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सुप्रीम कोर्ट का यूपी सरकार को अल्टीमेटम, CAA का विरोध करने वालों के खिलाफ जारी नोटिस वापस लें

नई दिल्ली, फरवरी 11। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बीच योगी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से एक अल्टीमेटम मिला है। कोर्ट ने कहा है कि अगर यूपी सरकार ने अदालत के आदेश की अवमानना की तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा। दरअसल, यह मामला साल 2019 में CAA के विरोध से जुड़ा है, जब राज्य में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने राज्य की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में योगी सरकार ने ऐसा करने वालों की संपत्ति को जब्त कर वसूली करना शुरू किया था। इसके लिए योगी सरकार ने आरोपियों को नोटिस भेजे थे। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हीं नोटिसों को लेकर कहा है कि इस तरह की कार्यवाही को तत्काल वापस लिया जाए।

Supreme court ultimatum to UP Govt

कोर्ट ने दिया 18 फरवरी तक का समय

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने यूपी सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि आपको (योगी सरकार) अंतिम मौका दिया जा रहा है कि जो धन वसूली के नोटिस भेजे गए हैं, उन्हें वापस लिया जाए नहीं तो अदालत ही कानून का उल्लंघन करने वाली इस कार्यवाही को निरस्त कर देगा। बेंच ने कहा है, 'आपको कानून के तहत तय प्रक्रिया का पालन करना होगा। कृपया इसकी जांच करें, हम 18 फरवरी तक आपको अंतिम मौका दे रहे हैं।'

कोर्ट ने दी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यूपी सरकार को झटका देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क करने के लिए कार्यवाही करने में "शिकायतकर्ता, निर्णायक और अभियोजक" तीनों का खुद ही काम किया है। पीठ ने कहा, "कार्यवाही वापस ले लें या हम इस अदालत द्वारा निर्धारित कानून का उल्लंघन करने के लिए इसे रद्द कर देंगे।"

परवेज आरिफ टीटू की याचिका पर सुनवाई कर रही थी कोर्ट

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट परवेज आरिफ टीटू की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में CAA के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए जिला प्रशासन द्वारा कथित प्रदर्शनकारियों को भेजे गए नोटिस को रद्द करने की मांग की गई थी। याचिका में राज्य सरकार से जवाब की मांग भी की गई थी। याचिका में कहा गया है कि नोटिस "मनमाने तरीके" से भेजे गए हैं और ऐसे उदाहरणों का हवाला दिया गया है जहां एक ऐसे व्यक्ति को नोटिस भेजा गया है, जिसकी छह साल पहले 94 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई थी और साथ ही 90 वर्ष से अधिक आयु के दो लोगों सहित कई अन्य लोगों को भी नोटिस भेजा गया था।

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