SC Suo Motu NCERT Textbook: 8वीं की एनसीईआरटी किताब पर क्यों भड़का सुप्रीम कोर्ट? CJI ने लगा दी जमकर फटकार
Supreme Court Suo Motu NCERT Textbook Controversy: देश की सर्वोच्च अदालत में 25 फरवरी को उस समय नाराजगी देखने को मिली जब NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस की नई किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' (Corruption in the Judiciary) चैप्टर पर बहस हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इसे एक गंभीर मामला बताते हुए एनसीईआरटी को जमकर फटकार लगाई।
चीफ जस्टिस ने साफ तौर पर कोर्ट में कहा कि वह किसी भी हालत में न्यायपालिका की छवि को खराब नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा, इस धरती पर कोई भी व्यक्ति इतना बड़ा नहीं है कि वह इस संस्था को बदनाम कर सके। कानून से ऊपर कोई नहीं है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह संस्था की गरिमा को धूमिल करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा।
NCERT Class 8 Social Science textbook विवाद की जड़ क्या है? किताब में क्या लिखा है?
विवाद की शुरुआत NCERT द्वारा कक्षा 8 के लिए जारी की गई नई सोशल साइंस की किताब से हुई। इसमें 'न्यायपालिका की भूमिका' चैप्टर में एक विशेष सेक्शन जोड़ा गया है, जिसमें न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार और पेंडिंग केस की व्यवस्था की बड़ी चुनौती बताया गया है। NCERT की किताब में लोग न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार का अनुभव करते हैं।
साथ ही, इसमें सुप्रीम कोर्ट (81,000), हाईकोर्ट (62 लाख) और जिला अदालतों (4.7 करोड़) में लंबित मामलों के आंकड़े भी दिए गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ के सामने चिंता जताई कि 13-14 साल के बच्चों को यह पढ़ाया जाना कि न्यायपालिका भ्रष्ट है, बेहद आपत्तिजनक और संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है।
CJI का सख्त संदेश- संस्था को बदनाम नहीं होने दूंगा
मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि उन्हें इस संबंध में देश भर के हाईकोर्ट के जजों और बार के सदस्यों से कई संदेश मिले हैं। उन्होंने इस कदम को महज एक गलती नहीं, बल्कि एक 'गहरा और सुनियोजित कदम' बताया। CJI ने बताया कि उन्होंने पहले ही प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे को देखा है और अब सुप्रीम कोर्ट इस पर न्यायिक रूप से स्वतः संज्ञान ले रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल उठाया कि किताब में न्यायपालिका के भ्रष्टाचार की बात तो है, लेकिन नौकरशाही या राजनीति में भ्रष्टाचार पर एक शब्द भी नहीं लिखा गया है। जस्टिस जयमाल्य बागची ने भी टिप्पणी की कि इसमें 'संवैधानिक नैतिकता' की कमी दिखती है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने वरिष्ठ वकीलों की ओर से मुद्दा उठाए जाने के बाद कहा, मैं धरती पर किसी को भी इस संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। चाहे कोई कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है। आप चिंता न करें, मुझे इससे निपटना आता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और प्रशासनिक स्तर पर पहले ही आदेश पारित किए जा चुके हैं।
Kapil Sibal ने CJI से कहा बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा है?
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मुद्दे को पीठ के समक्ष रखते हुए कहा कि बेंच एंड बार इस विषय को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि कक्षा 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जाना बेहद संवेदनशील विषय है और यह सीधे-सीधे संस्था की साख से जुड़ा मामला है। इस पर CJI ने जवाब दिया कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की पहले से जानकारी है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के जजों सहित न्यायिक तंत्र के सभी हितधारक इस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं और उन्होंने भी इसे उनके संज्ञान में लाया है।
NCERT ने क्या कहा? पहले की किताबों से कैसे अलग है नया पाठ्यक्रम?
2005 के राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे पर आधारित पुरानी NCERT किताबों में न्यायपालिका की संरचना, भूमिका और मामलों के निपटारे में देरी जैसे मुद्दों पर चर्चा थी, लेकिन भ्रष्टाचार पर अलग से कोई सेक्शन शामिल नहीं था। NCERT हाल फिलहाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नए नेशनल करिकुलम के हिसाब से किताबों में बदलाव कर रहा है। इसी के तहत कक्षा 1 से 8 तक की नई किताबें जारी की गई हैं।
इस मामले ने एक नई कानूनी बहस को जन्म दे दिया है क्या शैक्षणिक स्वतंत्रता के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं की इस तरह की आलोचना स्कूली किताबों में की जा सकती है? सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस मामले में NCERT को नोटिस जारी कर जवाब मांग सकता है। फिलहाल, CJI के कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि न्यायिक सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं होगा।












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