क्या उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति असंवैधानिक है? सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति को लेकर जनहित याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति असंवैधानिक नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, उपमुख्यमंत्री के पद को संविधान के तहत परिभाषित नहीं किया जा सकता है, लेकिन सत्तारूढ़ दल या पार्टियों के गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं को उपमुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त करने में कोई अवैधता नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति को असंवैधानिक करार नहीं दिया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी.वाई.चंद्रचूड़ ने कहा कि, एक उप-मुख्यमंत्री राज्य सरकार में मुख्यमंत्री से सबसे पहले और अहम मंत्री होता है। हां ये सही है कि इस पद का संवैधानिक अर्थों में कोई वास्तविक संबंध नहीं है लेकिन इसको असंवैधानिक भी नहीं कहा जा सकता है।
डी.वाई.चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, एक डिप्टी सीएम एक विधायक और एक मंत्री होता है, जिसे डिप्टी सीएम कहा जाता है और इसलिए, इस प्रथा से किसी भी संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं होता है।
पीठ ने कहा, "उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति कुछ राज्यों में पार्टी या सत्ता में पार्टियों के गठबंधन में वरिष्ठ नेताओं को थोड़ा ज्यादा महत्व देने के लिए अपनाई जाने वाली एक प्रथा है...यह असंवैधानिक नहीं है।"












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