राफेल डील में अहम भूमिका निभाने वाले सीनियर अफसरों के तबादलों पर सवाल

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बीते हफ्ते केंद्र सरकार से 10 दिनों के अंदर राफेल एयरक्राफ्ट से जुड़ी कीमतों और रणनीतिक जान‍कारियां एक सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को मुहैया कराने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह राफेल डील से जुड़ी ऐसी जानकारियों को जो कानूनी हैं, उन्‍हें सार्वजनिक करे। साथ ही उन याचिकाकर्ताओं ने जिन्‍होंने मामले पर याचिका दायर की है, को ऑफसेट पाटर्नर के बारे में सूचनाएं दे। 36 एयरक्राफ्ट से जुड़ी जानकारी कोर्ट द्वारा मांगे जाने के बाद अब डील से जुड़े अफसरों के तबादलों को लेकर भी सवाल हो रहे हैं।

Supreme Court vets Rafale decisions focus likely on bureaucratic shuffle too

रक्षा मंत्रायलय की एक्यूजीशन विंग ने राफेल डील में अहम रोल अदा किया। इस विंग में अफसरों के तबादलों पर भी अब सवाल हो रहे हैं। राफेल सौदा जब जो हो रहा था तो जिन दो अफसरों ने अहम रोल निभाया, उन दोनों काही तबादला कर दिया गया।

1983 के आईएएस बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के अफसर आशाराम सिंह को 2013 में रक्षा मंत्रायलय की एक्यूजीशन विंग का डीजी बनाया गया था। सिहाग का उस वक्त अचनाक तबादला कर दिया गया, जब डील को लेकर बाचतीत अहम दौर में थी। उन्हें यूपीएससी में सेक्रेटरी बना दिया गया। ये उनके लिहाज से थोड़ा कम अहमियत की पोस्ट थी।

सिहाग की जगह 1984 बैच की तमिलनाडु कैडर की स्मिता नागराज को लाया गया। इनके यहां रहते डील हुई लेकि एक साल बाद इन्हें भी यूपीएससी भेज दिया गया। इन तबादलों को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता एस जयाल रेड्डी ने भी कुछ समय पहले सिहाग के ट्रांसफर और स्मिता के यूपीएससी मैंबर बनाए जाने को लेकर सवाल किए थे।

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