सुप्रीम कोर्ट ने आयकर विभाग को लगाई फटकार, कहा- कोर्ट पिकनिक प्लेस नहीं है
नई दिल्ली। आयकर विभाग को सुप्रीम कोर्ट में गलत बयानी उस समय महंगी पड़ गई जब कोर्ट ने फटकार लगाते हुए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगा दिया। कोर्ट ने साफतौर पर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पिकनिक प्लेस नहीं है और इस तरह का व्यवहार भी उसके साथ नहीं किया जा सकता है। जस्टिस मदन बी. लोकुर की बेंच ने विभाग पर 10 लाख रुपये का जुर्माना ठोंका।

दरअसल विभाग ने कोर्ट में दायर एक याचिका लंबित होने की बात कहकर गुमराह करने की कोशिश की थी। इस पर फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि, आयकर विभाग ने 596 दिनों की देरी के बाद याचिका दायर की और विलंब के लिए विभाग की ओर अपर्याप्त और अविश्वसनीय दलीलें दी गईं। इस पीठ में न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता भी शामिल थे।
बेंच ने आयकर विभाग के वकील से कहा, कृपा करके ये न करें। सुप्रीम कोर्ट पिकनिक प्लेस नहीं है। क्या ये भारत की सुप्रीम कोर्ट से व्यवहार का सही तरीका है? आप सुप्रीम कोर्ट से ऐसा व्यवहार नहीं कर सकते हैं। शीर्ष कोर्ट ने पाया कि गाजियाबाद के आयकर आयुक्त के द्वारा दाखिल की गई याचिका में विभाग ने कहा कि साल 2012 के अगस्त में कोर्ट में दाखिल किया गया मिलता-जुलता मामला अभी तक लंबित है।
कोर्ट ने बाद में ये पाया गया कि विभाग ने जिस मामले को लंबित बताया था, उस मामले को कोर्ट ने सितंबर 2012 में ही निपटा दिया था। बेंच ने कहा, दूसरे शब्दों में याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने पूरी तरह से गुमराह करने वाले बयान दिए हैं।
जिसके बाद कोर्ट ने ना सिर्फ आयकर विभार को फटकार लगाई बल्कि केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि, आयकर आयुक्त के जरिए भारत सरकार ने मामले को इतने हल्के में लिया। पीठ ने विभाग को चार हफ्ते के अंदर सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति के समक्ष 10 लाख रुपये जमा कराने का निर्देश दिया।












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