क्या निलंबित होने पर सांसदों की भी सैलरी कट जाती हैं? जानें क्या कहता है कानून
Suspended MP Salary: संसद का मानसून सत्र लगातार जारी है। लोकसभा और राज्यसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयक पास किए गए जिनमें दिल्ली सर्विसेज बिल सबसे महत्वपूर्ण रहा। लेकिन सत्र के दौरान हर बार की भांति इस बार भी हंगामा देखने को मिला। इस हंगामे के चलते आप सांसद संजय सिंह, टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन और लोकसभा सांसद सुशील कुमार रिंकू को पूरे सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। अब कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी सस्पेंड किया जाता है तो उसकी सैलरी आधी हो जाती है लेकिन क्या सांसदों के साथ भी ऐसा है। तो चलिए जानते हैं निलंबित होने के बाद सांसदों की सैलरी पर क्या प्रभाव पड़ता है...
सबसे पहले जानें सांसदों को निलंबित क्यों किया जाता है?
स्पीकर द्वारा बार-बार समझाने पर भी सांसदों द्वारा हंगामा करना या काम में बाधा पहुंचाने पर सस्पेंड कर दिया जाता है। लेकिन यह सस्पेंसन कितने दिनों के लिए होगी यह संसद के रूल बुक के मुताबिक तय की जाती है। इस बुक के रूल 373 के तहत लोकसभा स्पीकर सांसद को फौरन सदन से हटने का निर्देश दे सकते हैं। वहीं रूल नंबर 374A में सांसदों के निलंबन की अवधि के बारे में बताया गया है। नीचे जानिए निलंबित सांसदों की सैलरी के बारे में...

निलंबित होने के बाद सांसदों की सैलरी
बता दें कि सदन की कार्यवाही के दौरान निलंबित सांसदों को पूरी सैलरी मिलती है। सरकारी कर्मचारी की तरह सैलरी नहीं काटी जाती है। लेकिन संसद सदस्य को दैनिक भत्ते का भुगतान तभी किया जाता है, जब वो लोकसभा/राज्यसभा सचिवालय में रखे रजिस्टर में हस्ताक्षर करते हैं। हालांकि, काफी समय से 'काम नहीं तो वेतन नहीं' की मांग की जा रही है। इसपर कोई फैसला नहीं हो सका है।
राज्यसभा में निलंबन के रूल
राज्यसभा में रूल 255 के तहत सभापति हंगामा या बुरा व्यवहार करने वाले सदस्य के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। सभापति सांसद को तुरंत सदन से बाहर जाने को कह सकते हैं। रूल 256 के तहत सभापति उस सांसद का नाम दे सकता हैं, जिसने नियमों की अनदेखी की हो। इसके बाद सदन उस सांसद को सस्पेंड करने के लिए एक प्रस्ताव लाया जाता है। इसके बाद सांसद को अधिकतम पूरे सत्र के लिए सस्पेंड किया जा सकता है।












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