जस्टिस चंद्रचूड़ को CJI बनने से रोकने के लिए याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक बताकर किया खारिज
भारत के मुख्य न्यायधीश (Chief Justice of India) जस्टिस उदय यू ललित का कार्यकाल 8 नवंबर 2022 को खत्म हो रहा है। उनके बाद 9 नवंबर को जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ (Justice DY Chandrachud) भारत के 50वें CJI के रूप में शपथ लेंगे। उनके शपथ ग्रहण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसको सर्वोच्च अदालत ने भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया। साथ ही कहा कि उस याचिका में सुनवाई के योग्य कुछ भी नहीं था।

जानकारी के मुताबिक मुर्सलिन असिजित शेख ने ये याचिका दायर की थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित, न्यायमूर्ति रवींद्र भट और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने सुनवाई की। पीठ ने कहा कि हम पूरी याचिका को गलत मानते हैं। अगर याचिका में कोई तथ्य होता, तो वो सुनवाई करते। इससे पहले याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से लिखित दलीलों के आधार पर फैसला करने का निवेदन किया था।
पीठ ने कहा कि इस मामले का जिक्र सुबह तत्काल लिस्टिंग के लिए किया गया था। याचिका में मांगी गई राहत की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए मामले का उल्लेख करने वाले वकील को दोपहर 12:45 बजे अपनी बात रखने की अनुमति दी गई। दोपहर 12:45 बजे मामला हमारे सामने दाखिल करने के लिए सूचीबद्ध किया गया। सभी दलीलों को सुनने के बाद, हमें पूरी याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं दिखता क्योंकि ये गलत है। इस वजह से हम याचिका को खारिज करते हैं।
2024 तक रहेगा कार्यकाल
आपको बता दें कि जस्टिस ललित ने जस्टिस एनवी रमना की जगह ली थी, लेकिन उनका कार्यकाल बहुत छोटा रहा। वो 8 नवंबर को रिटायर हो रहे, ऐसे में सरकार ने उन्हें अपने उत्तराधिकारी का नाम देने को कहा था। जिस पर जस्टिस ललित ने जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ का नाम आगे किया। वो 10 नवंबर 2024 तक भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहेंगे। खास बात ये है कि जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता वाई. वी. चंद्रचूड़ भी भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर रह चुके हैं।












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