बकरीद पर कोरोना प्रतिबंधों में ढील को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा केरल सरकार से जवाब, कल सुनवाई
नई दिल्ली, 19 जुलाई। देश में कोरोना महामारी के चलते कई राज्यों में धार्मिक कार्यक्रमों पर पाबंदी लगा दी गई है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी गई है। इस साल भी सरकार ने कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए कांवड़ यात्रा को रद्द कर दिया है। लेकिन कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों के बावजूद केरल की सरकार ने बकरीद के लिए पाबंदियों में राहत देने का फैसला लिया है। प्रदेश में कोरोना के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं, बावजूद इसके सरकार बकरीद के लिए प्रतिबंधों में छूट देने जा रही है, इसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। इस मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार का जवाब मांगा है और इस मामले पर सुनवाई 20 जुलाई को होगी।
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बता दें कि रविवार को इंडियन मेडिकल असोसिएशन की ओर से कहा गया था कि अगर केरल सरकार बकरीद के मौके पर महामारी काल में लोगों की भीड़ को इकट्ठा होने देने के अपने फैसले को वापस नहीं लेती है तो हम सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। गौर करने वाली बात है कि केरल सरकार ने बकरीद के मौके पर तीन दिन के लिए कोरोना प्रतिबंधों में ढील देने का ऐलान किया था। लेकिन सरकार के इस फैसले के बाद आईएएम ने केरल सरकार से अपील की थी कि वह इस तरह की भीड़ को इकट्ठा होने की इजाजत ना दें, वो भी ऐसे समय में जब भारत के चुनिंदा राज्यों में ही कोरोना के मामले सबसे अधिक हैं और उसमे से एक केरल है।
आईएमए ने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश का हवाला देते हुए कहा कि इस साल यहां कोरोना के चलते कांवड़ यात्रा को रोक दिया गया है। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए राज्यों ने यह फैसला लिया और कांवड़ यात्रा को रोक दिया। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केरल जैसे समझदार राज्य ने इस तरह का फैसला लिया और लोगों की भीड़ को इकट्ठा होने देने की अुमति दी। इससे पहले भी आईएमए ने देशभर में धार्मिक और पर्यटन स्थल पर जमा हो रही भारी भीड़ को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी। इस बाबत आईएमए ने राज्य सरकारों को पत्र भी लिखा था।












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