ट्रेन लेट होने से शख्स की फ्लाइट छूटी, रेलवे को अब देना होगा 30,000 रुपए का मुआवजा

नई दिल्ली, सितंबर 08: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेनों के देरी से चलने के लिए इंडियन रेलवे को कड़ी फटकार लगाई है। इसके साथ ही नए निर्देश भी दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि, रेलवे ट्रेनों के लेट होने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है। कोर्ट ने कहा कि अगर इससे किसी यात्री को नुकसान होता है तो रेलवे को मुआवजे का भुगतान करने के लिए तैयार रहना चाहिए। दरअसल सुप्रीम कोर्ट की ओर से ये फैसला एक शख्स द्वारा दायार की गई शिकायत पर आया है। सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को उस शख्स को 30 हजार मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

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    सुप्रीम कोर्ट ने Railways को लगाई फटकार

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    जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ने कहा है कि अगर रेलवे यह नहीं बता पाता है कि ट्रेन क्यों लेट हुई है, तो यात्री को मुआवजा देना जरूरी होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यात्रियों का समय कीमती है और ट्रेनों में देरी के लिए किसी न किसी को जवाबदेह बनाना होगा। कोर्ट ने कहा, यह कॉम्पटिशन और जवाबदेही का समय है। अगर पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन को प्राइवेट सेक्टर के साथ कंपीट करना है तो उसे अपने सिस्टम और कार्यशैली में सुधार करना होगा। देश के लोग/यात्री शासन/प्रशासन की दया पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। किसी को तो जिम्मेदारी लेनी होगी।

    शीर्ष अदालत में निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा

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    जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ उत्तर पश्चिम रेलवे की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, नई दिल्ली द्वारा पारित आदेश को बरकरार रखा, जिसमें उसने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम, अलवर द्वारा पारित मूल आदेश की पुष्टि की गई थी। जिसमें प्रतिवादी द्वारा वर्तमान मामले में दायर शिकायत की अनुमति दी गई थी।

    ये था मामला

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    दरअसल, संजय शुक्ला अपने परिवार को साथ 11 जून 2016 को अजमेर जम्मू एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे थे और ट्रेन को सुबह 8.10 बजे जम्मू पहुंचना था लेकिन यह 12 बजे जम्मू पहुंची। उन्हें दोपहर 12 बजे की फ्लाइट से जम्मू से श्रीनगर जाना था। इससे शुक्ला परिवार की फ्लाइट मिस हो गई और परिवार को टैक्सी से जम्मू से श्रीनगर जाना पड़ा। इसके लिए उन्हें टैक्सी के लिए 15,000 रुपये देने पड़े। इसके साथ ही उन्हें लॉजिंग के लिए भी 10,000 रुपये देने पड़े।

    सुप्रीम कोर्ट पहले भी रेलवे को लगा चुका है फटकार

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    इसके बाद अलवर जिले के कंज्यूमर फोरम ने उत्तर पश्चिम रेलवे को संजय शुक्ला को 30 हजार रुपये का मुआवजा देने का ऑर्डर दिया था। स्टेट और नेशनल फोरम ने भी कंज्यूमर फोरम के इस फैसले को सही ठहराया है। इस फैसले को रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इससे पहले प्रयागराज एक्सप्रेस के लेट होने के कारण दो यात्री करीब 5 घंटे की देरी से दिल्ली पहुंचे थे। इस वजह से उनकी कोच्ची की फ्लाइट छूट गई थी। इन यात्रियों ने रेलवे के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत की और फोरम ने रेलवे पर जुर्माना लगा दिया।

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