Love Story: स्वराज कौशल सबसे कम उम्र के थे गवर्नर, ऐसे हुई थी युवा Sushma से पहली मुलाकात
Sushma Swaraj Kaushal Love Story: पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज के पिता स्वराज कौशल का आज 4 दिसंबर 2025 को निधन हो गया है। वर्तमान दिल्ली सांसद बांसुरी स्वराज के पिता कौशल स्वराज देश का एक जाना-माना नाम था। 73 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह गए कौशल स्वराज अधिवक्ता थे और मिजोरम के राज्यपाल और राज्यसभा सांसद की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
लंबी बीमारी से जूझ रहे स्वराज कौशल के निधन की खबर भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज और दिल्ली भाजपा ने दी। इस दुखद अवसर पर सुषमा स्वराज और कौशल स्वराज की अमर प्रेम कहानी फिर से चर्चा में है।

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और वरिष्ठ अधिवक्ता स्वराज कौशल की प्रेम कहानी संघर्ष, साहस और भरोसे की मिसाल थी। अलग विचारधाराओं के बावजूद उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में भी एक-दूसरे का साथ निभाया। आइए जानते हैं कैसे और कहां एक दूसरे को दिल बैठा था ये मशहूर जोड़ा?
सुषमा स्वराज और कौशल स्वराज की कहां हुई थी पहली मुलाकात?
सुषमा स्वराज और कौशल स्वराज की लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं। हरियाणा में 14 फरवरी 1952 को जन्मीं सुषमा स्वराज बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल थीं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को समर्पित परिवार में जन्मी सुषमा को अपने परिवार का हर कदम पर सहयोग मिला। अंबाला कैंट से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से कानून की पढ़ाई की, जहाँ उनकी मुलाकात स्वराज कौशल से हुई।
मुश्किल हालात, फिर भी हो गया प्यार!
सुषमा स्वराज और स्वराज कौशल की विचारधाराएं काफी अलग थीं, सुषमा जहाँ RSS की सोच रखती थीं, वहीं स्वराज समाजवादी थे। कॉलेज में उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदली। इमरजेंसी (1975) के दौरान, सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते हुए जॉर्ज फर्नांडिस के बचाव दल में शामिल थे और इसी अवधि में जेपी आंदोलन से भी जुड़े, जिससे उनका रिश्ता गहराया।
पिता खिलाफ थे फिर 'इमरजेंसी' में की शादी
कौशल किशोर और सुषमा स्वराज दोनों ने परिवार के सामने शादी करने की इच्छा व्यक्त की ताे विशेषकर सुषमा के घर से, कड़ा विरोध हुआ। सुषमा के पिता ने इस रिश्ते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। सुषमा के पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हुए थे और अनुशासन व साफ-सुथरे विचारों के लिए जाने जाते थे। हालांकि सुषमा स्वराज के पिता ने बाद में इस रिश्ते को स्वीकार किया और परिवार ने शादी के बाद दोनों को अपना समर्थन दिया।
पिता के विरोध समेत तमाम चुनौतियों के बावजूद, 13 जुलाई 1975 को इमजरेंसी में दोनों ने विवाह किया, जिसके बाद सुषमा ने अपने नाम के साथ 'स्वराज' उपनाम जोड़ा। सुषमा स्वराज और स्वराज कौशल का निधन हो गया है लेकिन प्रेम कहानी सदा उसी सादगी और मजबूती से याद की जाती रहेगी।












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