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ऑड-ईवन पर दिल्ली सरकार के तर्कों से संतुष्ट नहीं सुप्रीम कोर्ट, कहा- ये कोई स्थायी समाधान नहीं

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में भारी प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऑड-ईवन प्रदूषण रोकने का कोई स्थायी समाधान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली सरकार से कई कड़े सवाल किए। अदालत ने दिल्ली सरकार की ऑड-ईवन स्कीम पर कहा कि क्या आप बताएंगे, इससे कितना फायदा हुआ है। दिल्ली सरकार के वकील के जवाबों से भी अदालत मुतमईन नहीं दिखी। पराली जलाने को लेकर हरियाणा और पंजाब के चीफ सेक्रेटरी को भी एक बार फिर अदालत ने तलब किया है। बीते करीब 20 दिनों से दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति भयावह है। इस पर कई याचिकाएं अदालत मे दाखिल की गई हैं, जिन पर सुनवाई हो रही है।

हम प्रकृति पर नियंत्रण नहीं कर सकते

हम प्रकृति पर नियंत्रण नहीं कर सकते

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि कार प्रदूषण स्तर का 3 प्रतिशत है। कचरा डंपिंग, निर्माण अपशिष्ट और सड़क की धूल भी प्रदूषण के बढ़ाने में काफी रोल रखते हैं। ऐसे में ऑड ईवन एक स्थायी समाधान नहीं हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र और दिल्ली सरकार की फटकार लगाते हुए कहा कि हम प्रदूषण पर नियंत्रण कर सकते है लेकिन प्रकृति पर नियंत्रण नहीं कर सकते। ऐसे हालात तब बनते है, जब प्रकृति का दुरुपयोग होता है।

दिल्ली सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, ऑड ईवन स्कीम से प्रदूषण के स्तर में 5 से 15 फीसदी की कमी आई है। अगर ऑड ईवन में कोई छूट ना दी होती तो रिजल्ट और भी बेहतर हो सकते थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण की बड़ी वजह पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना है।

दिल्ली, पंजाब, हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी तलब

दिल्ली, पंजाब, हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी तलब

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी को भी तलब किया है। 29 नवंबर को अदालत में पेश होने को कहा गया है। अदालत पहले भी तीनों राज्यों को मुख्य सचिवों को प्रदूषण को लेकर फटकार लगा चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) से कहा कि प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन पर चल रहे तीन पहिया वाहनों की जाँच करें और इस पर भी रिपोर्ट दें। दिल्ली विकास प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग और अन्य नागरिक निकायों को अदालत के आदेशों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए निगरानी समिति के साथ सहयोग करने के लिए भी कहा गया है।

केंद्र से भी पूछा सवाल

केंद्र से भी पूछा सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार से पूछा है कि एयर क्लीनिंग डिवाइस को लगाने के लिए कितना समय लगेगा? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि चीन ने कैसे किया? कोर्ट में एक्सपर्ट ने बताया कि हमारे यहां 1 किलोमीटर वाला डिवाइस है, चीन में 10 किलोमीटर तक कवर करता है। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आप छोटे इलाके को क्यों कवर करना चाहते हैं, ज्यादा को क्यों नहीं।

बता दें, दिल्ली की हवा बीते करीब 20 दिनों से बेहद खराब है। इसके चलते स्कूल बंद कर दिए गए हैं। लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। शुक्रवार को भी दिल्ली-एनसीआर धुंध की मोटी चादर में लिपटा रहा। लगातार चौथे दिन प्रदूषण का स्तर 'गंभीर' की श्रेणी में है। दिल्ली में शुक्रवार सुबह 10 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 467 दर्ज किया गया जो 'गंभीर की श्रेणी में आता है।

प्रदूषण पर रोक के लिए दिल्ली में एयर प्यूरीफायर टॉवर लगाने का रोडमैप तैयार करे केंद्र: सुप्रीम कोर्ट

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English summary
Supreme Court to delhi govt Odd Even scheme no permanent solution air pollution
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