शिवसेना की लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राज्यपाल को राजनीतिक अखाड़ा में नहीं घुसना चाहिए

महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों गुटों का विवाद सुप्रीम कोर्ट में भी बड़ी बहस का मुद्दा बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा है कि राज्यपाल को राजनीति के अखाड़े में नहीं घुसना चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गवर्नरों से यह उम्मीद नहीं की जाती है कि वे राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन बनाने के लिए राजनीतिक अखाड़े में घुसेंगे। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली संविधान पीठ ने शिवसेना विवाद से जुड़ी याचिकाओं के संबंध में सुनवाई के दौरान यह मौखिक टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की, जब महाराष्ट्र के राज्यपाल की ओर से उपस्थित होकर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि कैसे उद्धव ठाकरे की शिवसेना 'अवसरवादिता' का परिचय देते हुए चुनाव के बाद एनसीपी और कांग्रेस के साथ महा विकास अघाड़ी गठबंधन में शामिल हो गई। इन याचिकाओं को सात सदस्यीय संविधान पीठ में भेजने का फैसला अदालत ने गुरुवार को सुरक्षित रख लिया है और शुक्रवार को इसपर फैसला सुनाया जाएगा।

शिवसेना के विवाद का मामला
सुप्रीम कोर्ट शिवसेना के एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट बनने के बाद पैदा हुए संवैधानिक मुद्दों की सुनवाई कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट की इस संवैधानिक बेंच में सीजेआई चंद्रचूड़ के अलावा, जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा शामिल हैं। महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुटों के वकीलों की ओर से दलीलें पेश किए जाने के बाद भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता महाराष्ट्र के गवर्नर की ओर से पेश हुए।

राज्यपाल की ओर से तुषार मेहता ने पेश की थी दलील
एसजी मेहता ने महाराष्ट्र के राज्यपाल का पक्ष रखते हुए कहा, 'हमारे यहां दो दलों वाली व्यवस्था नहीं है। भारत में बहुदलीय लोकतंत्र है। बहुदलीय लोकतंत्र का मतलब है, गठबंधन का युग। दो तरह के गठबंधन होते हैं- चुनाव से पहले और चुनाव के बाद। चुनाव के बाद का गठबंधन आमतौर पर अवसरवादी होता है, जबकि चुनाव-पूर्व गठबंधन सैद्धांतिक होता है। दो दलों के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन था- बीजेपी और शिवसेना।...... जब आप वोटर के पास जाते हैं, तो आप राजनीतिक विचारधारा लेकर पहुंचते हैं। वोटर व्यक्ति के लिए वोट नहीं देता है, बल्कि उस पार्टी की विचारधारा या राजनीतिक दर्शन के लिए वोट देता है। हम हॉर्स ट्रेडिंग की बात सुनते हैं। यहां अस्तबल (उद्धव ठाकरे) ने उनके साथ सरकार बना ली, जिसके खिलाफ चुनाव लड़े थे........'

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    राज्यपाल को राजनीतिक अखाड़े में नहीं घुसना चाहिए- सुप्रीम कोर्ट
    इसपर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ बोले, 'राज्यपाल से यह सब कहते कैसे सुना जा सकता है? सरकार के गठन को लेकर गवर्नर ऐसे कैसे कह सकते हैं ? जब वे सरकार बनाते हैं, गवर्नर विश्वास मत के लिए कहते हैं.....हम सिर्फ ये कह रहे हैं कि राज्यपाल को राजनीतिक अखाड़े में नहीं घुसना चाहिए। '

    क्या है नबाम रेबिया का मामला ?
    सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला विचाराधीन है कि क्या नबाम रेबिया बनाम डिप्टी स्पीकर (2016) के फैसले को सर्वोच्च अदालत की सात सदस्यीय संविधान पीठ में पुनर्विचार के लिए भेजा जाना चाहिए। अरुणाचल प्रदेश के इस केस में पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि अगर स्पीकर को हटाने से संबंधित सूचना पहले से सदन में लंबित है तो विधानसभा के अध्यक्ष एमएलए की अयोग्यता की अर्जी पर विचार नहीं कर सकते।

    शुक्रवार तक के लिए फैसला सुरक्षित
    गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपने फैसले को शुक्रवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया है कि महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट से संबंधित याचिकाओं को नबाम रेबिया के फैसले पर पुनिर्विचार करने के लिए सात-सदस्यीय संविधान पीठ में भेजा जाए या नहीं? वह फैसला विधानसभा अध्यक्षों की विधायकों की अयोग्यता से निपटने के अधिकारों से संबंधित है।

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