भारत के किस शहर में सबसे ज्‍यादा लिवइन जोड़े?

[सिमरन सिंह] लिव इन रिलेशनशिप के एक मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस नये ट्रेंड पर चिंता व्‍यक्‍त की और कहा कि इसकी कानूनी परिभाषा को बनाना बेहद जरूरी हो गया है। साथ में यह भी कहा कि लिव इन रिलेशन में रहना न तो अपराध है और न ही कोई पाप। सुप्रीम कोर्ट के अंतिम चंद शब्‍दों ने एक नई बहस छेड़ दी है। भारत जैसे देश के लिये यह बहुत संवेदनशील मुद्दा है, क्‍योंकि यहां के लोग पश्चिमी सभ्‍यता के तौर-तरीकों को अपनाने में जरा भी देर नहीं लगाते। तब तो और नहीं, जब कानून उनके साथ खड़ा हो।

खैर हम यहां बात करेंगे लिव-इन रिलेशन रिलेशनशिप से जुड़े 30 महत्‍वपूर्ण तथ्‍यों की, जो शायद आप नहीं जानते होंगे। शादी के बिना लड़का-लड़की के साथ रहने की इस प्रथा का चलन किस देश से हुआ, कब हुआ यह किसी को नहीं पता, लेकिन आज समाज की जैनरेशन नेक्‍स्‍ट इसे खुलकर तवज्‍जो दे रही है, इसमें कोई शक नहीं।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस राधाकृष्‍णन और जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष ने अगर इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की बात ऐसे ही नहीं कही है। कोर्ट में आये दिन यौन शोषण के ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें लड़का-लड़की लिव इन में रह रहे थे। और यही इस रिलेशनशिप का सबसे बड़ा दुष्‍प्रभाव है। सुप्रीम कोर्ट जानता है कि अगर इस नये ट्रेंड को कानूनी और सामाजिक वैधता मिल गई, तो देश के युवक-युवतियों के बीच सेक्‍सुअल रिलेशन बढ़ने में जरा भी देर नहीं लगेगी। यही कारण है कि कोर्ट ने अब तक खुलकर कोई फैसला नहीं दिया है।

तो चलिये चलते हैं स्‍लाइडर में, जहां हम बात कर रहे हैं भारत में लिव इन से जुड़े 30 गंभीर तथ्‍यों की। प्रत्‍येक स्‍लाइड के सामने आपको ऐसे रोचक तथ्‍य मिलेंगे, जिन्‍हें आप जरूर पढ़ना चाहेंगे और उसके बाद आपको यह जरूर लगेगा कि इस दिशा में एक सही कानून जरूर बनना चाहिये।

सबसे ज्‍यादा लिव-इन जोड़े बैंगलोर में

सबसे ज्‍यादा लिव-इन जोड़े बैंगलोर में

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि देश की आईटी सिटी बैंगलोर में सबसे ज्‍यादा लिव-इन जोड़े रहते हैं। कारण अलग-अलग राज्‍यों से आकर नौकरी करने वाले युवक-युवतियां अपने परिवार से दूर रहते हैं। लिहाजा प्‍यार में पड़ने के बाद साथ रहना उनके लिये साधारण बात बन जाती है।

सबसे ज्‍यादा फ्रॉड बैंगलोर में

सबसे ज्‍यादा फ्रॉड बैंगलोर में

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार बैंगलोर ही वो शहर है, जहां लिव इन रिलेशन के नाम पर अब तक सबसे ज्‍यादा फ्रॉड के मामले सामने आये हैं।

शादी से पहले सेक्‍स

शादी से पहले सेक्‍स

लिव इन रिलेशन की वजह से शादी से पहले सेक्‍स के मामले बढ़ रहे हैं। बिना शादी के गर्भवती होने के मामले भी बढ़े हैं, क्‍योंकि भारतीय समाज बिन ब्‍याही मां को गलत नजरों से देखता है।

टूट जाती हैं शादियां

टूट जाती हैं शादियां

लिव इन रिलेशन में रहने वाले युवक-युवती अगर आगे चलकर शादी नहीं करते हैं, तो दो बाते होती हैं। पहली कि उनकी जल्‍दी शादी तय नहीं होती, और अगर हो भी जाती है, तो नये जीवनसाथी को पुराने के बारे में पता चलने पर शादी टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

समाजशास्‍त्री की नजर में

समाजशास्‍त्री की नजर में

लखनऊ की समाजशास्‍त्री डा. प्रीती गौड़ का कहना है कि इस रिलेशन की शुरुआत प्‍यार से होती है और रिलेशन में आने वाले ज्‍यादातर लोग आजादी पसंद होते हैं। उन्‍हें शादी के बंधन में बंधना पसंद नहीं होता और अधिकांश तो यह मान कर चलते हैं कि उनका लिव-इन रिश्‍ता कभी भी टूट सकता है। लेकिन शादी के दृष्टिकोण से देखा जाये तो यह रिलेशन स्‍वीकार्य नहीं, क्‍योंकि अगर कोई भी पति या पत्‍नी शादी के बाद भी गैर से संबंध रखे, तो परिवार बिखर जाते हैं।

मेट्रो सिटी में ही है कल्‍चर

मेट्रो सिटी में ही है कल्‍चर

डा. प्रीति गौड़ कहती हैं कि यह कल्‍चर सिर्फ मेट्रो सिटीज में ही हो सकता है, क्‍योंकि वहां युवक-युवतियां परिवार से दूर रहते हैं। और फ्लैट कल्‍चर होने की वजह से उन्‍हें आसानी से घर मिल जाता है, जबकि छोटे शहरों में तो लोग शादी से पहले लड़का-लड़की को घर किराये पर देने से भी कतराते हैं।

फिल्‍मों ने दिया बढ़ावा

फिल्‍मों ने दिया बढ़ावा

बॉलीवुड फिल्‍मों ने भी इस रिलेशन को खुलकर बढ़ावा दिया है। उदाहरण के तौर पर सलाम नमस्‍ते और प्‍यार में ट्विस्‍ट फिल्‍में हैं।

ज्‍यादा केयर नहीं होती

ज्‍यादा केयर नहीं होती

लिव इन रिलेशन में लड़का-लड़की एक दूसरे की उतनी केयर नहीं करते हैं, जितनी की शादी के बाद। यही कारण है कि इसमें जल्‍दी ब्रेक होने की आशंका बनी रहती है।

निजी आजादी

निजी आजादी

शादी में पति-पत्‍नी एक दूसरे से बंधकर रहते हैं, जबकि लिवइन में दोनों को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने की आजादी होती है।

बीपीओ इंडस्‍ट्री में सबसे ज्‍यादा

बीपीओ इंडस्‍ट्री में सबसे ज्‍यादा

रिलेशनशिप स्‍टेटस पर किये गये एक सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार शादी से पहले साथ रहने वाले अधिकांश जोड़े बीपीओ इंडस्‍ट्री से होते हैं।

लिव इन में नहीं होता कंप्रोमाइज

लिव इन में नहीं होता कंप्रोमाइज

शादी में पति-पत्‍नी एक दूसरे के लिये तमाम कंप्रोमाइज करने को तैयार रहते हैं, लेकिन लिव इन में ऐसा नहीं होता।

किन देशों में मिली कानूनी मान्‍यता

किन देशों में मिली कानूनी मान्‍यता

फिलीपींस, फ्रांस, कनाडा, ऑस्‍ट्रेलिया, स्‍कॉटलैंड, यूके, अमेरिका में अलग-अलग कानूनी परिभाषाओं के अंतर्गत लिव इन रिलेशनशिप को मान्‍यता मिली हुई है।

अगर लिवइन में हुआ बच्‍चा

अगर लिवइन में हुआ बच्‍चा

अगर लिवइन रिलेशन में बच्‍च पैदा होता है, तो सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बच्‍चे पर अधिकार ठीक उसी आधार पर तय होगा, जैसा कि शादी के कानून के अंतर्गत होता है।

खाप पंचायतों की मान्‍यता नहीं

खाप पंचायतों की मान्‍यता नहीं

शादी से पहले साथ रहने के इस चलन को खाप पंचायतों की मान्‍यता न तो मिली है और न ही भविष्‍य में मिलने के आसार हैं।

शादी के लिये तैयार

शादी के लिये तैयार

यदि आप शादी करने के लिये तैयार हैं, तब तो लिव-इन रिलेशन एक दूसरे को समझने का सबसे अच्‍छा माध्‍यम है।

बलात्‍कार के लगते हैं आरोप

बलात्‍कार के लगते हैं आरोप

ज्‍यादातर लिव इन रिलेशन में जब दोनों के बीच नहीं पटती है, तो लड़कियां अपने साथी के खिलाफ रेप केस ठोक देती हैं। यह इस रिलेशन का सबसे कमजोर पहलु है और गंभीर भी।

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