर्तुक स्वच्छ भारत अभियान से शिद्दत से जुड़ा है। यहां के ग्रामीण क्लीन इंडिया मुहिम से सफाई के अलावा शेष भारत के साथ एकीकृत करने वाले अभियान के रूप में भी जुड़े हुए हैं। भारत की ये दूरस्थ चौकी का पर्यटन 2010 में सामने आया। इसके बाद गांव में प्लास्टिक कचरा और अन्य प्रदूषक तत्वों की सफाई शुरू हुई। इस सुदूर गांव में स्वच्छता अभियान की शुरुआत और "हर घर तिरंगा" अभियान की सफलता से भी लोगों का उत्साह बढ़ा। इसके बाद भारत के लगभग सबसे दूरदराज के हिस्से में राष्ट्रीय गौरव और एकीकरण का एक मजबूत संदेश स्वच्छता अभियान से भी दिया गया।

स्वच्छता को लोगों ने मुहिम बना लिया

स्वच्छता को लोगों ने मुहिम बना लिया

यहां के ग्रामीण यह महसूस किया कि पर्यावरण के साथ उनका नाजुक रिश्ता दांव पर है। प्लास्टिक जैसे तत्वों से मुक्ति पाने के लिए स्थानीय लोगों ने देश के सबसे दूरस्थ हिस्से में स्वच्छ भारत अभियान को लागू करने का जिम्मा अपने ऊपर ले लिया। स्वच्छता अभियान के दौरान बच्चों ने जमकर नारे भी लगाए। "साफ करो, साफ करो, अपना मोहल्ला साफ करो!", "स्वच्छ टुर्तुक, हरा टुर्तुक!", "भारत माता की जय!", "वंदे मातरम ! दिलचस्प बात यह है कि कुछ पर्यटक भी इन बच्चों से प्रेरित हुए और छात्रों और आयोजकों के साथ स्वच्छता अभियान में शामिल हुए।

इस साल बड़ी संख्या में आए पर्यटक

इस साल बड़ी संख्या में आए पर्यटक

बता दें कि टुर्तुक में पर्यटन सीजन बड़े पैमाने पर अप्रैल से सितंबर के बीच शुरू होता है। इस साल इस गांव में देश भर से और यहां तक ​​​​कि देश के बाहर से बड़ी संख्या में आगंतुकों को देखा गया। कोविड -19 महामारी के कारण पर्यटन प्रभावित हुआ था। दो साल बाद खोले जाने पर यहां बड़ी संख्या में टूरिस्ट पहुंचे।

गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे का अंबार

गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे का अंबार

पर्यटन से टर्टुक की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने के बावजूद, प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे का संचय काफी अधिक मात्रा में किया गया था। इसलिए, पर्यावरण संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए एक स्थानीय गेस्ट हाउस के मालिक हशमतुल्ला और पोर्टिया कॉनराड ने टुर्तुक गांव में एक स्वच्छता अभियान चलाने की पहल की। कॉनराड नई दिल्ली के एक शोध विद्वान हैं।

गांधी जयंती के मौके पर सफाई

गांधी जयंती के मौके पर सफाई

कॉनराड बताते हैं कि वे बाल्टी समुदाय पर चल रही एक शोध परियोजना के लिए टर्टुक का दौरा करने आए थे। इस पहल में सरकारी स्कूलों और टुर्तुक वैली स्कूल के स्कूली बच्चों ने भी भाग लिया। छुट्टी और निर्धारित परीक्षा होने के बावजूद, 75 से अधिक बच्चे दो अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर कचरा इकट्ठा करने के लिए एकत्र हुए। अभियान से पहले सभी छात्रों को मास्क प्रदान किया गया और ग्रामीणों में जागरूकता के लिए पोस्टर भी बनाए गए।

टुर्तुक की रक्षा के लिए प्रेरित

टुर्तुक की रक्षा के लिए प्रेरित

टुर्तुक में स्वच्छता अभियान मुख्य तुरतुक पुल से गांव के दोनों किनारों तक चलाया गया। सफाई अभियान दो घंटे तक चला और कुल 57 बोरी गैर जैव निम्नीकरणीय कचरा एकत्र किया गया। हसमतुल्लाह और पोर्टिया बच्चों को 'स्वच्छ भारत अभियान' की अवधारणा और गांधी जयंती के सार और स्वच्छ वातावरण के बारे में जानकारी दी। स्थानीय लोगों को प्रदूषण से टुर्तुक की रक्षा के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया गया।

हर घर तिरंगा अभियान

हर घर तिरंगा अभियान

"हर घर तिरंगा" कार्यक्रम के दौरान टुर्तुक के निवासियों के पास केवल एक छोटा राष्ट्रीय ध्वज था। इन्हें एक बड़ा झंडा फहराने की आवश्यकता महसूस हुई जिसे पाकिस्तान की ओर से भी देखा जा सके। टुर्तुक के ग्रामीणों ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान और हर घर तिरंगा अभियान केवल शब्द नहीं बल्कि दोनों अभियान अब जीवन का एक तरीका बन गए हैं। वे इसे एक बंधन के रूप में देखते हैं जो उन्हें शेष भारत के साथ सुरक्षित रूप से एकीकृत करता है। वे कहते हैं कि भारत के शक्तिशाली पहाड़ों और जल निकायों के पर्यावरण को संरक्षित करना हमारे ही ऊपर है।

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English summary
How a remote village in Ladakh bordering Pakistan has become a shining example of Swachh Bharat Abhiyan.
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