जानिये लिव-इन रिलेशनशिप के रिस्‍क फैक्‍टर

[राजीव ओझा] आपने अक्सर पार्किंग प्लेस पर नोटिस लगा देखा होगा कि अपनी गाड़ी अपने रिस्क पर खड़ी करें। सुप्रीम कोर्ट ने भी लिव-इन रिलेशनशिप के बारे में एक ऐसा ही मत रखा है, जिसमे यही संदेश जाता है, कि भारत में लिव-इन रिलेशनशिप अब पाप या जुर्म तो नहीं, लेकिन अगर आप इसमें इनवॉल्‍व होते हों तो अपने रिस्‍क पर।

सुप्रीम कोर्ट हाल ही में एक फैसले में इसे स्पष्ट किया, लेकिन साथ में यह भी कहा की अगर कोई महिला यह जानते हुए की जिस पिरुष के साथ वो लिव-इन रिलेशनशिप में है, वो शादीशुदा है, उसके साथ रहती है और 18 साल बाद वो पुरुष उसे छोड़ कर अपनी पहली पत्नी के पास चला जाता है तो लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला उससे कोई मुआवजा नहीं मांग सकती साथ ही ये मामला ‘मैरिज' या डोमेस्टिक वाइलेंस के दायरे में भी नहीं आता।

सुप्रीम कोर्ट ने उलटे चेतावनी दी कि पहली पत्नी और बच्चे उस महिला के खिलाफ मुआवजे का दावा ठोंक सकते हैं, क्यूँकि वो उनकी वजह से पति और पिता के प्यार से 18 साल तक वंचित रहे। लेकिन साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा इस तरह के मामलों में अभी तक कोई कानून नहीं है और लिव-इन रिलेशनशिप के ऐसे मामलों में पीड़ित महिला को भी न्याय मिले, इस बारे में नए सिरे से कानून बनाने पर सरकार को सोचना होगा। अब ये सरकार को सोचना होगा की बदलते समाज में बढ़ते लिव-इन रिलेशनशिप के मामलों के मद्दे नजर नए सिरे से कानून बनाये, जिससे किसी भी पक्ष के प्रति अन्याय न हो।

भारत में पहले समलैंगिकता पाप के दायरे में आता था अब ये जुर्म नहीं। इसी तरह लिव-इन रिलेशनशिप को पहले भारतीय समाज में वर्जित माना जाता था और ऐसी महिलाओं के लिए एक अपमानजनक शब्द था ‘रखैल'। उस शब्‍द के इस्‍तेमाल को सुप्रीम कोर्ट ने सख्‍ती से मना किया। धीरे-धीरे समाज बदला, नैतिक मूल्यों की परिभाषा बदली और समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ।

नारी 'अबला' के थोपे गए कवच से बहार निकल कर सबला हो गयी। वो अपने अधिकार और वजूद के लिए संघर्ष करने लगी। अपनी जिंदगी अपने सुख अपनी स्वतंत्रता के बारे में फैसला खुद करने करने लगी, लेकिन इस बदलाव में ये देखना और सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है कि इस आजादी का खामियाजा नारी को एकतरफा क़ानून के कारण तो नहीं भुगतना पड़ रहा है। यही नहीं इस रिलेशनशिप की आड़ में कहीं वर्तमान कानून का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा है, इसे सुनिश्चित करना भी कानून का काम है।

कानून बनेगा, इसमें कोई शक नहीं, नया कानून इस रिलेशनशिप के पेच कसेगा यह भी तय है, लेकिन रिस्‍क फैक्‍टर फिर भी बना रहेगा, क्‍योंकि भारत में जब महिला जज के सामने बयान देती है, तो पुलिस सबसे पहले आरोपी को जेल में डालती है, लिहाजा अगर ऐसी नौबत से बचना है तो ऐसे पार्किंग स्‍थल से दूर ही रहिये।

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