'2 मिनट के सुख वाली...' कलकत्ता हाईकोर्ट की टिप्पणी पर SC ने जताई नाराजगी, बताया आर्टिकल 21 का हनन
रेप के एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा की गई एक टिप्पणी पर नाराजगी जताई है। कलकत्ता हाईकोर्ट की नाबालिग लड़कियों पर की गई टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। जिस पर शुक्रवार को सुनवाई की।
सर्वोच्च अदालत ने निचली अदालतों को सलाह देते हुए कहा कि जजों को अपनी निजी राय नहीं व्यक्त करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि, हाईकोर्ट की टिप्पणी न सिर्फ गैरजरूरी बल्कि आपत्तिजनक भी है। यह अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के मिले मूल अधिकार का हनन है।

दरअसल कलकत्ता हाई कोर्ट ने रेप के एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा था, "प्रत्येक महिला किशोरी को यौन इच्छा पर नियंत्रण रखना चाहिए, क्योंकि बमुश्किल दो मिनट के यौन सुख का आनंद लेने के कारण वह समाज की नजरों में हार जाएंगी। हाईकोर्ट ने कहा कि 'यह युवा लड़कियों की जिम्मेदारी है कि वह अपने शरीर की अखंडता, गरिमा को बनाएं रखें।' साथ ही कोर्ट ने लड़कों को भी लड़कियों की गरिमा की इज्जत करने की सलाह दी और कहा कि 'लड़कों के दिमाग को इस तरह से प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए कि वह महिलाओं की इज्जत करें।'
हाईकोर्ट के जस्टिस चित्त रंजन दास और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की बेंच ने एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के आरोपी को बरी करते हुए ये टिप्पणियां की थीं। बता दें कि, 20 साल के युवक को ट्रायल कोर्ट ने उसकी नाबालिग प्रेमिका के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए बीस साल जेल की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ युवक ने हाईकोर्ट में अपील की थी। अब सर्वोच्च अदालत ने इस तरह की भाषा के इस्तेमाल को आपत्तिजनक बताया है।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के कुछ हिस्से (जिसमें कहा गया था कि किशोरियों को दो मिनट के आनंद के बजाय अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए) अत्यधिक आपत्तिजनक और पूरी तरह से अनुचित थे। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि प्रथम दृष्टया उसका विचार है कि न्यायाधीशों से अपने व्यक्तिगत विचार व्यक्त करने या उपदेश देने की अपेक्षा नहीं की जाती है।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ये टिप्पणियां पूरी तरह से संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किशोरों के अधिकारों का उल्लंघन हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर स्वत: संज्ञान लिया और राज्य सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को यह बताने को कहा कि क्या फैसले के खिलाफ अपील दायर की जाएगी। कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट माधवी दीवान को न्याय मित्र यानी अमाइकस क्यूरी भी नियुक्त किया है।












Click it and Unblock the Notifications